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ਸੱਚਖੰਡ ਸ਼੍ਰੀ ਹਰਮੰਦਿਰ ਸਾਹਿਬ ਅਮ੍ਰਿਤਸਰ ਵਿਖੇ ਹੋਇਆ ਅੱਸੂ ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਸੰਗਰਾਂਦ ਦਾ ਪਾਵਨ ਮੁਖਵਾਕ

ਗੁਰੂ ਪਿਆਰੀ ਸਾਧ ਸੰਗਤ ਜੀਓ!!
ਗੁਰੂ ਸਹਿਬ ਕਿ੍ਪਾ ਕਰਨ ਅੱਸੂ ਦਾ ਇਹ ਮਹੀਨਾਂ ਆਪ ਸਭ ਲਈ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਭਰਿਆ ਹੋਵੇ ਜੀ।
ਵਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਸਰਬੱਤ ਸੰਗਤ ਨੂੰ ਤੰਦਰੁਸਤੀ, ਨਾਮ ਬਾਣੀ ਦੀ ਦਾਤ ਅਤੇ ਚੜ੍ਹਦੀ ਕਲਾ ਦੀ ਦਾਤ ਬਖਸ਼ਣ ਜੀ।
👏🏻ਬੇਨਤੀ:- ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਸ਼ੇਅਰ ਕਰਕੇ ਸੇਵਾ ਵਿੱਚ ਹਿੱਸਾ ਪਾਓ ਜੀ।

ਸੱਚਖੰਡ ਸ਼੍ਰੀ ਹਰਮੰਦਿਰ ਸਾਹਿਬ ਅਮ੍ਰਿਤਸਰ ਵਿਖੇ ਹੋਇਆ ਅੱਸੂ ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਸੰਗਰਾਂਦ ਦਾ ਪਾਵਨ ਮੁਖਵਾਕ: 16-09-2020 ​Ang 135

ਅਸੁਨਿ ਪ੍ਰੇਮ ਉਮਾਹੜਾ ਕਿਉ ਮਿਲੀਐ ਹਰਿ ਜਾਇ ॥ ਮਨਿ ਤਨਿ ਪਿਆਸ ਦਰਸਨ ਘਣੀ ਕੋਈ ਆਣਿ ਮਿਲਾਵੈ ਮਾਇ ॥ ਸੰਤ ਸਹਾਈ ਪ੍ਰੇਮ ਕੇ ਹਉ ਤਿਨ ਕੈ ਲਾਗਾ ਪਾਇ ॥ ਵਿਣੁ ਪ੍ਰਭ ਕਿਉ ਸੁਖੁ ਪਾਈਐ ਦੂਜੀ ਨਾਹੀ ਜਾਇ ॥ ਜਿੰਨ੍ਹ੍ਹੀ ਚਾਖਿਆ ਪ੍ਰੇਮ ਰਸੁ ਸੇ ਤ੍ਰਿਪਤਿ ਰਹੇ ਆਘਾਇ ॥ ਆਪੁ ਤਿਆਗਿ ਬਿਨਤੀ ਕਰਹਿ ਲੇਹੁ ਪ੍ਰਭੂ ਲੜਿ ਲਾਇ ॥ ਜੋ ਹਰਿ ਕੰਤਿ ਮਿਲਾਈਆ ਸਿ ਵਿਛੁੜਿ ਕਤਹਿ ਨ ਜਾਇ ॥ ਪ੍ਰਭ ਵਿਣੁ ਦੂਜਾ ਕੋ ਨਹੀ ਨਾਨਕ ਹਰਿ ਸਰਣਾਇ ॥ ਅਸੂ ਸੁਖੀ ਵਸੰਦੀਆ ਜਿਨਾ ਮਇਆ ਹਰਿ ਰਾਇ ॥੮॥

