तुम तो मुझे रुलाकर दूर चले गये.. मै किससे पूछूँ मेरी खता क्या है..
Kisi insan k sath aisa salok na karo jaisa tum apny sath nahi chahty
अब तो इतवार में भी कुछ यूँ हो गयी है मिलावट छुट्टी तो दिखती है पर सुकून नजर नहीं आता
तमननाओ की महफिल तो हर कोई सजाता है पर . पुरी उसी की होती जो तकदीर लेकर आता है
पूरी दुनिया से जुदा सी है वो, हम जिसे चाहते है खुदा सी है वो !!
जुबां कह न पाई मगर,आँखे बोलती ही रही, कि मुझे सांसो से पहले तेरी जरूरत है.
सारी उम्र बस एक ही सबक* याद रखना, दोस्ती और “दुवा”* में बस नियत साफ़ रखना.
Ye Bary Dukh Ki Bat Hai K Ab Hamara Aik Dusray K Dukh Se Koi Wasta Nahi Raha Hai…
तोड़ दिये मैंने घर के सारे ही आईने, क्यूंकि इश्क में हारे हुए लोग मुझे बिल्कुल पसंद नहीं ।।
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