मेरी दास्ताँ-ए-वफ़ा बस इतनी सी है, उसकी खातिर उसी को छोड़ दिया…
कितनी बुरी आदत है ना मेरी….* *बहुत जल्दी भरोसा कर लेता हूं लोगो पर
जिन्दगी का मजा लेना सीखो, वक्त तो तुम्हारे मजे लेता ही रहेगा !
Woh meri soch k parday mein chupa betha hai,,, main kisi aur ko sochon bhi to sochon kaise….?
में किसी ओर का नहीं हु फिलहाल .. कोई तो मेरी हो जाओ
Darta hoon kehne se ke mohabbat hai tumse, Meri zindagi badal de ga, tera iqrar bhi, inkaar bhi
हम नींद के शौक़ीन ज्यादा तो नहीं लेकिन, तेरे ख्वाब न देखूं तो गुज़ारा नहीं होता…
कुछ नहीं होगा तो आँचल में छुपा लेगी मुझे, माँ कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी !
हम तो फ़ना हो गए आपकी एक झलक देख कर।।। ना जाने रोज आईने पर किया गुजरती होगी।।।
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