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जब तक जिंदा हु, साथ निभाऊँगा दोस्त।
जहाँ बुलाओगे वहां आऊंगा दोस्त।।।
अगर न आ पाया…
ये समझ लेना…
…लुगाई नहीं आण दे री।

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Santa: Tune Us Ladki Ke Liye Cigarette Chod Di?
Banta: Haan
Santa: Daru Ko Bhi Chod Diya?
Banta: Haan
Santa: Jua Bhi Chod Diya?
Banta: Haan
Santa: Abey To Fir Us Se Shadi Kyu Nahi Ki?
Banta: Oh Yaar, Itna Sudhar Gaya Tha Ke Usse Achhi Mil Gayi!

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ਜਿਹੜੀ ਕੁੜੀ ਯਾਰਾ ਨੂ ਪਸੰਦ ਆਉਦੀ ਆ…
ਜਾ ਤਾ ਹੁੰਦੀ ਸੈੱਟ ਜਾ ਵਿਆਹੀ ਹੁਦੀ ਆ…

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संजय दत्त की आज तक कि किसी भी पिक्चर ने 100 करोड़ का बिज़नेस नही किया।

लेकिन उसके बगैर, सिर्फ उसके जीवन पर बनी फ़िल्म ने ही सिर्फ 3 दिन में 115 करोड़ का बिज़नेस कर लिया।
समझ जाओ की हम भारतीयों को दूसरे के जीवन की पंचायत में कितना मजा आता है।

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एक बार एक केले वाला गली में केले बेच रहा था तो अचानक एक महिला ने उसे आवाज़ लगा कर बुला लिया।

महिला: भईया केले कैसे दिए।

केले वाला: 25 रूपए दर्जन बीबी जी।

महिला: अरे भईया केले तो पिलपिले हैं, कड़क और लम्बे केले नहीं हैं क्या?

केले वाला: बीबी जी कभी तो केले खाने के लिए भी ले लिया करो।

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Waqt atcha ho to aapki galti bhi mazak lgti hai
Or waqt khrab ho to mazak bhi galti ban jati hain

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समस्या – *”बेटा, मेरी बहुएं मेरा कहना नहीं सुनती। सलवार सूट और जीन्स पहन के घूमती हैं। सर पर पल्ला/चुनरी नहीं रखती और मार्किट चली जाती हैं। मार्गदर्शन करो कि कैसे इन्हें वश में करूँ…”*

*समाधान* – आंटी जी चरण स्पर्श, पहले एक कहानी सुनते हैं, फिर समस्या का समाधान सुनाते हैं।

“एक अंधे दम्पत्ति को बड़ी परेशानी होती, जब अंधी खाना बनाती तो कुत्ता आकर खा जाता। रोटियां कम पड़ जाती। तब अंधे को एक समझदार व्यक्ति ने आइडिया दिया कि तुम डंडा लेकर दरवाजे पर थोड़ी थोड़ी देर में फटकते रहना, जब तक अंधी रोटी बनाये। अब कुत्ता *तुम्हारे हाथ मे डंडा देखेगा और डंडे की खटखट सुनेगा तो स्वतः डर के भाग जाएगा रोटियां सुरक्षित रहेंगी*। युक्ति काम कर गयी, अंधे दम्पत्ति खुश हो गए।

कुछ वर्षों बाद दोनों के घर मे सुंदर पुत्र हुआ, जिसके आंखे थी और स्वस्थ था। उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा किया। उसकी शादी हुई और बहू आयी। बहु जैसे ही रोटियां बनाने लगी तो लड़के ने डंडा लेकर दरवाजे पर खटखट करने लगा। बहु ने पूँछा ये क्या कर रहे हो और क्यों? तो लड़के ने बताया ये हमारे घर की परम्परा है, मेरी माता जब भी रोटी बनाती तो पापा ऐसे ही करते थे। कुछ दिन बाद उनके घर मे एक गुणीजन आये, तो माज़रा देख समझ गए। बोले बेटा तुम्हारे माता-पिता अंधे थे, अक्षम थे तो उन्होंने ने डंडे की खटखट के सहारे रोटियां बचाई। लेकिन तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों की आंखे है, तुम्हे इस खटखट की जरूरत नहीं। *बेटे परम्पराओं के पालन में विवेक को महत्तव दो*।

आंटीजी, *इसी तरह हिंदू स्त्रियों में पर्दा प्रथा मुगल आततायियों के कारण आयी थी*, क्योंकि वो सुंदर स्त्रियों को उठा ले जाते थे। इसलिए स्त्रियों को मुंह ढककर रखने की आवश्यकता पड़ती थी। सर पर हमेशा पल्लू होता था यदि घोड़े के पदचाप की आवाज़ आये तो मुंह पर पल्ला तुरन्त खींच सकें।”

