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हरियाणवी छोरा :- भाई घणी सुथरी छोरी है या अपणी जिंदगी मैं चइए … चइए मतबल चइए … 😎

दिल्ली आला दोस्त :- No dude she have already a boy friend … 😏

Haryanavi khaggad :- भाई गोल करण का मजा जब्बे आए करै जब कोई गोलकीपर गोल के स्यामी खड़या हो …

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She :- हैल्लो जानूं तेली याद आली है … 😗😗
He :- ओ बेबी इबी तो बात करी थी … 😎😎
She :- ओ तेरी फेर तेरे तै फोन लग ग्या के …

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हरियाणा कै बालक नैट पैक 2G लगवावै,
अर चाहवै यूट्यूब पै सपना कै डांस देखणा

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जिदंगी ना होई हिंदी फिल्म के हीरो की
कुंवारी बाहन होगी सुसरी अलजिए रै
किसे ना किसे मुसिबत मैं …

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थाम कहतै होगै ” Pointed Nose “…
हरियाणा म्ह ” मीड्डी नास ” कह दिया करै

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बोली
कसम खा तेरे जीते जी कोई मेरी सौत ना होवैगी …
मखा
सुणले जो हमनै जुदा करै वा मेरी मौत ही होवैगी
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गले लाग कै रोण लाग्गी … रोड छाप शायरी मैं तो बड्डे बड्डे इम्प्रैस कर दिए , आई बड़ी शायर … 😎

( छोह मैं आवैगी तूं जाणूं हूं … पर मैं एक कॉमेडी पेज का ऐडमिन हूं या तूं बी जाणैं है , या लास्ट आली लाइन ना लिखदा तो झकौई मन्नैं ट्रोल करण लाग जांदे … 💏

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एक बाबा दस साल तै हिमालय पै था …
एक पत्रकार उसका इंटरव्यू लेंदा बुझण लाग्या :- महाराज आप इतनी ठंड में कैसे रह लेते हो ?

महाराज नैं जवाब दिया :- बस जी तपस्या और चाय मुझे ठंड से बचाते हैं … आप क्या पसंद करेंगे तपस्या यां चाय ?

पत्रकार बोल्या ;- जी चाय …

बाबा नैं रुक्का दिया :- ए तपस्या सुणैं है या बाऊजी खात्तर चाय बणा लिया ..

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राहुल गांधी की मां क्रिश्चियन दादा पारसी …
अर वा बण ग्या कौल दतात्रेय ब्राह्मण ?

मोदी गुजरात के मोद समुदाय के उच्च कुल तै अर वा खुद नैं दलित बतावै …
ये क्या हो रहा है भाई ये क्या हो रहा है … ???

सारे रल कै देस का C … बणारे हैं अर जो इन नेताओं के पाच्छे लागरे हैं वो पक्के C… हैं

जवाब हो तो कमैंट करियो …

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बस मैं बैठ्या था घणी भीड़ थी एक सुथरी छोरी खड़ी देख कै ना डट्या गया बोल्या :- मैं तन्नै अपणी सीट दे दूं पर तूं सोच्चैगी मैं तन्नै सैट करण की कौशिश करुं हूं ,
बोली ना तो मैं तो ना सोच्चूं ऐसा … 😗
मखा रैहण दे फेर खड़ी रै ..

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Me : भाई , प्यार हो गया मन्नै
:

Dost : भाई तू एड्रेस बोल ।

हम छोरी की जिंदगी बर्बाद नही होण दयांगे

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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करनी सेना वालों से एक करबद्ध निवेदन …

भाई जो भी करो थारी मर्जी है … पर एक काम जरुर करिओ इसी बहाने औढ़ै जो मक्की के फुल्ले अर बरफ आली चाय बेच्चैं है न उनके गट्टे जरुर तोड़िओ मेरे भाई …

सुसरा दस रपइयां का सौदा नी … द्यो जी एक सौ बीस रपइए , ब्लैकमेलर हैं यार … आत्मा तक चिंघाड़ मारै है रेट सुणकै .

