~Gar Tum Jo Saath Aa Gey Hote,
Ziindagi Har Tarah Se Mumkin Thi .. ‘
गुज़र गया दिन अपनी तमाम रौनके लेकर. ज़िन्दगी ने वफ़ा कि तो कल फिर सिलसिले होंगे.
अपनी पहचान का तुझसे हवाला चाहु कितना पागल हूँ जो अँधेरे से उजाला चाहु
इतना सितम से पहले सोचा भी नहीं उसने, मैं सिर्फ दीवाना नहीं.. इंसान भी था
Khushbu Ke Jazeeron Se Sitaron Ki Hadoon Tak Is Sheher Mai Sab Kuch Hai Bas Ik Teri Kami Hai .-.!
तेरा नाम जुबाँ पर आते आते रुक जाता है… . जब कोई मुझसे मेरी आखरी ख्वाहिश पूछता है…
तुम्हे क्या पता किस “दर्द” मे हूँ मैं ! जो कभी लिया ही नही,उस “कर्ज़” मे हूँ मैं
Ek Lamhey Mei’n Simat Aya Sadiyon Ka Safar, Zindagi Tez, Boht Tez Chali Ho Jaisey ..
तुझको देखा तो फिर उसको ना देखा ग़ालिब.. चाँद कहता रह गया, मैं चाँद हूँ मैं चाँद हूँ
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