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संता-आपकी पत्‍‌नी क्यों भाग गई? बंता-पता नहीं!
मैं बाथरूम में गया और वो भाग गई.

संता- लगता है ऐसे मौके के लिए बेचारी
सालों से इंतजार कर रही थी।

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“मिट्टी का मटका और परिवार की कीमत
सिर्फ बनाने वाले को पता होती है ,
तोड़ने वाले को नहीं।”

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ये अच्छा है कि अच्छा नहीं हूँ मैं…!!!
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चलो कोई दुखी तो नहीं होगा मेरे मरने पे…!!!

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मत देख ऐ हँसीना मुझे तू यूँ “हँसते हँसते”
मेरे कमीने दोस्तों ने देख लिया तो कहेंगें
“भाभी नमस्ते-नमस्ते

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समस्या – *”बेटा, मेरी बहुएं मेरा कहना नहीं सुनती। सलवार सूट और जीन्स पहन के घूमती हैं। सर पर पल्ला/चुनरी नहीं रखती और मार्किट चली जाती हैं। मार्गदर्शन करो कि कैसे इन्हें वश में करूँ…”*

*समाधान* – आंटी जी चरण स्पर्श, पहले एक कहानी सुनते हैं, फिर समस्या का समाधान सुनाते हैं।

“एक अंधे दम्पत्ति को बड़ी परेशानी होती, जब अंधी खाना बनाती तो कुत्ता आकर खा जाता। रोटियां कम पड़ जाती। तब अंधे को एक समझदार व्यक्ति ने आइडिया दिया कि तुम डंडा लेकर दरवाजे पर थोड़ी थोड़ी देर में फटकते रहना, जब तक अंधी रोटी बनाये। अब कुत्ता *तुम्हारे हाथ मे डंडा देखेगा और डंडे की खटखट सुनेगा तो स्वतः डर के भाग जाएगा रोटियां सुरक्षित रहेंगी*। युक्ति काम कर गयी, अंधे दम्पत्ति खुश हो गए।

कुछ वर्षों बाद दोनों के घर मे सुंदर पुत्र हुआ, जिसके आंखे थी और स्वस्थ था। उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा किया। उसकी शादी हुई और बहू आयी। बहु जैसे ही रोटियां बनाने लगी तो लड़के ने डंडा लेकर दरवाजे पर खटखट करने लगा। बहु ने पूँछा ये क्या कर रहे हो और क्यों? तो लड़के ने बताया ये हमारे घर की परम्परा है, मेरी माता जब भी रोटी बनाती तो पापा ऐसे ही करते थे। कुछ दिन बाद उनके घर मे एक गुणीजन आये, तो माज़रा देख समझ गए। बोले बेटा तुम्हारे माता-पिता अंधे थे, अक्षम थे तो उन्होंने ने डंडे की खटखट के सहारे रोटियां बचाई। लेकिन तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों की आंखे है, तुम्हे इस खटखट की जरूरत नहीं। *बेटे परम्पराओं के पालन में विवेक को महत्तव दो*।

आंटीजी, *इसी तरह हिंदू स्त्रियों में पर्दा प्रथा मुगल आततायियों के कारण आयी थी*, क्योंकि वो सुंदर स्त्रियों को उठा ले जाते थे। इसलिए स्त्रियों को मुंह ढककर रखने की आवश्यकता पड़ती थी। सर पर हमेशा पल्लू होता था यदि घोड़े के पदचाप की आवाज़ आये तो मुंह पर पल्ला तुरन्त खींच सकें।”

अब हम स्वतन्त्र देश के स्वतन्त्र नागरिक है, राजा का शासन और सामंतवाद खत्म हो गया है। अब स्त्रियों को सर पर अनावश्यक पल्ला और पर्दा प्रथा पालन की आवश्यकता नहीं है।

घर के बड़ो का सम्मान आंखों में होना चाहिए, बोलने में अदब होना चाहिए और व्यवहार में विनम्रता छोटो के अंदर होनी चाहिए।

सर पर पल्ला रखे और वृद्धावस्था में सास-ससुर को कष्ट दे तो क्या ऐसी बहु ठीक रहेगी?

आंटीजी पहले हम सब लकड़ियों से चूल्हे में खाना बनाते थे, लेकिन अब गैस में बनाते है। पहले बैलगाड़ी थी और अब लेटेस्ट डीज़ल/पेट्रोल गाड़िया है। टीवी/मोबाइल/लैपटॉप/AC इत्यादि नई टेक्नोलॉजी उपयोग जब बिना झिझक के कर रहे हैं, तो फिर बहुओं को पुराने जमाने के हिसाब से क्यों रखना चाहती है? नए परिधान यदि सभ्य है, सलवार कुर्ती, जीन्स कुर्ती तो उसमें किसी को समस्या नहीं होनी चाहिए। जब बेटियाँ उन्ही वस्त्रों में स्वीकार्य है तो फिर बहु के लिए समस्या क्यों?

