एक बार की बात है कि साहब जी, एक
कंजूस के यहां शादी में गए।
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शादी का पंडाल बड़ा भव्य था और उसमें अंदर जाने के
लिए 2 दरवाजे थे।
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एक दरवाजे पर रिश्तेदार, दूसरे पर दोस्त लिखा था।
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साहब जी, बड़े फख्र से दोस्त वाले दरवाजे से अंदर
गए।
आगे फिर 2 दरवाजे थे,
एक पर महिला, दूसरे पर पुरुष लिखा था।
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साहब जी पुरुष वाले दरवाजे से अंदर गए।
वहां भी 2 दरवाजे और थे,
एक पर गिफ्ट (gift) देने वाला,
दूसरे पर बिना गिफ्ट (without-gift) वाले लिखा था।
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साहब जी को हर बार अपनी
मर्जी के दरवाजे से अंदर जाने में बड़ा मजा आ रहा था
| उसने ऐसा इंतजाम पहली बार देखा था |
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साहब जी बिना-गिफ्ट (without-gift) वाले दरवाजे से
अंदर चले गए।
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जब अंदर जाकर देखा तो साहब जी बाहर
गली में खड़े थे।
और वहॉं लिखा था… शर्म तो आ नहीं
रही होगी,
कंजूस की शादी और मुफ्त (free) में
रोटी खायेगा???
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जा-जा बाहर जा और हवा खा.
पहले एक ने रैड लाइट जंप की, पीछे से 5 और ने की।
पुलिस ने पहले को छोड़कर सभी का चालान काटा।
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बाकियों ने पूछा.. “इसे क्यों छोड दिया?”
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इंस्पेक्टर: यह हमारा ही आदमी है ये वापस जाएगा
रैड लाइट जंप करेगा और तुम जैसे 4-5 को फिर फंसवाएगा।
हमें भी टार्गेट पूरे करने होते हैं
Mat poochh mujhe iss tasveer mein kya rakha hai
bholi si aankhon mein sansaar racha rakha hai
inn ankhon se jhalakte sawalon mein,main hoon
tumne khud mein kahin mujhko chhupa rakha hai