ਅਰਥ: ਰਾਗ ਮਾਝ, ਘਰ ੪ ਵਿੱਚ ਗੁਰੂ ਅਰਜਨਦੇਵ ਜੀ ਦੀ ‘ਬਾਰਹ ਮਾਹਾ’ ਬਾਣੀ। ਹੇ ਮਾਂ! (ਭਾਦਰੋਂ ਦੇ ਘੁੰਮੇ ਤੇ ਤ੍ਰਾਟਕੇ ਲੰਘਣ ਪਿੱਛੋਂ) ਅੱਸੂ (ਦੀ ਮਿੱਠੀ ਮਿੱਠੀ ਰੁੱਤ) ਵਿਚ (ਮੇਰੇ ਅੰਦਰ ਪ੍ਰਭੂ-ਪਤੀ ਦੇ) ਪਿਆਰ ਦਾ ਉਛਾਲਾ ਆ ਰਿਹਾ ਹੈ (ਮਨ ਤੜਫਦਾ ਹੈ ਕਿ) ਕਿਸੇ ਨਾ ਕਿਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਚੱਲ ਕੇ ਪ੍ਰਭੂ-ਪਤੀ ਨੂੰ ਮਿਲਾਂ। ਮੇਰੇ ਮਨ ਵਿਚ ਮੇਰੇ ਤਨ ਵਿਚ ਪ੍ਰਭੂ ਦੇ ਦਰਸਨ ਦੀ ਬੜੀ ਪਿਆਸ ਲੱਗੀ ਹੋਈ ਹੈ (ਚਿੱਤ ਲੋਚਦਾ ਹੈ ਕਿ) ਕੋਈ (ਉਸ ਪਤੀ ਨੂੰ) ਲਿਆ ਕੇ ਮੇਲ ਕਰਾ ਦੇਵੇ। (ਇਹ ਸੁਣ ਕੇ ਕਿ) ਸੰਤ ਜਨ ਪ੍ਰੇਮ ਵਧਾਣ ਵਿਚ ਸਹੈਤਾ ਕਰਿਆ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਮੈਂ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਚਰਨੀਂ ਲੱਗੀ ਹਾਂ। (ਹੇ ਮਾਂ!) ਪ੍ਰਭੂ ਤੋਂ ਬਿਨਾ ਸੁਖ ਆਨੰਦ ਨਹੀਂ ਮਿਲ ਸਕਦਾ (ਕਿਉਂਕਿ ਸੁਖ-ਆਨੰਦ ਦੀ) ਹੋਰ ਕੋਈ ਥਾਂ ਹੀ ਨਹੀਂ। ਜਿਨ੍ਹਾਂ (ਵਡ-ਭਾਗੀਆਂ) ਨੇ ਪ੍ਰਭੂ-ਪਿਆਰ ਦਾ ਸੁਆਦ (ਇਕ ਵਾਰੀ) ਚੱਖ ਲਿਆ ਹੈ (ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਮਾਇਆ ਦੇ ਸੁਆਦ ਭੁੱਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਮਾਇਆ ਵੱਲੋਂ) ਉਹ ਰੱਜ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਆਪਾ-ਭਾਵ ਛੱਡ ਕੇ ਉਹ ਸਦਾ ਅਰਦਾਸਾਂ ਕਰਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ– ਹੇ ਪ੍ਰਭੂ! ਸਾਨੂੰ ਆਪਣੇ ਲੜ ਲਾਈ ਰੱਖ। ਜਿਸ ਜੀਵ-ਇਸਤ੍ਰੀ ਨੂੰ ਪ੍ਰਭੂ ਖਸਮ ਨੇ ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਲਿਆ ਹੈ, ਉਹ (ਉਸ ਮਿਲਾਪ ਵਿਚੋਂ) ਵਿੱਛੁੜ ਕੇ ਹੋਰ ਕਿਸੇ ਥਾਂ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦੀ, (ਕਿਉਂਕਿ) ਹੇ ਨਾਨਕ (ਉਸ ਨੂੰ ਨਿਸਚਾ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਸਦੀਵੀ ਸੁਖ ਵਾਸਤੇ) ਪ੍ਰਭੂ ਦੀ ਸਰਨ ਤੋਂ ਬਿਨਾ ਹੋਰ ਕੋਈ ਥਾਂ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਉਹ ਸਦਾ ਪ੍ਰਭੂ ਦੀ ਸਰਨ ਪਈ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ। ਅੱਸੂ (ਦੀ ਮਿੱਠੀ ਮਿੱਠੀ ਰੁੱਤ) ਵਿਚ ਉਹ ਜੀਵ-ਇਸਤ੍ਰੀਆਂ ਸੁਖ ਵਿਚ ਵੱਸਦੀਆਂ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉੱਤੇ ਪਰਮਾਤਮਾ ਦੀ ਕਿਰਪਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ।8।

