मुद्दते हो गई चुप रहते.. कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते…!!!
-Ek Muddat Se Waqt Khamosh Tha Aaj, Lamhe Fir Yoon Hi Kuch Kehne Lage .. ‘
तुझको देखा तो फिर उसको ना देखा ग़ालिब.. चाँद कहता रह गया, मैं चाँद हूँ मैं चाँद हूँ
यूँ तो कटे, हुए उस पेड़ को एक ज़माना हो गया… . मगर ढूँढने अपना ठिकाना परिंदा रोज आता है.|
मेरा दिल मुझसे कहता है,,, वो वापस आएगी,,, मैं दिल से कहता हूँ,, उसने तुझे भी झूठ बोलना सिखा दिया
~Tujhe Khabar Hai Tujhey Sochney Ki Khatir, Bohat Se Kaam Meiin Kal Par Chorr Detii Hoon .. ‘
कितनी बुरी आदत है ना मेरी….* *बहुत जल्दी भरोसा कर लेता हूं लोगो पर
ऐ-दिल ज़रा मालूम तो कर,कहीं वो तो नहीं आ रहें . महफिल में उठा हैं शोर माशाअल्लाह-माशाअल्लाह
दोपहर तक बिक गया बाजार का हर एक झूठ , और मैं एक सच लेकर शाम तक बैठा
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