इसे कहते हैं अर्थ का अनर्थ होना ÷
सुबह नहा के छत पर कच्छा टांगने गया तो
पडोसन भी अपनी सलवार टांगते हुए बोली
बारिश आने वाली है जब अपना कच्छा उतारे तो मेरी
भी सलवार उतार देना।
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इसे कहते हैं अर्थ का अनर्थ होना ÷
सुबह नहा के छत पर कच्छा टांगने गया तो
पडोसन भी अपनी सलवार टांगते हुए बोली
बारिश आने वाली है जब अपना कच्छा उतारे तो मेरी
भी सलवार उतार देना।
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mana aap sabse ajij hai
dil k sabse karib hai
na
koi sms na koi call
kya aap
sudama se bhi garib hi
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Mere Dil, Jiger, Kidney, Liver ho tum
waqt-bewaqt aaye vo fever ho tum
Doob kar jisme marr jaoo vo River ho tum
Mere jeevan mein ab to forever ho tum…
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जनाजा भारी था उस गरीब का क्यूंकी,
वो अपने सारे अरमान साथ लिए जा रहा था
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समस्या – *”बेटा, मेरी बहुएं मेरा कहना नहीं सुनती। सलवार सूट और जीन्स पहन के घूमती हैं। सर पर पल्ला/चुनरी नहीं रखती और मार्किट चली जाती हैं। मार्गदर्शन करो कि कैसे इन्हें वश में करूँ…”*
*समाधान* – आंटी जी चरण स्पर्श, पहले एक कहानी सुनते हैं, फिर समस्या का समाधान सुनाते हैं।
“एक अंधे दम्पत्ति को बड़ी परेशानी होती, जब अंधी खाना बनाती तो कुत्ता आकर खा जाता। रोटियां कम पड़ जाती। तब अंधे को एक समझदार व्यक्ति ने आइडिया दिया कि तुम डंडा लेकर दरवाजे पर थोड़ी थोड़ी देर में फटकते रहना, जब तक अंधी रोटी बनाये। अब कुत्ता *तुम्हारे हाथ मे डंडा देखेगा और डंडे की खटखट सुनेगा तो स्वतः डर के भाग जाएगा रोटियां सुरक्षित रहेंगी*। युक्ति काम कर गयी, अंधे दम्पत्ति खुश हो गए।
कुछ वर्षों बाद दोनों के घर मे सुंदर पुत्र हुआ, जिसके आंखे थी और स्वस्थ था। उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा किया। उसकी शादी हुई और बहू आयी। बहु जैसे ही रोटियां बनाने लगी तो लड़के ने डंडा लेकर दरवाजे पर खटखट करने लगा। बहु ने पूँछा ये क्या कर रहे हो और क्यों? तो लड़के ने बताया ये हमारे घर की परम्परा है, मेरी माता जब भी रोटी बनाती तो पापा ऐसे ही करते थे। कुछ दिन बाद उनके घर मे एक गुणीजन आये, तो माज़रा देख समझ गए। बोले बेटा तुम्हारे माता-पिता अंधे थे, अक्षम थे तो उन्होंने ने डंडे की खटखट के सहारे रोटियां बचाई। लेकिन तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों की आंखे है, तुम्हे इस खटखट की जरूरत नहीं। *बेटे परम्पराओं के पालन में विवेक को महत्तव दो*।
आंटीजी, *इसी तरह हिंदू स्त्रियों में पर्दा प्रथा मुगल आततायियों के कारण आयी थी*, क्योंकि वो सुंदर स्त्रियों को उठा ले जाते थे। इसलिए स्त्रियों को मुंह ढककर रखने की आवश्यकता पड़ती थी। सर पर हमेशा पल्लू होता था यदि घोड़े के पदचाप की आवाज़ आये तो मुंह पर पल्ला तुरन्त खींच सकें।”
अब हम स्वतन्त्र देश के स्वतन्त्र नागरिक है, राजा का शासन और सामंतवाद खत्म हो गया है। अब स्त्रियों को सर पर अनावश्यक पल्ला और पर्दा प्रथा पालन की आवश्यकता नहीं है।
घर के बड़ो का सम्मान आंखों में होना चाहिए, बोलने में अदब होना चाहिए और व्यवहार में विनम्रता छोटो के अंदर होनी चाहिए।
सर पर पल्ला रखे और वृद्धावस्था में सास-ससुर को कष्ट दे तो क्या ऐसी बहु ठीक रहेगी?