आंटी जी, “परिवर्तन संसार का नियम है”। यदि आप अच्छे संस्कार घर में बनाये रखना चाहते हो तो उस सँस्कार के पीछे का लॉजिक प्यार से बहु- बेटी को समझाओ। उन्हें थोड़ी प्राइवेसी दो और खुले दिल से उनका पॉइंट ऑफ व्यू भी समझो।

बहु भी किसी की बेटी है, आपकी बेटी भी किसी की बहू है। अतः घर में सुख-शांति और आनन्दमय वातावरण के लिए *जिस तरह आपने मोबाइल जैसी टेक्नोलॉजी को स्वीकार किया है वैसे ही बहु के नए परिधान को स्वीकार लीजिये। बहु को एक मां की नज़र से बेटी रूप में देखिए, और उससे मित्रवत रहिये।*

*”सबसे बड़ा रोग- क्या कहेंगे लोग”*, इससे बचिए, क्योंकि जब आपको सेवा की जरूरत होगी तो लोग कभी उपलब्ध न होंगे। आपको *’बेटे-बहु’* ही चाहिए होंगे।

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Hote hain shayad sirf nafrat mein hi pakke rishte,
Warna ab to tan se libaas utarne ko mohhabat kehte h

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एक पति की कलम से👇👇😀😂😂

सुबह एक बोर्ड पढ़ा लिखा था पत्नी छोड़ो, झोला पकड़ो

मेरा तो सिर चकरा गया फिर दोबारा पढ़ा तो समझ आया लिखा था
“पन्नी छोड़ो झोला पकड़ो” 😂

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Santa to Banta :-
Agr tu bata de ki meri Tokri me kya h. toh
tokri k aadhe Ande tere..Aur ye bhi bata de ki
Ande Kitne h…
.
to 10 k 10 tere…. Aur
.
agar ye Bhi bata de ki Ande Kiske h…
.
to Murgi bhi teri….
.
Banta :- Abey koi HINT TO De

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आज का ज्ञान

अगर दो लोग लड़ रहे हों तो आपका फर्ज बनता है कि

नीचे बैठ जाओ

ताकि पीछे वालों को भी दिखे

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*डॉक्टर* : डिप्रेशन की पेशेंट से-
क्या तकलीफ़ है..?
*लेडी पेशेंट* : सर, दिमाग में बहुत उल्टे पुलटे विचार आते हैं, रुकते ही नहीं…
*डॉक्टर* : कैसे विचार आते हैं ..?
*लेडी पेशेंट* : जैसे अब मैं यहाँ आई हूँ तो आपके ओपीडी में एक भी पेशेंट नहीं था.. तो मैं सोचने लगी कि डॉक्टर साहब के पास कोई भी पेशेंट नहीं है, इनकी कमाई कैसे होगी, घर कैसे चलेगा, इतना पैसा डाला पढ़ाई में, अब क्या करेंगे.. हॉस्पिटल बनाने में भी बहुत पैसा लगाया होगा, अब लोन कैसे चुकाएंगे ? कहीं किसानों के माफ़िक लटक तो नहीं जाएंगे एक दिन…!! ऐसे कुछ भी विचार आते रहते हैं…
अब *डॉक्टर* डिप्रेशन मे है।

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जितनी भीड़ दिल्ली वालों की शादी
में होती है…
उससे ज़्यादा तो हमारे यहाँ मोहल्ले का
खराब transformer ठीक होता
देखने आ जाती है…

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जिन लडको को रात मे हिचकी लगे।
तो उन्हे समझ जाना चाहिए।.
.
.
.
.
कि उनके नाम की कही उंगलीया चल
रही है।

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उड़ा भी दो रंजिशें, इन हवाओं में यारो….
छोटी सी जिंदगी हे, नफ़रत कब तक करोगे !

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आज तो
गूगल ने भी धमकी दे
दी कि
.
.
.तुम्हारा अकाउंट
बंद कर देंगे..😳😳
.
.अगर फिर से
.
😭

“लड़की कैसे पटायें” के
बारे में पूछा तो..!

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शुरू हो गये आशिक़ों के नवरात्रे
कल देवी जी को फूल चढ़ाने का दिन था
आज विन्ती का दिनं है
Prpose Day

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मेरी दास्ताँ-ए-वफ़ा बस इतनी सी है,
उसकी खातिर उसी को छोड़ दिया…

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