भीरे की तूड़े आली बुग्गी पल्टगी … गुमसुम परेशान बुग्गी के चारो कान्नि चकरी काटै था …
जब्बे उसका डब्बी शामा बी मोटरसैकल पै शहर तै आवै था … बोल्या रै भीरे याके बणी …
भीरा बोल्या पूच्छै ना भाई … आज बाब्बू मारैगा …
बोल्या हट मेरे यार या तो होंदी जांदी रैं पल्टगी सुसरी पल्टगी बंदे ल्याकै सीधी करवा ल्यांगे … अर तुड़ा बी ढो द्यांगे टैंशन मतना करै …
भीरा बोल्या भाई कुच्छे करले बाब्बू तो मन्नै मारैगा …
बोल्या यार तूं तो घणा ए डर ग्या … लै शहर तै बोतल ल्याया था ढक्कण खोल कै मार दो घूंट मूं लाकै … सब ठीक हो जागा …
भीरा फेर … ना भाई बाब्बू मारैगा …
शामे नै हांगे तै उस्तै थोड़ी प्या दी ..
भीर उल्टे हाथ तै मूं साफ करदा बोल्या … भाई मानजा बाब्बू मारैगा …
शामा छौह मैं आ ग्या … हद ऐ यार चाल मैं बात करूं तेरे बाब्बू गैल्यां … है कित ताऊ …
भीरा पल्टी होड़ बुग्गी कन्नी देखकै बोल्या … तूड़े के निच्चै दब रया है …


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