आंटीजी पहले हम सब लकड़ियों से चूल्हे में खाना बनाते थे, लेकिन अब गैस में बनाते है। पहले बैलगाड़ी थी और अब लेटेस्ट डीज़ल/पेट्रोल गाड़िया है। टीवी/मोबाइल/लैपटॉप/AC इत्यादि नई टेक्नोलॉजी उपयोग जब बिना झिझक के कर रहे हैं, तो फिर बहुओं को पुराने जमाने के हिसाब से क्यों रखना चाहती है? नए परिधान यदि सभ्य है, सलवार कुर्ती, जीन्स कुर्ती तो उसमें किसी को समस्या नहीं होनी चाहिए। जब बेटियाँ उन्ही वस्त्रों में स्वीकार्य है तो फिर बहु के लिए समस्या क्यों?
आंटी जी, “परिवर्तन संसार का नियम है”। यदि आप अच्छे संस्कार घर में बनाये रखना चाहते हो तो उस सँस्कार के पीछे का लॉजिक प्यार से बहु- बेटी को समझाओ। उन्हें थोड़ी प्राइवेसी दो और खुले दिल से उनका पॉइंट ऑफ व्यू भी समझो।
बहु भी किसी की बेटी है, आपकी बेटी भी किसी की बहू है। अतः घर में सुख-शांति और आनन्दमय वातावरण के लिए *जिस तरह आपने मोबाइल जैसी टेक्नोलॉजी को स्वीकार किया है वैसे ही बहु के नए परिधान को स्वीकार लीजिये। बहु को एक मां की नज़र से बेटी रूप में देखिए, और उससे मित्रवत रहिये।*
*”सबसे बड़ा रोग- क्या कहेंगे लोग”*, इससे बचिए, क्योंकि जब आपको सेवा की जरूरत होगी तो लोग कभी उपलब्ध न होंगे। आपको *’बेटे-बहु’* ही चाहिए होंगे।
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*जैसे सुहागन महिला,, बिना सिंदूर के अधूरी होती है,*✋🏻😎
*ठीक वैसे ही भारत में रेलवे लाइन के पास की दीवारें “गुप्त रोग” के विज्ञापन के बगैर अधूरी होती हैं…!!*
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~अब भी रोज तुम्हारे स्टेट्स पर एक नजर मार लेता हूं,,
ये सोच कर शायद तुमने मेरे बारे में भी कुछ लिखा होगा…!!!
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Santa in KBC..
Qus: Videsh Jane Wali Pehli Bhartiya Mahila Kaun Thi…?
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Santa- Sita Ji..!
Ravan Ke Sath Sri Lanka..
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सोचता हूँ बेच डालूं ….
मेरे सब उसूल अब पुराने हो गए हैं !!
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एक दिन चिंटू अपने बेटे का बैग देख रहा था।
तभी उसे बैग में से एक कंडोम मिला।
चिंटू (गुस्से में अपने बेटे से) : नालायक, इस उम्र में बैग में कंडोम ले कर घूमता है।
बेटा : तो फिर आप ही बताइए कि मैं क्या करूँ, इस उम्र में बाप बन जाऊँ ?
आपसे तो वो भी बर्दाश्त नहीं होगा
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खुद के खोने का पता ही नहीं चला… ,
किसी को पाने की ‘इन्तहा’ कर दी मैंने….?
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एक बच्चा अपने पापा की शादी की CD
देख रहा टीवी पर…
बच्चा- हम भी अपनी शादी मे आइटम गर्ल
नचवायेगे ….!
