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~Tum Sochte Hogy
Tumhe Hum Bhool Jatey Haiin
Magar Yeh Bhool Tumhari Haii
Asal Meiin Baat Kuch Yoon Haii
Ke Jab Tum Yaad Aatey Ho
Toh Kuch Bhii Yaad Nahii Rehta
Aur Tumharii Yaad Meiin Kho Kar
Hum Batana Bhool Jatey Haiin
Ke Tum Kiitna Yaad Aatey Ho .. ‘

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दुनिया मे आपकी ENTRY चाहे जैसी भी हो,

EXIT शानदार होनी चाहिए

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मुझे शराब की बोतल का
स्वभाव पसन्द आता है

जो खुद ‘खाली‘ होकर
दूसरो को ‘फुल‘ कर देती है!

इसी को निस्वार्थ सेवा कहते हैं !!

*- स्वामी पीयेकानन्द*

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RBI का सभी बैंकों को निर्देश।

पासबुक के आखिरी पन्ने पर प्रिंट करवाएं गीता-सार

“तुम क्या ले के आये थे, क्या ले के जाओगे”
“क्यों रोते हो, तुम्हारा क्या था जो खो गया”
“जो लिया यहीं से लिया, जो दिया यहीं दिया”
“जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का था। परसों किसी और का हो जाएगा”

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चुनाव के मौसम में बैंकॉक जाकर राहुल गांधी ने
उन लोगों के मुंह पर ताले मार दिए जो यह कहते रहते हैं कि राहुल गांधी चुनाव के दौरान मंदिर मंदिर भटकता है!!

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~Kabhii Aaye Ga Use Bhi Mera Khayal,
Shayad Yeh Bhi Mera Khayal Hy .. ‘

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पापा आफिस में पहुंचे ही थे कि स्कूल से फोन आया! सुरीली आवाज में एक मैम बोलीं – “सर! आप की बेटी जो सेकंड क्लास में है, मैं उसकी क्लास टीचर बोल रहीं हूँ। आज पैरंट्स टीचर मीटिंग है। रिपोर्ट कार्ड दिखाया जाएगा। आप अपनी बेटी के साथ टाईम से पहुंचें।”..
बेचारे पापा क्या करते। आदेश के पाबंद… तुरंत छुट्टी लेकर, घर से बेटी को लेकर स्कूल पहुंच गए। सामने गुलाबी साड़ी पहने,छोटी सी बिंदी लगाए, नयी उम्र की, गोरी सी लेकिन बेहद तेज मैम बैठी थी।

पापा कुछ बोल पाते कि इससे पहले लगभग डांटते हुए बोलीं – ”आप अभी रुकिए, मैं आप से अलग बात करूंगी।”

पापा ने बेटी की तरफ देखा, और दोनों चुपचाप पीछे जाकर बैठ गए।

“मैम बहुत गुस्से में लगती हैं” – बेटी ने धीरे से कहा।
“तुम्हारा रिपोर्ट कार्ड तो ठीक है” – उसी तरह पापा भी धीरे से बोले।
“पता नहीं पापा, मैंने तो देखा नहीं। “-बेटी ने अपना बचाव किया।
“मुझे भी लगता है, आज तुम्हारी मैम तुम्हारे साथ मेरी भी क्लास लेंगी।” – पापा खुद को तैयार करते हुए बोले।

वो दोनों आपस में फुसफुसा ही रहे थे कि तभी मैम खाली होकर बोलीं – “हाँ! अब आप दोनों भी आ जाइए।
पापा किसी तरह उस शहद भरी मिर्ची सी आवाज के पास पहुंचे। और बेटी पापा के के पीछे छुप कर खड़ी हो गई।
मैम- “देखिए! आप की बेटी की शिकायत तो बहुत है लेकिन पहले आप इसकी परीक्षा की कापियां और रिपोर्ट देखिए। और बताइए इसको कैसे पढ़ाया जाये” … मैम ने सारांश में लगभग सारी बात कह दी..
मैम- “पहले इंग्लिश की कापी देखिए.. फेल है आप की बेटी।”

पापा ने एक नजर बेटी को देखा, जो सहमी सी खड़ी थी..

फिर मुस्कुरा कर बोले पापा – “अंग्रेजी एक विदेशी भाषा है। इस उम्र में बच्चे अपनी ही भाषा नहीं समझ पाते।”

… इतना मैम को चिढ़ने के लिए काफी था…

मैम- “अच्छा! और ये देखिए! ये हिंदी में भी फेल है।” क्यों?

… पापा ने फिर बेटी की तरफ देखा.. मानो उसकी नजरें सॉरी बोल रहीं हों…

पापा – “हिंदी एक कठिन भाषा है। ध्वनि आधारित है। इसको जैसा बोला जाता है, वैसा लिखा जाता है। अब आप के इंग्लिश स्कूल में कोई शुद्ध हिंदी बोलने वाला नहीं होगा…”

…..पापा की बात मैम बीच में काटते हुए बोलीं…

मैम – “अच्छा… तो आप और बच्चों के बारे में क्या कहेंगे जो….

इस बार पापा ने मैम की बात काट कर बोले…

पापा – “….और बच्चे क्यों फेल हुए ये मैं नहीं बता सकता… मै तो….

