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छोरी :- कित है तु??
छोरा:-हस्पताल मेँ हूँ एक कार आला टक्कर मारग्या !
छोरी :- अच्छा छुट्टी कद मिलैगी??
छोरा:- दो दिन पाच्छे !
छोरी :- ठीक है ! दो दिन बाद छुट्टी मिलतै ए मेरा रिचार्ज करवा दिए !
नहीँ तो दोबारा हस्पताल म्हे पहुँचा दयूँगी ..!!
छोरा:- 😳😳😳😳 दो दिन पाछे के ईब ही ले

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एक ताऊ अपने पड़ोसी के घर से घी लाने गया
ताऊ–छोरा तेरी माँ ने पूछ थारे घी है के …..
छोरा–माँ घर घी है के ताऊ पूछ है……..
माँ–बेटा तेरे ताऊ न के दे की आपने तो रोटी चोपडन जोगा ही है…..
छोरा– ताऊ मेरी माँ कह की म्हारे तो रोटी चोपडन जोगा ही है….
ताऊ–तो तेरी माँ न कह दे की में के ढुंगा चोपडन खातर लेजा हूँ..

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दिल्ली की छोरी हरियाणवी छोरे गैल्यां ब्याह दी …
एक दन ओवर स्मार्ट बण कै पति गैल्यां मजाक कर बैठी … ड्रांइग रूम मैं बैठे तै जाकै बोली … देखिओ बाहर आपका कोई रिश्तेदार खड़ा है … 😗😗

पति नैं बाहर जाकै देख्या एक गधा खड़या था … बोल्या ओहो साले साब आप फोन बी ना करया , सास्सू जी ना आई … 😎😎

तीन दन तक मैडम पति की हर बात के जवाब में मैनी मैनी करदी रई … 😏😏

दिल्ली की लड़कियां कृप्या हरियाणा के लड़कों के गुण दोष जान के ही उनसे शादी करें … और उल्टा मजाक तो कतई ना करें … वरना मैनी मैनी करना पड़ सकता है ..

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छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार
था,,
एक नाई, एक खाती, एक काला लुहार
था….
छोटे छोटे घर थे, हर आदमी बङा दिलदार
था,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार
था..।।
.
कितै भी रोटी खा लेतै, हर घर मे भोजऩ
तैयार
था,,,
बिटोङे पे घिया तौरी हो जाती,,
जिसके आगे शाही पनीर बेकार था..
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार
था।।।
.
दो मिऩट की मैगी ना, झटपट दलिया
तैयार
था,,,
नीम की निम्बोली और शहतुत सदाबहार
था…
अपणा घङवा कस कै बजा लेते, लख्मी पुरा
संगीतकार था,,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार
था।।।
मुल्तानी माटी ते जोहड़ में नहा लेते,
साबुन अर
स्विमिंग पूल बेकार था,,,
अर फेर कबड्डी खेल लेते, कुन्सा म्हारे
क्रिकेट का
खुमार था,,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार
था।।।
बुढ़या की बात सुन लेते, कुन्सा टेलीविज़न
अर
अखबार था,,,
भाई नै भाई देख कै राज़ी था, सबमै घणा
प्यार
था,,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार
था।।।
वो प्यार, वो संस्कृति मैं इब कड़े तै ल्याऊं,
या सोच सोच कै मैं घणाए दुखी पाऊं।
जै वोए टैम फेर आज्या, तो घणाए मजा
आज्या,,,
मैं अपनी असली जिन्दगी जी पाऊं, अर मैं
इस
धरती पै सो सो शीश झुकाऊं।

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न्यू कवैं मां बाप की इज्जत करो … औरतां की इज्जत करो … बढे बुड्ढयां की इज्जत करो … छोरियां की इज्जत करो …

अरै सबकी इज्जत करो तो … वा के कए करैं सुसरी बेज्जती किसकी करैं , हमनै तो रोटी बी ना बढिया लागती जब तक दन मैं दो चार की नासां मैं तै धुम्मा ना लिकाड़ दैं उनकी बेज्जती करकै …

यार हरीयाणवी सां हम …

एक हल है या किसे नै ना कही अक छोट्टेयां की इज्जत करो … इब कल तै जड़ै बी कोई छोट्टा दिख्खै उसकी गुद्दी पै बेमतलब रैप्टा मार द्यो … 😂😂

मजाक था भाई आग्गै थारी मरजी .