पिता- हरामखोर… ये तेरी बुआ और
मौसी है।
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एक बार एक व्यक्ति मरकर नर्क में
पहुँचा, तो वहाँ उसने देखा कि प्रत्येक
व्यक्ति को किसी भी देश के नर्क में जाने
की छूट है । उसने सोचा,
चलो अमेरिका वासियों के नर्क में जाकर देखें,
जब वह वहाँ पहुँचा तो द्वार पर पहरेदार से
उसने पूछा – क्यों भाई अमेरिकी नर्क में
क्या-क्या होता है ? पहरेदार बोला – कुछ खास नहीं, सबसे पहले आपको एक इलेक्ट्रिक
चेयर पर एक घंटा बैठाकर करंट दिया जायेगा,
फ़िर एक कीलों के बिस्तर पर आपको एक घंटे
लिटाया जायेगा, उसके बाद एक दैत्य आकर
आपकी जख्मी पीठ पर पचास कोडे
बरसायेगा… ! यह सुनकरवह
व्यक्ति बहुत घबराया और उसने रूस के नर्क
की ओर रुख किया, और वहाँ के पहरेदार से
भी वही पूछा, रूस के पहरेदार ने भी लगभग
वही वाकया सुनाया जो वह अमेरिका के नर्क
में सुनकर आया था । फ़िर वह व्यक्ति एक-
एक करके सभी देशों के नर्कों के दरवाजे
जाकर आया, सभी जगह उसे भयानक किस्से सुनने को मिले । अन्त में
जब वह एक जगह पहुँचा,
देखा तो दरवाजे पर लिखा था “भारतीय नर्क” और उस दरवाजे के बाहर उस नर्क में
जाने के लिये लम्बी लाईन लगी थी, लोग भारतीय नर्क में जाने को उतावले हो रहे थे,
उसने सोचा कि जरूर यहाँ सजा कम मिलती होगी… तत्काल उसने पहरेदार से
पूछा कि सजा क्या
है ? पहरेदार ने
कहा – कुछ खास नहीं…सबसे पहले
आपको एक इलेक्ट्रिक चेयर पर एक
घंटा बैठाकर करंट दिया जायेगा, फ़िर एक
कीलों के बिस्तर पर आपको एक घंटे लिटाया जायेगा, उसके बाद एक दैत्य आकर
आपकी जख्मी पीठ पर पचास कोडे
बरसायेगा… ! चकराये हुए व्यक्ति ने
उससे पूछा – यही सब तो बाकी देशों के नर्क
में भी हो रहा है, फ़िर यहाँ इतनी भीड
क्यों है ? पहरेदार बोला – इलेक्ट्रिक चेयर
तो वही है, लेकिन बिजली नहीं है, कीलों वाले
बिस्तर में से कीलें कोई निकाल ले गया है,
और कोडे़ मारने वाला दैत्य
सरकारी कर्मचारी है, आता है, दस्तखत
करता है और चाय-नाश्ता करने
चला जाता है…और कभी गलती से
जल्दी वापस आ भी गया तो एक-दो कोडे़
मारता है और पचास लिख देता है…चलो आ
जाओ अन्दर !!!
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एक व्यक्ति घर में पुराने कागजात देख रहा था,
तभी उसके हाथ में धर्मपत्नि का ग्यारवी कक्षा का रिपोर्ट कार्ड आया।
नम्बरो के नीचे चरित्र प्रमाण पत्र पढ कर अभी तक बेहोश है….
लिखा था …
“मधुरभाषी एवं शांतिप्रिय छात्रा”😖😲😲😷😭😳😂
पति विद्यालय के प्रधानाचार्य पर केस करने की तैयारी में है
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मुद्दते हो गई चुप रहते..
कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते…!!!
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मेरी आँखों की औकात नही की किसी लड़की को घूर सके,
याद रहता है खुदा ने एक बहन भी मुझे दी है…
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