मैं मानता हूँ खुद की गलतियां भी कम नहीं रही होंगी मगर बेकसूर उन्हें भी कहना मुनासिब नहीं
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~Khushiya Toh Taqdeer Meiin Honi Chahiye, Tasver Meiin Toh Har Koi Muskurata Haii .. ‘
बहुत दिन हो गए ‘मुहब्बत’ लफ्ज़ सुन सुनकर मुझे…. कल ‘बेवफ़ा’ सुना तो तरी बहुत याद आई मुझे….
कुछ गुनाह तो तेरे भी होंगे, तभी खुदा ने मुझे तुझसे जुदा कर दिया. .
लोग कहते हैं नफ़रत ख़राब चीज़ है,* *तो मोहब्बत ने कौनसा झूला झुलाया है हमे.
मेरे कंधे पर कुछ यूँ गिरे तेरे आंसू, कि सस्ती सी कमीज़ अनमोल हो गयी.!!
-Suna Haii Ishq Ka Shoq Nahii Tumko Magar Barbaad Kmaal Ka Kartey Ho .. ‘
मुझे सिर्फ इतना बता दो….इन्तजार करु….. या बदल जाऊ मै भी तुम्हारी तरह….
नींद छीन रखी है उसकी यादो ने मेरी, गिला उसकी दूरी से करूँ या अपनी चाहत से