असुनि प्रेम उमाहड़ा किउ मिलीऐ हरि जाइ ॥ मनि तनि पिआस दरसन घणी कोई आणि मिलावै माइ ॥ संत सहाई प्रेम के हउ तिन कै लागा पाइ ॥ विणु प्रभ किउ सुखु पाईऐ दूजी नाही जाइ ॥ जिंन्ही चाखिआ प्रेम रसु से त्रिपति रहे आघाइ ॥ आपु तिआगि बिनती करहि लेहु प्रभू लड़ि लाइ ॥ जो हरि कंति मिलाईआ सि विछुड़ि कतहि न जाइ ॥ प्रभ विणु दूजा को नही नानक हरि सरणाइ ॥ असू सुखी वसंदीआ जिना मइआ हरि राइ ॥८॥

बारह माहा मांझ महला ५ घरु ४ अर्थ: हे मां! (भाद्रों की तपश भरी घुटन गुजरने के बाद) असू (की मीठी मीठी ऋतु) में (मेरे अंदर प्रभू पति के) प्यार का उछाला आ रहा है। (मन तड़फता है कि) किसी ना किसी तरह चल के प्रभू पति को मिलूँ। मेरे मन में मेरे तन में प्रभू के दर्शन की बड़ी प्यास लगी हुई है (चिक्त चाहता है कि) कोई (उस पति को) ला के मेल करा देवे। (ये सुन के कि) संत जन प्रेम बढ़ाने में सहायता किया करते हैं, मैं उनके चरणों में लगी हूँ। (हे माँ!) प्रभू के बगैर सुख आनंद नहीं मिल सकता (क्योंकि सुख आनंद की) और कोई जगह ही नहीं। जिन (भाग्यशालियों) ने प्रभू प्यार का स्वाद (एक बार) चख लिया है (उन्हें माया के स्वाद भूल जाते हैं, माया की ओर से) वे तृप्त हो जाते हैं। स्वै भाव छोड़ के वे सदा अरदासें ही करते रहते हैं– हे प्रभू! हमें अपने साथ जोड़ के रखो। जिस जीव-स्त्री को पति प्रभू ने अपने साथ मिला लिया है, वह (उस मिलाप में से) विछुड़ के अन्य किसी जगह नहीं जाती। (क्योंकि) हे नानक! (उसे निश्चय आ जाता है कि सदीवी सुख के वास्ते) प्रभू की शरण के बिना और कोई जगह नहीं है। वह सदा प्रभू की शरण पड़ी रहती है। असू (की मीठी मीठी ऋतु) में वह जीव सि्त्रयां सुखी बसती हैं, जिनपे परमात्मा की कृपा होती है।8।

Asun Praem Oumaaharraa Kio Mileeai Har Jaae || Man Than Piaas Dharasan Ghanee Koee Aan Milaavai Maae || Santh Sehaaee Praem Kae Ho Thin Kai Laagaa Paae || Vin Prabh Kio Sukh Paaeeai Dhoojee Naahee Jaae || Jinnhee Chaakhiaa Praem Ras Sae Thripath Rehae Aaghaae || Aap Thiaag Binathee Karehi Laehu Prabhoo Larr Laae || Jo Har Kanth Milaaeeaa S Vishhurr Kathehi N Jaae || Prabh Vin Dhoojaa Ko Nehee Naanak Har Saranaae || Asoo Sukhee Vasandheeaa Jinaa Maeiaa Har Raae ||8||

