पता_है_मैं_हमेसा खुश क्यों रहता हूँ ..?
क्योंकि,मैं अपने माॅ ओर बाप के सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं_रखता
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पता_है_मैं_हमेसा खुश क्यों रहता हूँ ..?
क्योंकि,मैं अपने माॅ ओर बाप के सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं_रखता
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भाग्यशाली वे नही होते…
जिन्हें सब कुछ अच्छा मिलता है
बल्कि वे होते हैं
जिन्हें जो मिलता है
वो उसे अच्छा बना लेते हैं |
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जिंदगी में हमेशा छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो,
क्योंकि इन्सान जिंदगी में पहाड़ो से नहीं,
अक्सर पत्थरों से ही ठोकर खाता है….!!
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आख़िर क्या कारण था कि मुंबई के ताज होटल पर हुए भीषण हमले में ताज होटल का कोई भी कर्मचारी अपनी ड्यूटी छोड़कर और होटल छोड़कर नहीं भागा ??
26/11 मुंबई अटैक. यानी 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकी हमला हुआ. तीन हथियारबंद आंतकियों ने मुंबई के ताज होटल समेत कई जगहों पर हमला किया. अब भी होटल ताज की वो दहशत में डूबी तस्वीरें ताजा हैं. मगर 26/11 के दौरान होटल ताज में जो लोग फंसे रहे, वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक विषय बन गए. इस स्टडी में कई चौंकाने वाले फैक्ट्स सामने आए हैं.
बुधवार का दिन था. 500 के करीब गेस्ट रुके हुए थे और करीब इतने ही बैंक्वेट हॉल्स में अलग-अलग फक्शन अटैंड कर रहे थे. रात को 9 से 9.30 बजे के बीच अचानक गोलीबारी की आवाज़ें आईं. किसी को पता नहीं चल रहा था कि आखिर ये कैसी आवाज़ है. करीब 600 कर्मचारी भी थे उस वक्त होटल ताज में.
24 साल की बैंक्वेट मैनेजर मल्लिका जगद उस समय गेस्ट को संभाल रहीं थीं.
रिसर्च में सामने आया कि कर्मचारियों में ज्यादातर 25 से 30 साल के थे. उनको पता था कि कौन सा दरवाज़ा कहां है और कहां से खुलता और बंद होता है. साथ ही कैसे बाहर निकला जा सकता है. इंसानी फितरत होती है कि मुश्किल के समय अपनी जान बचाकर भागा जाए. वो कहते भी तो हैं -जान बची तो लाखों पाए. मगर हैरानी की बात ये है कि उस हमले के दौरान होटल ताज का एक भी कर्मचारी भागा नहीं. अंदर फंसे होटल स्टाफ ने मेहमानों को अपनी जान पर खेलते हुए बचाया.
इनमें टेलीफोन ऑपरेटर्स भी शामिल थीं. ये फीमेल स्टाफ ही था जो पहले बाहर निकला और फिर इमरजेंसी की सिचुएशन में वापस अपने वर्क स्टेशन पर आ गया. उन्होंने होटल के हर कमरे में गेस्ट को फोन किया और बताया कि वो अपने-अपने रूम की लाइट बंद कैसे करें. ऑपरेटर्स पूरी रात अंदर ही रहे और लगातार गेस्ट की सेफ्टी के लिए उन्हें जानकारियां देते रहे.
होटल के छठे माले पर शेफ ने गेस्ट को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक दूसरे के हाथ से हाथ जोड़कर एक ह्यूमन चेन बना ली. गेस्ट को बीच में रखकर सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की. इतने में दो आतंकवादी सामने आ गए और कई शेफ को मौके पर ही गोली मार दी.
इस पर रिसर्च करते हुए मनोवैज्ञानिक ने तीन नतीजे निकाले-
#1 ताज ग्रुप ने अपने होटल में बड़े शहरों से नहीं बल्कि छोटे कस्बों से लोगों को नौकरी पर रखा था. ये सामने आया कि आज भी छोटी जगहों से आए लोग एक-दूसरे से जुड़ाव महसूस करते हैं.
#2 दूसरा निष्कर्ष ये निकला कि ताज ने किसी भी टॉपर यानी क्लास में सबसे ज्यादा मार्क्स लेने वाले को नौकरी पर नहीं रखा था. एचआर टीम यानी ह्यूमन रिसोर्स ने नौकरी के लिए छांटे गए लोगों के स्कूल टीचर्स से बात की थी और जाना था कि आवेदक अपने पैरेंट्स, टीचर्स और आसपास के लोगों के साथ किस तरह का बर्ताव करता था. यानी एटीट्यूड चेक किया न कि मार्क्स.