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आज पेपर था ग्रामीण बैंक का, बाहर चैकिंग करण आळा नै भीतर ना बड़ण दिया, मराबटा न्यूं बोल्या तेरी आधार कार्ड की फ़ोटो ना मिलती, भूंडी फ़ोटो है……. मखा आधार कार्ड में कोए भी टॉम क्रूज ना लाग्या करता…. ना मान्या मेरा सुसरा…. मखा जाऊं सूँ, याद राखिए भूखा मैं भी नहीं मरूं, हिसार के जाट कॉलेज आगै गोल गप्प्यां की रेहड़ी लाऊंगा अर तेरी छोरी मेरे ए धोरै आया करैगी पाणी के पतासे खाण 😜
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खैर… घरां आया अर आकै अलमारी खोली जिसमें मेरे आज तक के भरे होड़ सारे फॉर्म थे..IIT तै लेकै MTS तक, कैलकुलेटर लेकै हिसाब लगाया तो बेरा पाट्या इन फार्मां कै पाछै घणे रपिये फूक दिए, इतणे में एक Bullet आ जाती अर विडम्बना देखो…. ईब साली नौकरी की उम्र भी जा ली 😂😂

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टीचर :- “आंधे की माक्खी राम हटावै” इस मुहावरे का वाक्य में प्रयोग करो ,
छात्र :- जी माणस बेसक दारू पीकै आंधा बोला हो रया हो , पर दारू का गलास आंख बंद करकै पी सकै इतिहास गवाह है दारू के गलास मैं माक्खी ना गिरती क्योंकि “आंधे की माक्खी राम हटावै” … 😝😝
टीचर :- बाहर लिक्ड़ क्लास तै कमीण अर सांझ नै मिलिए .

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एक लड़की क पेट म दर्द होग्या अर वा डाक्टर धौरै गई…
डाक्टर :- रात नै के खाया था?
छौरी :- रात को मैंने हैमबर्गर, फ्राइड राईस, कार्न पिज्जा, चिल्ली पनीर और थोड़ी चिल्ड कोक ली थी।
डाक्टर :- फेसबुक कोन्या यो, साच्ची बता के खाया था?
छौरी :- जी, बथुऐ का रायता

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प्लस टू का रिजल्ट आया …

बाब्बू गब्बर … छोरा कूण मैं खड़या

बाब्बू … कितने पेपर थे … टूंऊंऊंऊंऊं ( बैकग्रांउड सांउड )

छोरा … बाब्बू घणे थे …

… कितनैयां मैं फैल होया … टूंऊंऊंऊं

…. बाब्बू सप्ली आरी हैं

… याके सौदा है रै , पास होया …

… हां बाब्बू … ना बाब्बू … वा बाब्बू वा तो बाब्बू कलियर कर दयुंगा

… सुसरे सिधा पास क्यों ना होया अर फेर बी उल्टा आ ग्या खाली दमाग … अरे ओ भीरे की माँ कितना खरच होया इसपै इस साल … टूंऊंऊंऊं

… जी पूरे पैंतिस हजार

… सुण्या तन्नैं पूउउरे पैंतिस हजार अर या पैंतिस हजार ज्यांतै अक मेरा बेट्टा आई ए ऐस बणैगा मेरा नाम करैगा … अर तन्नैं मेरा नाम मिट्टी मैं मिला दिया … अब तेरा क्या होगा भीरे … टूंऊंऊंऊं

… बाब्बू न्यू तो खड़के का रामा भी फैल हो ग्या , बिंदर का लिल्लू बी फैल हो ग्या , रामधारी का गुल्लू बी फैल हो ग्या , बीरपाल का …

… आच्छया रै या बात है के चल फेर बरफ लिकाड़ कै ल्या फरीज मैं तै पैग लाण का टैम हो रया

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