वो बड़े घर की थी साहब, . छोटे से दिल में कैसे रहती.
~Jiski Sazza Sirf Tum Ho Aiisa Koii Gunaah Karna Hai Mujhe .. ‘
चलो मंजूर है तेरी बेरुखी मुझको बस इतना करो कि बेवफा मत होना
पुराने आशिक वफा तलाश करते थै, आज के आशिक जगह तलाश करते है..
मार ही डाले जो बेमौत ये दुनिया वाले हम जो जिंदा हैं तो जीने का हुनर रखते हैं
-Ishq Kiiya Jo Us’se Phir Usko Aazmana Kya?
इतनी शिकायत , इतनी शर्तें , इतनी पाबन्दी, तुम मोहब्बत कर रहे हो या सौदा कोई !!
मै और मेरा रब्ब रोज भूल जाते है वह मेरे गुनाहो को मै उसकी रहमतो को
हम जो तेरे बगैर ज़िंदा है, सब दिखावा है दुनिया के लिए !!
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