#3 तीसरी और आखिरी बात ये निकलकर आई कि ताज ने अपने कर्मचारियों को सिखाया था कि वो ताज ग्रुप के लिए उनके मेहमानों के प्रतिनिधि होंगे, न कि मेहमानों के लिए ताज के प्रतिनिधि. सभी फ्रंट डेस्क कर्मचारियों को गेस्ट की आवाज बनने की ट्रेनिंग दी गई. एक और बात जो इसी से जुड़ी है. ताज में ये कल्चर है कि कोई भी गेस्ट जब किसी कर्मचारी के लिए अच्छा रिमार्क लिखकर जाता है तो मैनेजमेंट उस कर्मचारी को 24 घंटों के भीतर इनाम देता है.
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अपनी Profile Pic तिरंगा लगाओ या ना लगाओ यह जरुरी नही है,
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लेकिन 16 अगस्त को रास्ते पर तिरंगा पड़ा दिखे तो जरुर उठा लेना !!
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अपनी गुप्त बाते किसी के साथ मत बाटिए
क्योकि अगर आप इन्हे खूद अपने पास नही रख सकते
तो भला किसी दुसरे से कैसे आशा कर सकते है
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Zindagi meih do chize Kabhi mat krna….
1) Jhute insaan se pyar ,.
2) Aur sache insaan ke saath time pass.. !!
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दम है तो “`3 सवाल के जवाब बताओ…….
और अगर इन सवालो के जवाब दे दिये तो हम आपको Whatsapp और फेसबूक के राजा कहेंगे..
सवाल 1- बाप ने बेटी को 1 गिफ्ट दिया और कहा भूख लगे तो खा लेना, प्यास लगे तो पी लेना और ठंड लगे तो जला लेना, ये गिफ्ट क्या है।
सवाल 2 – एक चीज ऐसी है जो सुखी हो तो 2 किलो , गीली हो तो 1 किलो और जल जाए तो 3 किलो
सवाल 3 – वो क्या चीज़ है जो साल में 1 बार,
महीने में 2 बार,
हफ्ते में 4 बार,
और दिन में 6 बार आती है…?
उत्तर दो इन सभी सवाल का..
आप के पास एक दिन का समय है देखते हैं कौन सबसे ज्यादा जीनीयस है
Reply Must
””””””””””””
जिसको भी फारवर्ड कर सकते है, करीए और जबाब तलाश कीजिए ।
आपको चैलेंज है 24 घंटे के भीतर आप अपने दोस्तों को भेजे।
आपका समय अब शुरु “`
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जिंदगी की राहों में मुस्कराते रहो हमेशा,
क्योंकि
उदास दिलों को हमदर्द तो मिलते हैं, हमसफ़र नहीं.
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jo lagaye the maine phool,
kuch murjha gye, kuch khil gye,
jo dost kabhi mere saath the,
kuch kho gye kuch mil gye
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जिंदगी में हर गम को छोड़ देना, ख़ुशी को नहीं,
हर मुश्किल को खो देना, कामयाबी को नहीं,
अगर ज़िन्दगी में कुछ खोना पड़े तो हमें खो देना,
पर अपनी हसी को नहीं
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-Lehron Se Khelna To Sagar Ka Shoq Hai
Lagtii Haii Chot Kaiise Kiinarey Se Puchiiye .. ‘
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ना मस्जिद की बात हो, न शिवालों की बात हो,
प्रजा बेरोज़गार है, पहले निवालों की बात हो 👫
मेरी नींद को दिक्कत, ना भजन से.. ना अज़ान से है,
मेरी नींद को दिक्कत, मरते हुये जवान और खुदकुशी करते किसान से है 😢
किसी के बुझते चूल्हे में हवा लगाकर तो देखो,
किसी के पांव के छालों पर दवा लगाकर तो देखो ❤️
किसानों की मेहनत पर उंगलिया उठाने वालों,
समझ में आ जाएगा मूल्य भी फसलो का,
जरा कभी खेतो में भी CCTV कैमरे लगाकर तो देखो
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कभी कभी लगता है कहानियाँ अधूरी ही खूबसूरत होती हैं उनकी पूर्णता उनकी तरफ नीरसता ला देती है….