मैम चिढ़ते हुए बोली – “आप पूरी बात तो सुन लिया करो, मेरा मतलब था कि और बच्चे कैसे पास हो गये…” फेल नहीं”…

“अच्छा छोड़ो ये दूसरी कापी देखो आप। आज के बच्चे जब मोबाइल और लैपटॉप की रग रग से वाकिफ हैं तो आप की बच्ची कम्प्यूटर में कैसे फेल हो गई?

…. पापा इस बार कापी को गौर से देखते हुए, गंभीरता से बोले – “ये कोई उम्र है कम्प्यूटर पढ़ने और मोबाइल चलाने की। अभी तो बच्चों को फील्ड में खेलना चाहिए।

… मैम का पारा अब सातवें आसमान पर था… वो कापियां समेटते हुए बोली-” सांइस की कापी दिखाने से तो कोई फायदा है नहीं। क्योंकि मैं भी जानती हूँ कि अल्बर्ट आइंस्टीन बचपन फेल होते थे।”

… पापा चुपचाप थे…

मैम ने फिर शिकायत आगे बढ़ाई – “ये क्लास में डिस्पलिन में नहीं रहती, बात करती है, शोर करती है, इधर-उधर घूमती है।”

पापा ने मैम को बीच में रोक कर, खोजती हुई निगाह से बोले…

पापा – “वो सब छोड़िए! आप कुछ भूल रहीं हैं। इसमें गणित की कापी कहां है। उसका रिजल्ट तो बताइए।

मैंम-(मुंह फेरते हुए) हां, उसे दिखाने की जरूरत नहीं है।

पापा – “फिर भी, जब सारी कापियां दिखा दी तो वही क्यों बाकी रहे।”

मैम ने इस बार बेटी की तरफ देखा और अनमने मन से गणित की कापी निकाल कर दे दी।

…. गणित का नम्बर, और विषयों से अलग था…. 100%…..

मैम अब भी मुंह फेरे बैठी थीं, लेकिन पापा पूरे जोश में थे।

पापा – हाँ तो मैंम, मेरी बेटी को इंग्लिश कौन पढ़ाता है?
:
मैम- (धीरे से) मैं!
:
पापा – और हिंदी कौन पढ़ाता है?
:
मैम- “मै”
:
पापा – और कम्प्यूटर कौन पढ़ाता है?
:
मैम- वो भी “मैं”
:
पापा – अब ये भी बता दीजिए कि गणित कौन पढ़ाता है?
:
मैम कुछ बोल पाती, पापा उससे पहले ही जवाब देकर खड़े हो गए…
पापा – “मैं”…
:
मैम – (झेंपते हुए) हां पता है।
:
पापा- तो अच्छा टीचर कौन है????? दुबारा मुझसे मेरी बेटी की शिकायत मत करना। बच्ची है। शरारत तो करेगी ही।
:
मैम तिलमिला कर खड़ी हो गई और जोर से बोलीं- ”मिलना तुम दोनों आज घर पर, दोनों बाप बेटी की अच्छे से खबर लेती हू….”

😀😂😂😁😆🤣🤣

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Masroof Hum Bi Bohut Hain Zindagi Ki Uljhanon Mein
*~*~dost~*~*
Par Uljhanon Mein Doston Ko Bhula Dena Dosti Nahi Hoti,. . . .

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Uski hansi mein chuppy dard ko mehsoos to kar
Wo to yunhi hans hans ke khud ko saza deta hai…

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मेरी दिल की दिवार पर तस्वीर हो तेरी _
और तेरे हाथों में हो तकदीर मेरी..! –

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Yaad aaye jo tum humko abhi…
Dil mein hui hulchul tabhi…
Lafzon ko tham liya zubaan ne haye…
Kehna hai kuchh tumse….par fir kabhi..!!

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इतनी ठोकरे देने के लिए शुकरि्य़ा ‘ऐ’ जिन्दगी….
चलने का ना सही….. सम्भलने का हुनर ताे आ ही गया….

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संता अपने दोस्त को बता रहा था – कल रात मेरी पत्नी नींद में जोर जोर हाथ पांव पटक रही थी और बड़बड़ा रही थी “नहीं रमेश, नहीं नहीं, प्लीज …..“ । मुझे बड़ा गुस्सा आया।
बंता – इसमें गुस्से की क्या बातहै ? आखिर उसने “नहीं” कहा था …..

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बहते पानी की तरह है फितरत- ए-इश्क••••
रुकता भी नहीं- थकता भी नहीं…..
और मिलता भी नहीं

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Teri mehrbani se sb kuch milta julta hai hum dono me
ae rab
Lekin uske dil me wo nhi jo meri nas nas me hai..

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वाह रे औरत की बुद्धि …..
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एक महिला कैंसर की बीमारी से मरने वाली थी।उसकी सहेलियां उसे देखने आई तो बोली अरे क्या हुआ तुम्हे…..
महिला बोली मुझे Aids हो गया है। ये सुनकर कमरे में सन्नाटा छा गया…
जब सहेलियां चली गयी तो पति ने पूछा तूमने ऐसा क्यू कहा ।
मैं माफी चाहती हूँ आप से । ताकि मेरे मरने के बाद ये औरतें आप पर डोरे न डाले और आप से दूर रहे…
पति बेहोश

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