तुम तो मुझे रुलाकर दूर चले गये.. मै किससे पूछूँ मेरी खता क्या है..
Taqlik Kaniat Ki Yeh Reet Bari Nirali Hai.. Jo Ho Na Sake Apna Acha Bhi Wohi Lagta Hai..?
एहसान किसी का वो रखते नही मेरा भी लोटा दिया . जितना खाया था नमक मेरे जख्मोँ पर लगा दिया
हवस का आलम तो देखिये हुजूर… संतरे भी दबा दबाकर खरीदते हैं
मुस्कुरा के देखो तो सारा जहाँ रंगीन है। वर्ना भीगी पलकों से तो आईना भी धुंधला दिखता है।।
पता नहीं कैसे उसने मुझे छोड़ दिया, वो तो कमीनी…किसी के 5 रू. भी नहीं छोड़ती थी.
कमाल का जिगर रखते है कुछ लोग, दर्द पढ़ते है और आह तक नहीं करते।
एक कोशिश है कि कोई दिल के ज़ख्म ना देख ले , एक ख्वाइश है कि काश ! कोई देखने Continue Reading..
मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख, मुझसे भी बुरे है लोग तू घर से निकलकर तो देख
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