अब हम स्वतन्त्र देश के स्वतन्त्र नागरिक है, राजा का शासन और सामंतवाद खत्म हो गया है। अब स्त्रियों को सर पर अनावश्यक पल्ला और पर्दा प्रथा पालन की आवश्यकता नहीं है।

घर के बड़ो का सम्मान आंखों में होना चाहिए, बोलने में अदब होना चाहिए और व्यवहार में विनम्रता छोटो के अंदर होनी चाहिए।

सर पर पल्ला रखे और वृद्धावस्था में सास-ससुर को कष्ट दे तो क्या ऐसी बहु ठीक रहेगी?

आंटीजी पहले हम सब लकड़ियों से चूल्हे में खाना बनाते थे, लेकिन अब गैस में बनाते है। पहले बैलगाड़ी थी और अब लेटेस्ट डीज़ल/पेट्रोल गाड़िया है। टीवी/मोबाइल/लैपटॉप/AC इत्यादि नई टेक्नोलॉजी उपयोग जब बिना झिझक के कर रहे हैं, तो फिर बहुओं को पुराने जमाने के हिसाब से क्यों रखना चाहती है? नए परिधान यदि सभ्य है, सलवार कुर्ती, जीन्स कुर्ती तो उसमें किसी को समस्या नहीं होनी चाहिए। जब बेटियाँ उन्ही वस्त्रों में स्वीकार्य है तो फिर बहु के लिए समस्या क्यों?

आंटी जी, “परिवर्तन संसार का नियम है”। यदि आप अच्छे संस्कार घर में बनाये रखना चाहते हो तो उस सँस्कार के पीछे का लॉजिक प्यार से बहु- बेटी को समझाओ। उन्हें थोड़ी प्राइवेसी दो और खुले दिल से उनका पॉइंट ऑफ व्यू भी समझो।

बहु भी किसी की बेटी है, आपकी बेटी भी किसी की बहू है। अतः घर में सुख-शांति और आनन्दमय वातावरण के लिए *जिस तरह आपने मोबाइल जैसी टेक्नोलॉजी को स्वीकार किया है वैसे ही बहु के नए परिधान को स्वीकार लीजिये। बहु को एक मां की नज़र से बेटी रूप में देखिए, और उससे मित्रवत रहिये।*

*”सबसे बड़ा रोग- क्या कहेंगे लोग”*, इससे बचिए, क्योंकि जब आपको सेवा की जरूरत होगी तो लोग कभी उपलब्ध न होंगे। आपको *’बेटे-बहु’* ही चाहिए होंगे।

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~Mohabbat Ki Na Bat Karo Ye Purani Batain Hain,
Hum Se Aj Ki Bat Karo Ab Tum Kis K Ho .. ^

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जो मेरी आँखो मे पलको पे रहता था,
आज काजल लगाया तो बहुत याद आया।

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~Terey Baad Nazar Aati Nahi Mujhe Ab Koi Manzil,
Kisi Aur Ka Ho Jana Ab Merey Bas Mein Hi Nahi .. ‘

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ज़ख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे;

आंसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे;

ये मत पूछना किसने दर्द दिया;

वरना कुछ अपनों के सर झुक जाएंगे।

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The pain of missing friends
is realized when
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U r standing some where nd see
a
group of friends having fun…….
U smile nd say to urself-
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‘HUM TO ISSE BHI JYADA
KAMINEY THE’.
dedicate to ol my frds

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-Mujhey Ab Farq Nahi Parta ,
Tumhare Badal Janey Sey .. ‘

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पप्पू होटल में काम करने लगा।

ग्राहक – पिज़्ज़ा कितने का है ?

पप्पू – 10 रूपये।

ग्राहक – इतना सस्ता,
एक विस्की कितने की है ?

पप्पू – 15 रूपये।

ग्राहक – इस होटल का मालिक बड़ा नेक इंसान है,
मैं आपके मालिक से मिलना चाहता हूँ।

पप्पू – वो मेरी बीवी के साथ है।

ग्राहक – तुम्हारी बीवी के साथ क्या कर रहा है।

पप्पू – जो मैं उसके होटल के साथ कर रहा हूँ।

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एक कड़वा सत्य
.
😇
😇
😇
एक औरत जब गुस्सा हो जाती है
तो
एक घंटे में सब कुछ पैक कर लेती है ।
😯
😯
😯
मगर जब कही घूमने जाना हो तो एक हफते तक सामान पैक नही होता है

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कागज़ पे लिखी गज़ल,
बकरी चबा गयी !
चर्चा पूरे शहर में हुई,
कि बकरी शेर खा गयी !!!

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