एक सात साल का छोरा अपणी माँ तै बुज्झण लाग्या … एरी माँ तूँ मन्नैं कित तै ल्याई थी ,
माँ बोली बेट्टा मन्नैं एक गत्ते के डब्बे मैं थोड़ा गुड़ अर पाणी गेर कै रख दिया … चार दिन बाद मन्नैं डब्बे मैं तूं पाया अर तूं मेरी औलाद बण ग्या ,
छोरे नै बी न्युए करी फेर चार दन बाद डब्बा खोल कै देख्या भित्तर एक कॉकरोच हांडै था … छोरा छौ मैं आकै बोल्या … साले जी तो करै तन्नैं ईबी चप्पल मार कै मार द्यूं , पर के करूं औलाद है तूं मेरी …
एक बार के होया के बुआ और
भतीजी एक गाम मैं
ब्याह दी…..
ओड़े उनके नेग बदलगे…..
भतीजी का घरआला बुआ के
घरआले का काका लागै था!!
एक दिन बुआ का घरआला उस
भतीजी के घर नै गया…….
उसने कुवाड़ खुडकाए!
भीतर तै वा भतीजी बोली कुण सा सै रै!!
तो वो बोल्या: काकी मैं सूँ
तेरा फूफा…!!
😂😂😂😂
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राम राम तडके आळी
🙏😂😂😂😂🙏
भगवान नै दो कान क्यां तै दिए ?
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दोनूंआ नै गर्म कपड़े तै लपेट द्यो तो जाडा कम लागै है ,
थैंक्यू कैहण की जरुरत ना है हीहीही … सर्दियां आरी हैं याद राखिओ बस .
दो आदमियों की बीवीयाँ मेले में खो गईं जिसमे से एक हरियाणा से था और एक दिल्ली से l
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अपनी अपनी बीवी ढूंढते हुए वो आपस में मिले..!
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तुम्हारी वाली की पहचान? – हरियाणा वाले ने दिल्ली वाले से पूछा.
दिल्ली वाला बोला – 5’7″, गोरी, भूरी आँखें और पतली है, स्लीवलेस पिंक टीशर्ट और लाल मिनी स्कर्ट पहने है।😪
तुम्हारी की क्या पहचान है ?😌
हरियाणा वाला- मेरे आली कै मार गोली, चाल तेरी ढूंढेंगे
भगतो
काल बिजली फ्लाइंग आले आगे घर में
न्यूँ बोले थारे मीटर तो कोनी ????
मेरी माँ बोली म्हारे तो बहू भी कोनी
करवा दयो रिश्ता म्हारे छोरे का अपनी छोरी गेल????
** सारे काकर पाड़ गये बैठ क गाड़ी म **
नब्बे दिन छुटके नब्बे दिन नवम्बर दिसम्बर जनवरी … नहाना मतलब मौत को दावत देना …
फरवरी … एक महीना ऐसे ही इंतजार करो क्योंकि अचानक पानी उपर डालोगे तो गरम सरद हो सकता है ….
सिर्फ होली से बचो तो मार्च भी निकल जाएगा … सुसरे गीले पानी से बच के …
अप्रेल में थोड़ा सैंट छिड़क लो … लोगों का ऐसे ही ऐप्रेल फूल बना रहेगा … बइ बंदा खुश्बुएं फेंक रहा तो नहाया होगा … मई थोड़ा उपर नीचे करके निकाल दो …
जून जुलाई अगस्त … पसीना ही इतना आता है कि बंदा वैसे ही नहाया रहता है … सितम्बर मौसम बदलता है डाक्टर भी बोलते हैं नहाना मत …
बचा एक अक्तुबर तो यार एक महिना अपने दम से निकालो … यां सब मैं ही सिखाऊं …
नब्बे दिन छुटके बस्स्स् नब्बे दिन ….
आग्गै मरजी है तेरी आखिर गात है तेरा …
कुत्ते को मार पीट के शराबी मालिक ने ठंडी अंधियारी आधी रात को घर से निकाल दिया …
ठिठुरता हांफता जा रहा था , देखा एक लावारिस कुतिया कूड़े के ढेर के पास बैठी काँप रही थी … कुत्ते ने उसे एक करुणामई दृष्टी से देखा … लंगड़ाता हुआ उसके पास गया और बोला …
भौं भौं भौं …
और के बोलै था , या फेसबुकिए हर बात पै सैंटी हो ज्यां हैं ..
ब्याह आले घर मैं घणखरे रिस्तेदार रात नै छत पै सोवैं थे … एक दारु पीया छौरा अपने दोस्त गैल्यां एक खाट पै सोवै था … उसके तलब उठ्ठी वा बीडी़ लेण निच्चै गया … पाच्छे तै उसका दोस्त उठया अर मूतन चल्या गया …।
इतनै छौरे की बुआ आई अर खाट खाली देख कै उसपै सौगी … छौरा मांग तांग कै बीड़ी पी कै आया अर अन्धेरे मैं दोस्त समझ कै उसपै जम्प मार दी … बुआ नै उठ कै छौरे का झलूस काढ दिआ …।।
अगली रात फेर वा छौरा न्यूए बीडी़ पी कै आया अर रुक्का दे कै बोल्या …. अपणी अपणी खाट पै हो ल्यो भई सारे … नातै फेर बूआ बरगा मूँ बणाओगे