नसीहत देता हूँ इसका मतलब ये नही…..
मैं समझदार हुँ….
बस हमने गलतिया आपसे ज्यादा की है।
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नसीहत देता हूँ इसका मतलब ये नही…..
मैं समझदार हुँ….
बस हमने गलतिया आपसे ज्यादा की है।
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मोह्ह्ब्ब्त की कहानी को मुकम्म्ल नही कर पाये…
अधूरा था जो किस्सा अधूरा ही छोड आये
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इक झलक जो मुझे आज तेरी मिल गयी मुझे
फिर से आज जीने की वजह मिल गयी
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हां हो रही है हलचल फिर से एक बार इस खामोश जिदंगी मे….
कोई बता दो कि की खुश़ीया आएगी या फिर से ईक नया तुफान 😔
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मैं मानता हूँ खुद की गलतियां भी कम नहीं रही होंगी मगर बेकसूर उन्हें भी कहना मुनासिब नहीं
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क्या बयां करूँ कि लब अब खामोश रहते हैं,
जुदा होकर उनसे हम अधूरे से लगते हैं
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सुना है, शहर में ज़ख़्मी दिलो का मेला है,
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चलो हम भी कुछ गम अपने पेश करते है.
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मजबुरीयां तुमहारी थी और देख …!!
तनहा हम हाे गऐ
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तुम्हे फुरसत हो दुनियां से तो कभी आकर मिलना,
हमारे पास सिवा फुरसत के और रह क्या गया है..
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गिला बनता ही नहीं बेरुखी का,
दिल ही तो है, भर गया होगा।
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~Gar Tum Jo Saath Aa Gey Hote,
Ziindagi Har Tarah Se Mumkin Thi .. ‘
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नहीं जीना मुझे अब उस नकली अपनों के मेले में …
खुश रहने की कोशिश कर लूंगा खुद हीं अकेले में
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दोस्तों ने हमें कूटा , दुश्मन में कहाँ दम था,
पिट पिट के भी हँसता रहा, मैं इतना बेशरम था
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ताल्लुक अगर हो तो रूह से रूह का होना चाहिए
दिल तो अक्सर एक – दुसरे से भर जाया करते है
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Jo Tu Waada Kar Le, Meri Khamoshi Ko Parhne ka…
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Khilone Ki Tarah Be-Awaaz Hone Ko Tayaar Hoon Mei…!
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Aa kuch likhdu tere bare meIN,
Tu bhi dhundhti hogi khud ko mere Lafzon meIN
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