Baareh Maahaa Maanjh Mehalaa 5 Ghar 4 Meaning: Baarah Maahaa ~ The Twelve Months: Maajh, Fifth Mehl, Fourth House: In the month of Assu, my love for the Lord overwhelms me. How can I go and meet the Lord? My mind and body are so thirsty for the Blessed Vision of His Darshan. Won’t someone please come and lead me to him, O my mother. The Saints are the helpers of the Lord’s lovers; I fall and touch their feet. Without God, how can I find peace? There is nowhere else to go. Those who have tasted the sublime essence of His Love, remain satisfied and fulfilled. They renounce their selfishness and conceit, and they pray, “”God, please attach me to the hem of Your robe.”” Those whom the Husband Lord has united with Himself, shall not be separated from Him again. Without God, there is no other at all. Nanak has entered the Sanctuary of the Lord. In Assu, the Lord, the Sovereign King, has granted His Mercy, and they dwell in peace. ||8||

ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ
ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਹਿ ਜੀ

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तर्क

विद्वता के साथ अगर अहंकार हो जाये तो परिणाम क्या होता है उसी से संधार्वित यह छोटी सी कहानी है। एक बार कालिदास एक घर के सामने गए,उन्हें जोरों की प्यास लगी थी। वे बोले-माते,पानी पीला दीजिये,बड़ा पुण्य होगा। स्त्री बोली -बेटा,मैं तो तुम्हे जानती तक नहीं। पहले अपना परिचय दो,फिर मैं तुम्हे पानी पीला दूंगी.कालिदास ने कहा -माते ,मैं एक पथिक हूँ। स्त्री बोली-तुम पथिक कैसे हो सकते हो। इस संसार में तो पथिक दो ही हैं -सूर्य और चन्द्रमा जो कभी रुकते नहीं ,हमेशा चलते रहते हैं। सत्य बताओ। फिर कालिदास ने कहा -मैं मेहमान हूँ कृपया ,पानी पिला दे। स्त्री बोली-इस संसार में दो ही मेहमान हैं -पहला धन और दूसरा यौवन.इन्हे जाने में समय नहीं लगता,सत्य बताओ की तुम कौन हो? कालिदास अब तक परेशान हो चुके थे। उन्होंने कहा -मैं सहनशील हूँ अब तो पानी पिला दे स्त्री ने कहा-नहीं ,सहनशील तो दो ही हैं-पहली धरती माता जो पापी से लेकर पुण्यात्मा तक सबका बोझ ढोती है। अपने सीने से बीज को पेड़ में बदलकर अनाज का भण्डार देती है। दूसरा है पेड़,चाहे जितना भी पत्थर मारो,मीठे फल ही देती हैं। तुम सहनशील नहीं हो सकते। सच बताओ की तुम कौन हो ? कालिदास लगातार तर्क से झल्ला गए। बोले-मैं हठी हूँ। स्त्री बोली -असत्य,हठी तो दो ही हैं -पहला नख और दूसरा केश,चाहे कितना भी काटो,बार -बार निकल आते हैं। हे ब्राह्मण,तुम कौन हो ?अब तक पूरी तरह से तर्क में पराजित और अपमानित कालिदास ने कहा-फिर तो मैं मुर्ख हूँ। स्त्री ने कहा -नहीं,तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो ?इस संसार में तो दो ही मूर्ख है। पहला राजा जो बिना योग्यता के भी शासन करता है। दूसरा दरबारी पंडित जो यह बखूबी जानता है की राजा अयोग्य है फिर भी उसे प्रसन्न करने के लिए हर गलत फरमान को सही ठहराता है। अब तक तो कालिदास मूर्च्छित हो चले थे। वे वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना करने लगे। वृद्धा ने कहा -उठो वत्स-आवाज सुनकर सामने देखा तो सामने माता सरवस्ती खड़ी थी। माता ने समझाया -तूने सीख के बल पर मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया। और फिर अहंकार कर बैठे। इसी कारण मुझे तुम्हारी आँखे खोलने के लिए यह स्वांग करना पड़ा। कालिदास नतमस्तक हो गए उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। भरपेट पानी पीया फिर आगे बढ़ चले।