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दिल्ली मैं कुछ पटाखा समर्थक स्वंयसेवक संघों नै सुप्रीम कोर्ट की रोक का एक तोड़ काड्या है …
उन्होनै फैसला करया है अक दिवाली के दिन सारे दिल्ली ऐन सी आर आल्यां तै पेट भर कै मूली के परांठे तीन तीन गलास लास्सी अर चार चार हाजमोला की गोली फरी दी जावैगी …
आजो कोर्ट साब रोक ल्यो धमाके अर कर ल्यो पोल्युशन कंट्रोल …

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पड़ोस मैं एक भाभी दिल्ली की स। आज तड़के 7 बजे म्हारै घर आयी, मैने दरवाजा खोला तो वो बोली:- कोई बात नही जी मैं फिर आ जाऊँगी।
मनै दरवाजा बंद कर दिया।
7:30 बजे दोबारा आई, दरवाजा खोलते ही बोली:-कोई बात नही जी मैं थोड़ी देर में आ जाऊँगी।
मेरे बात समझ नहीं आई, मनै दरवाजा बंद कर दिया।
8 बजे फिर आई,दरवाजा खोला तो बोली कोई बात नही जी, मैं कल ही आ जाऊँगी।
मैं बोल्या :- रूक भाभी, के चक्कर है???
तीन बार आली, फेर न्यू कहदे है बाद म्हं आऊँगी!
भाभी बोली:- जी मैं जब भी आती हूँ आपके हाथ में चम्मच मिलती है, मैं सोची आप खाना खा रहे हो तो बाद में आ जाऊँ।
मैं बोल्या रै बावलीबूच या चम्मच तो हाम साँकल म्हं लाया कराँ….!!

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हद्द ऐ यार …

एक बारां साल की लड़की का फेसबुक स्टेटस ” बहुत हुआ , अब मैं सब भूल के आगे बढ़ना चाहती हूं ”

ना बेब्बे तूं के भूलणा चावै छै का पहाड़ा … फेर तो तेरा सातवीं मैं ऐडमीशन बी कोनी होवै … आग्गै कित बढ़ैगी

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बॉलीवुड की फिल्मे ज हरयाणा म बणती तो शायद ये नाम होते-
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शोले – गबर फसग्या रान्डया क।
आँखे – दीद्दे।
आग का गोला – धकड़बोझ।
दबंग – एंड़ी थाणेदार।
गजनी – खपरभरणा।
गुंडे – सत्यानासी।
3 इडियट – तीन बोल्लीतरेड़।
क्वीन – गुलाबो का ब्याह हो ग्या गाह्।
गोलमाल – गदर कुणबा।
चेन्नई एक्सप्रेस – रूँढ़ा मद्रासी।
नमस्ते लन्दन – राण्डे चल्ये इंग्लैंड।
गदर – रोल्ला जाटा का।
महोबत्ते – लफुसड़े प्यार के।
नई पड़ोसन – नीचे राण्डया की दुकान ऊपर जुली का मकान।
कोइसी रहगी हो त बता दीयो।

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एक भाई एक तीस मंजिल बिल्डिंग की छत पै बैठ्या था …
जब्बे किसे नै आकै उसतै रुक्का दिया … औ परकासे तेरी बहू तेरे पड़ोसी राजबीर गैल्यां भाजगी …
दिल टूट ग्या माणस का अर घणी बेज्जती बी फील कर ग्या … बस दुख मैं उपर तै छाल मारदी ,
पच्चिसवीं मंजिल धौरै उसके ध्यान आई … अक मेरे पड़ोस मैं तो कोए राजबीर ना रैहता …
बीसवीं मंजिल पै दिमाग मैं आया अक रै मेरा तो ब्याह ए ना हो रया …
दसवीं मंजिल तक याद आया … ओ तेरी बेब्बे कै मेरा नाम तो सरेंदर है … या परकासा कौण है … ???
हट मेरे यार … तो मिसटर सरेंदर आपका समय समाप्त होता है … अब

