पठान बहुत ही आशावादी था। हर बात पर कहता था, “ख़ुदा ख़ैर करे, इससे भी बुरा हो सकता था।”

उसके सारे दोस्त उसकी इस बात से बहुत परेशान थे। एक दिन उन सब ने मिलकर एक कहानी बनायी जिससे ज्यादा बुरा होना मुश्किल था।

पठान का एक दोस्त ग़मगीन सा चेहरा बना कर बोला, “यार, कल तो बहुत ही बुरा हुआ।”

पठान: क्यों क्या हुआ?

दोस्त: यार कल मेरा पडोसी जब घर लौटा तो उसकी बीवी किसी गैर मर्द के साथ रंगरलियां मना रही थी। यह देख कर मेरे पडोसी ने गुस्से में आकर दोनों को गोलियों से भून दिया और फिर खुद को भी गोली मार ली।

पठान: ख़ुदा ख़ैर करे, इससे भी बुरा हो सकता था।

दोस्त (चिढ कर): इससे बुरा क्या हो सकता था?

पठान: अगर यह किस्सा परसों का होता तो मरने वालों में एक नाम मेरा होता


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