काल मैं बस में सफर करु था..
मेरे साइड आली सीट प एक छोरा अर छोरी बैठे थे।
दोनों एक दूसरे ताइं अजनबी थे।
थोड़े टेम बाद वे आपस में बात करण लाग्गे।
बातचीत उस मुकाम तक पहुँचगी जीत मोबाइल नंबर का आदान प्रदान होया करे
छोरे का फोन बेरा ना क्यूं ऑफ था।
फेर छोरे ने अपनी जेब म त एक कागज लिकाड़ा, लेकिन लिखने के लिए उसपे पेन कोनी था।
अर मैं जब्बे समझ गया कि, उसने मोबाइल नंबर लिखण ताई पेन की जरूत स।
उसने बड़ी आशा से मेरी कहन देख्या।
मैंने अपनी शर्ट के ऊपरी जेब में टांग्या होड पेन लिकाडा
अर चालती बस त बाहर फेंक दिया।
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“…ना खाऊँगा, ना खाण दूँगा..।।”
पीता है यंहा आदमी ही आदमी का खून …
देखा ना गया मुझसे और मैं पीने लग गया ,
तुम जिंदगी गंवाते देख ऊंचे महलो को ,
मैने झौंपड़ी को देखा और जीने लग गया ,
अंदाज अपना अपना
दो आदमियों की बीवीयाँ मेले में खो गईं।
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जिसमे से एक हरियाणा से था, और एक दिल्ली से।
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अपनी – अपनी बीवी ढूंढते हुए वो आपस में मिले।
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हरियाणा वाले ने दिल्ली वाले से पूछा..? तुम्हारी बीवी की पहचान क्या है..?
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दिल्ली वाला बोला -> कद 5’7″, गोरी, भूरी आँखें और पतली है, स्लीवलेस पिंक टी-शर्ट और लाल मिनी स्कर्ट पहने है।
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तुम्हारी बीवी की क्या पहचान है..?
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हरियाणा वाला -> मेरे आली कै मार गोली, चाल तेरे वाली को ढूंढते है।
म्हारे गाम का सुक्की वेहला ब्याह खात्तर छोरी देखण मन्नै अपने गैल्यां ले ग्या …
छोरी के सारे घर के बैठे थे , छोरी चाय लेकै आई अर सामने बैठगी … सुक्की थोड़ी हाण छोरी कान्नी देखकै छोरी के बाब्बू तै बोल्या :- अंकल जी है तो या बी ठीक पर इस्तै बढ़िया कोई और हो तो वा बी दिखा द्यो ……..
या सुन्दे ई मैं तो औढ़े तै अंतरध्यान हो ग्या …
सुक्की गैल्यां के बणी पाच्छे तै या तो वो होस मैं आण के बाद बतावैगा … आई सी यू मैं बेहोस पड़या फिलहाल तो
आज फेर तेरी याद आरी , आज फेर ठेके पै जाउंगा ,
आज फेर नीदं मैं तेरा नाम ल्युंगा …
आज फेर लुगाई के मुक्के खाउंगा … 😢😢😭
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दारु की याद आरी गंदी सोच दारु की .
आज पत्नी गैल्यां झगड़ा चल रया था … आधे घन्टे बाद सारे घरआले कट्ठे होगे … फेर उसनै रोणा शुरू कर दिया …
अर डकवर्थ लुइस के नियम के हिसाब तै वा विजेता घोषित कर दी गई … 😬😬
छोरी की कौई गल्ती नाहै भाई , देखिए क्युकर रोण लागरी बचारी .
एक बहु गोबर गेरण जावे थी —
एक जणा गाल म्ह दारू पी रया था अर
बहु त बोल्या :- माणस सेटिंग कर ले न
,बहु नाट गी , अर जाके न घरां बता दी !
पंचायत होई —
गाम का चौकीदार उनके गया अर जाके बोल्या :-
चाल र तन्ने पंचायत म्ह बुलावें है —
तन्ने फलाणे की बहु छेड़ दी चाल फैसला होवेगा पंचायत म्ह !
न्यू बोल्या :- ना भाई साहब हो लिया था फैसला तो , वा तो उड़े ऐ नाटगी थी
बोली
कसम खा तेरे जीते जी कोई मेरी सौत ना होवैगी …
मखा
सुणले जो हमनै जुदा करै वा मेरी मौत ही होवैगी
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गले लाग कै रोण लाग्गी … रोड छाप शायरी मैं तो बड्डे बड्डे इम्प्रैस कर दिए , आई बड़ी शायर … 😎
( छोह मैं आवैगी तूं जाणूं हूं … पर मैं एक कॉमेडी पेज का ऐडमिन हूं या तूं बी जाणैं है , या लास्ट आली लाइन ना लिखदा तो झकौई मन्नैं ट्रोल करण लाग जांदे … 💏
कहानी घर घर की …
पत्नी :- एजी सुणे है सब्जी के बणांऊ रात खात्तर …
पति :- बणाले यार जो तेरा जी करै ,
… ना थम बताओ ,
… दाल बणाले ,
… दपैहरी बी तो दाल थी
… फेर आलू बैंगण बणाले ,
… बालक ना खाते खुश होकै ,
… राजमा …
… ईब भिगो ना राक्खे घणा टैम लाग जागा ,
… अंडे पड़े होंगे फ्रिज मैं ,
… राम राम वीरवार है आज ,
… होटल तै लिआऊं कुछ ,
… ऐं हैं गंदी संदी सब्जी रांद दें हैं होटल आले तो ,
… तो बणाले नै यार जो तेरा जी करै ,
… ना थम बताओ …