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इंतज़ार

सपने लुभाते हैं तो रुलाते भी हैं।आनन्द कहाँ है,बस सपने ही तो हैं। जिन आँखों में शबनम थी,चाँद-सितारे थे,आज वही आँखे सुनी-सुनी सी है। चीड़ के नीचे एक लड़का अकेला बैठा है। बार-बार अपनी कलाई पर बंधी घडी की ओर देखता है। इंतज़ार के पल कितने कठिन होते हैं। कभी बेंच पर वह बैठता तो कभी टहलने लगता। ठंडी हवा के झोंकों में वह काँप उठता उसे लगता की मानो वक़्त ठहर सा गया हो। पत्तों की सरसराहट पर वह सतर्क हो जाता,तभी उसने देखा की उसका प्यार उसके सामने है। दोनों बेंच पर बैठ गए। उसने लड़की से कुछ कहना चाहा पर अंदर एक दर्द उमड़ रहा था। लड़की ने उसे समझाना चाहा। वह चुपचाप सुनता रहा। लड़की की आँखों में आंसू की कुछ बूंदें तैर रही थी। वह चली गई शायद दुबारा कभी नहीं मिलने के लिए। लड़का रोज आता। घंटों इंतज़ार कर घर लौट जाता। उसने अपने दर्द को जब्ज़ कर लिया था। श्याद लड़की से रहा नहीं गया। वह आयी ,पूछा ,आखिर कब तक मेरा इंतज़ार करोगे? जिंदगी में कुछ हासिल करना है की नहीं? आखिर कब तक अपनी नाकमाबियों का रोना रोते रहोगे?मैं किसे दोष दूँ। अपने पेरेंट्स को की अपनी किस्मत को? शायद उनकी नसीहत सही थी। वर्तमान कड़ुवाहट लिए था अतीत वर्तमान के सामने बिखर चुका था। कहानी -कवितायें लिखते हो या छोड़ दिया ?लड़का शून्य की तरफ निहार रहा था। फिर उसने अपनी चुप्पी तोड़ी। तुम्हारे लिए एक तोहफा लाया हूँ ,लेने से इंकार मत करना। आसमान में बादलों की लुकाछिपी जारी थी। सर्द हवाएं पत्तों पर फिसल रही थी। वह ढलान पर उतर रहा था। लड़की देखती रही ,उसने पीछे मुड़कर भी नहीं देखा। उसने पैकेट खोला। एक किताब थी ,लिखा था ‘-सिर्फ तुम्हरे लिए ‘अप्रतिम प्यार का नायाब भेंट एकाएक मौसम का बदरंग होना उसे तनिक भी नहीं भाया.नीले आसमान में हंस का एक जोड़ा अपनी घोंसला की तरफ लौट रहे थे।


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farida

ਫਰੀਦਾ ਕਾਲੇ ਮੈਡੇ ਕਪੜੇ ਕਾਲਾ ਮੈਡਾ ਵੇਸ
ਗੁਨਹੀ ਭਰਿਆ ਮੇ ਫਿਰਾ ਲੋਕ ਕਹੈ ਦਰਵੇਸੁ

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Filipino Love Status

BUMITAW

Sabi nga nga nila kumain ka nag SITAW para matutu kang BUMITAW sa mahal mong ang mahal ay HINDI ikaw🍀🥺

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English Sad Status

old messages

I read our old messages🤪
I laugh🤪
Then i cry🙃

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Filipino Funny Status

siniraan

It really hurts ang iniwan nang ganito yung ang bait mo na tapos siniraan ka pa niya ey🎼🎼🎼🎼🎼🎶🎶🎶🎶🎶🤪🤪🤪

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