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मत पूछो कैसे गुजरता है हर पल तुम्हारे बिना,
कभी बात करने की हसरत कभी देखने की तमन्ना !!

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एक सेठ सेठानी में बहस हो गई कि उनके एक मात्र लड़के के लिये गाँव की बहू लाऐं या शहर की.

सेठानी कहती कि गाँव की लाऐंगे क्योंकि वह घर काम संभाल लेगी.

सेठजी कहते कि वे गँवार होती हैं.उन्हे शहर के तौर तरीके नही आते हैं.

आखिर सेठानी कि जिद पर एक गाँव पहुंचे. सेठजी ने कहा बेटी जरा चीकू शेक ले आओ.बेचारी लड़की को कुछ समझ नही आया.वह रसोईघर मे गई. चार चीकू लिये. तवे पर सेका.मसाला डाला और प्लेट मे चीकू सेक🥤 कर ले आई.

सेठ सेठानी इस चीकू शेक को देखते ही रह गए।

अब सेठजी के कहने पर शहर मे लड़की देखने गये.
सेठानी ने नई बहू की परीक्षा लेने के लिए बोला बेटी जरा पापड़ सेक लाओ l

लड़की किचन मे गई. चार पापड़ लिए.मिक्सर मे डाले.पानी मिलाया और गिलास मे भर🥛 कर ले आई और बोली

“लीजिये पापड़ शेक”

छोरा अभी भी कुंवारा ही है

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“जब होता है तुम्हारा दीदार,
दिल धड़कता है बार-बार;
आदत से मजबूर हो तुम,
ना जाने कब माँग लो उधार.”

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हाॅलीवुड वाले कितनी भी तरक्की
क्यो ना कर ले पर,
साइकिल के पीछे छिपकर गोलियों
से बचने की कला सिर्फ
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बाॅलीवुड के हीरो के ही आती हैं….
😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜

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Wahe Guru ji ka Khalsa waheguru guru ki fateh

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मास्टरजी: “दु:ख तो अपना साथी है, सुख तो आता जाता है…!”

अर्थ स्पष्ट करो…!

छात्र: ”बीवी हमेंशा घर में होती है, साली आती जाती है…!”

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Gham-e-Hayaat Pareshaan Na Kar Sakega Mujhe;
Ki Aa Geya Hai Hunar Mujh Ko Muskurane Ka!

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Alia bhatt और varun dhawan रास्ते पर जा रहे थे … उन्हें 1000 का नोट मिला……
Alia – अब हमें क्या करना चाहिए ?
Varun- हम 50:50 रख लेंगे
Alia- और बाकी के 900 का क्या ?

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मुरारी बापू का छत्तीसगढ़ में दोपहर में प्रवचन चल रहा था, बीच में एक अनाउंसमेंट हुआ कि “” बाबू लाल जहाँ भी हो अपने घर चले जाये । उनकी पत्नी , उनका इंतज़ार कर रही है”

बाबू लाल उठकर जाने लगा तभी कुछ दूर पर बैठी हुई उसकी पत्नी बोली :

“बैठ जा , बैठ जा …
मैं ये देख रही थी कि प्रवचन में ही आया है , दारू भट्टी में लाइन लगाने को तो नहीं चला गया !

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दीपावली पर एक छोटी सी अपील: कृपया पटाखे छोड़े क्यों की ये त्यौहार ही पटाखों का है
रही बात पर्यावरण की एक दीवाली की रात बारूद की महक से सारे मच्छरो और कई कीड़ों का सफाया हो जाता है
सालभर एयर कंडिशन्ड रूम में बैठकर ओजोन लेयर की ऐसी तैसी करने वाले कृपया दीपावली पर आतिशबाजी न करने की सलाह न दें….मिडिया और पर्यावरण के रखवालो को पर्यावरण बचाने की याद सभी हिन्दू त्यौहारो पर ही आती है।
जम के पटाखे छुड़ाइये, दिवाली है,
कोई ” नवाज़ शरीफ” का अंतिम संस्कार नही है जो मातम मनाएं, बाकि के 364 दिन है पर्यावरण के लिए…
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*सभी ज्ञानचंद रायचंद. खामोश रहे।🙄🙄🙄*
बम पटाखे का आनंद लीजिये। …..
इससे डेंगू
चिकनगुनिया के मच्छर मरेंगे यह स्वास्थ्य
वर्धक है …
जिसे प्रदुषण की बहुत
चिंता है …..
वो सबसे पहले अपनी गाडी बेचे और
साइकिल का इस्तेमाल करे !

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ना रईस हूँ ना अमीर हूँ,
ना मै बादशाह ना मै वजीर हूँ,
आप सभी का प्यार है मेरी सल्तनत,
उसी सल्तनत का मै फकीर हूँ . . .

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पति पत्नियों के लिए स्पेशल। उनको टैग जरूर करना।
🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣
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एक औरत को शादी के कई साल बाद ख्याल आया कि अगर वो अपने पति को छोड़ के चली जाए तो वो कैसा महसूस करेगा।

ये विचार आते ही उसने एक कागज लिया और उसपे लिखा ,” अब मै तुम्हारे साथ और नहीं रह सकती,मै उब गयी हु तुम्हारे साथ से,मै घर छोड़ के जा रही हु हमेशा के लिए।”

उस पत्र को उसने टेबल पे रखा और जब पति के आने का टाइम हुआ तो उसकी प्रतिकिरया देखने के लिए बेड के निचे छुप गयी।
पति आया और उसने टेबल पे रखा पत्र पढ़ा। कुछ देर की चुप्पी के बाद उसने पत्र के निचे कुछ लिखा।
फिर वो खुशी की सिटी बजाने लगा,गीत गाने लगा,डांस करने लगा और कपडे बदलने लगा,इसी दौरान उसने अपने फोन से किसी को फोन लगाया और कहा ” आज मै एकदम मुक्त हो गया,शायद मेरी मुर्ख पत्नी को समझ आ गया की वो मेरे लायक ही नहीं थी,आज वो घर से हमेशा के लिए चली गयी,अब मै आजाद हु तुमसे मिलने के लिए,मै आ रहा हु कपडे बदल कर तुम्हारे पास,तुम तैयार हो के मेरे घर के सामने वाले पार्क में आ जाओ अभी”
कपडे बदल कर पति बाहर निकल गया, आंसू भरी आँखों से पत्नी बेड के निचे से निकली और कांपते हाथो से पत्र के निचे लिखी लाइन पढ़ी जिसमे लिखा था….

बेड के नीचे से पैर दिख रहे है बावली

पार्क के पास वाली दुकान से सिगरेट ले के आ रहा हु तब तक चाय बना ले।

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Woh bachpan ke din gye,
Jab subah chahye(tea) ke saath
Chehre par smile hoti thi ,, 🙁

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नफरतें जला रही लोगों को बुरी तरह …..
आग को तो यूँ ही बदनाम कर रहे हैं हम …!

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Itna “ZALIM” na bano kuCh to “MURAWAT” seekho.
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Tum pay mrtay hain toh kya “MAAR” hi dalo gay!!

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