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फेरे होए पाछै दहेज के समान की लिस्ट पढन लागे,
बोला एक संदूक,
एक अलमारी,
एक कुलर,
इतने मे एक निचै बैठा शराबी बोल्या- एक बैंगण भी लिख लें,
वो धमका दिया, तु चुप बैठा रह॥
फेर बोलण लागा- एक डबल बैड,
एक सीसा,
एक सोफा सैट,
वो शराबी फेर बोला- एक बैंगण भी लिख लें,
वो फेर तै धमका दिया।
फेर बोला- एक सिलाई मशीन,
एक कढाई मशीन,
एक वाशिंग मशीन,
शराबी फेर बोल्या- आरै एक बैंगण भी लिख ल्यो,
सारे बुझण लागे -बता बैगण क्यांतै लिख ले?
शराबी- अरै कैल नै छौरी गेल्या रोला होगा तै साले न्यूं ना कह दे के बैंगण ल्याई थी ?

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*टेम आण दै मोदी*
*तनै प्रधानमंत्री की कुर्सी न्यू: याद आवेगी*
ज्युकर सिरसा आले बाबे ने हनीप्रीत याद आवै

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काम धंधे के चक्कर मैं घर तै बाहर जाणा पड़या पहली बार …

साउथ इंडिया मैं चेन्नई … ओढ़ै एक घर मैं पी जी सैट हो ग्या , दो चार दन तो उनके डोस्सा , उपमा साम्भर बड़ा , इडली ठीक लागे … फेर मन भर ग्या घर की रोटी याद आण लाग्गी ,

होटलां कान्नी चल दिया पर ना रोटी ढंग की अर ना सब्जी रुह सर की … हार माणनियां तो होए ना करते हरयाणा आले मखा रै रोटी मैं बणाउंगा रूम पै खुद …

कर लिआ सारा जुगाड़ अर बणाई आड्डी टेड्डी सी रोटी अर कच्ची पक्की सी दाल … जैसी बी थी घाल्या घी अर खाई … भाई बणी तो बात सी किम्मै पर वा माँ के हाथ का सुआद ना था …

दो तीन दन बाद हाथ तो चालण लाग गया रोटी सब्जी बणान मैं पर वा बात क्यों ना बणरी यार …

फेर के बांध लिआ परणा सर पै … लाल टोप्पी आले बाबा तै ले कै अर लाल चड्डी आले बाबा तक सारेआं के मसाले जो टीवी मैं देखे थे बरते … सब्जी चरचरी सी होजा थी पर वा बात ना ,

मिहनेंक पाच्छै रात साड्डे यांरा बजे रूम पै आया आलू गाजर मटर की सब्जी बणान लाग्या … ना तो लाल मिर्च ना मसाले सब किम्मै निमट रया था … बस थोड़ी हरी मिर्च अदरक लहसण पड़या था … चाल रै आज याए सइ … बणाई सब्जी रोटी अर पहली बुरकी मुंह मैं गेरिए थी माँ के हाथ बरगी सी लाग्गी …

मन्नै तड़कै माँ तै सारी कहानी बताई … माँ बोल्ली रै बेट्टा सुआद किसी बी औरत के हाथ मैं ना होता उसकी नीयत मैं हो सै वा स्वाद गैल्यां परिवार की सेहत का बी ख्याल राक्खै सै अर घणे तेल मसाले ना गेरदी वाए पोस्टिक सुआद मर्दां की जबान पै रच बस जा है … जिसनै थम्म परदेसां मैं याद करो अक माँ के हाथ का खाणा ,

मखा ए माँ मन्नै बी आ लिया थोड़ा थोड़ा माँ के हाथ का खाणा बणाना … बेसक टोह ले कोइ मेरे खात्तर जिसनै रोटी बणानी ना आंदी हो … मैं तो न्यू चांहू अक मेरे बालक याद करैं …

बाब्बू के हाथ का खाणा … 👍👍👍

Love you माँ …

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जिंदगी ना होई मोबाईल की लीड होगी … जितना बी सुलझा कै सो ले , तड़की उलझी पावै ,

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भगवान नै दो कान क्यां तै दिए ?
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दोनूंआ नै गर्म कपड़े तै लपेट द्यो तो जाडा कम लागै है ,
थैंक्यू कैहण की जरुरत ना है हीहीही … सर्दियां आरी हैं याद राखिओ बस .

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चौधरी से मेज़बान ने पूछा-
चौधरी जी क्या लेंगे आप, हलवा लाऊं या खीर??
चौधरी – घर में कटोरा एक ही है के??

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