और फिर अधूरे को पूरा करने के लिए उस अधूरे को फिर जीना पड़ता है ये लय टूट जाये तो फिर सुर लगते नही जल्दी….
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नन्हीं नन्हीं बच्चियों को चार किताबें पढने दो साहब !
कोख से बच आई हैं, दहेज से भी बच जायेगी !!”👧
गंदी सोच और नियत जहन की ही होती है…
वरना अंगों की बनावट तो बहन की भी होती है!!
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Heart touching story <3
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एक सभ्रांत प्रतीत होने वाली अतीव सुन्दरी ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं । उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है जो जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई !
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उस 'सुंदर' महिला ने एयरहोस्टेस को कहा कि वह उसके लिए नियत सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पायेगी, क्योंकि साथ की सीट पर एक दोनों हाथ विहीन व्यक्ति बैठा हुआ है | उस सुन्दरी ने एयरहोस्टेस से सीट बदलने हेतु आग्रह किया |
असहज हुई एयरहोस्टेस ने पूछा, "मैम क्या मुझे कारण बता सकती है"?
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'सुंदर' महिला ने जवाब दिया: "मैं ऐसे लोगों को पसंद नहीं करती। मैं ऐसे व्यक्ति के पास बैठकर यात्रा नहीं कर पाउंगी "।
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दिखने में सभ्रांत और विनम्र प्रतीत होने वाली महिला के यह उद्गार सुनकर एयर हॉस्टेज़ अचंभित हो गई । सुन्दरी ने एक बार फिर एयरहोस्टेस से जोर देकर कहा कि मैं उस सीट पर नहीं बैठ सकती और मुझे कोई दूसरी सीट दे दी जाए ।
एयरहोस्टेस ने खाली सीट की तलाश में चारों ओर नजर घुमाई, पर कोई भी सीट खाली नहीं दिखी ।
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एयरहोस्टेस ने महिला से कहा कि "मैडम इस इकोनोमी क्लास में कोई सीट रिक्त नहीं है, किन्तु यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखना हमारा दायित्व है, अतः मैं वायुयान के कप्तान से बात करती हूँ, कृपया तब तक थोडा धैर्य रखें "। ऐसा कहकर होस्टेस कप्तान से बात करने चली गई |
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कुछ समय बाद उसने लौट कर महिला को बताया, "महोदया! आपको जो असुविधा हुई, उसके लिए बहुत खेद है | इस पूरे विमान में, केवल एक सीट खाली है और वह प्रथम श्रेणी में है।
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मैंने हमारी टीम से बात की और हमने एक असाधारण निर्णय लिया। एक यात्री को इकोनॉमी क्लास से प्रथम श्रेणी में भेजने का कार्य हमारी कंपनी के इतिहास में पहली बार हो रहा है … "।
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'सुंदर' महिला अत्यंत प्रसन्न हो गई, किन्तु इसके पहले कि वह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती और एक शब्द भी बोल पाती …
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एयरहोस्टेस उस अपाहिज और दोनों हाथ विहीन व्यक्ति की ओर बढ़ गई और विनम्रता पूर्वक उनसे पूछा "सर, क्या आप प्रथम श्रेणी में जा सकेंगे ?
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क्योंकि हम नहीं चाहते कि आप एक अशिष्ट यात्री के साथ यात्रा करने की त्रासदी भुगतें । "
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यह सुनकर प्रत्येक यात्री ने ताली बजाकर इस निर्णय का स्वागत किया। वह अतीव सुन्दरी महिला तो अब शर्म से नजरें ही नहीं उठा पा रही थी।
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तब उस अपाहिज व्यक्ति ने खड़े होकर कहा, "मैं एक भूतपूर्व सैनिक हूँ और मैंने एक ऑपरेशन के दौरान कश्मीर सीमा पर हुए बम विस्फोट में अपने दोनों हाथ खोये थे ।
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सबसे पहले, जब मैंने इन देवी जी की चर्चा सुनी,
तब मैं सोच रहा था: मैंने भी किन लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली और अपने हाथ खोये ?
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लेकिन जब आप सभी की प्रतिक्रिया देखी तो अब अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा है कि मैंने अपने देश और देशवासियों की खातिर अपने दोनों हाथ खोये ।
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और इतना कह कर, वह प्रथम श्रेणी में चले गए।
'सुंदर' महिला पूरी तरह से शर्मिंदा होकर सर झुकाए सीट में गढ़ गई।
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उस अतीव सौंदर्य का भी कोई मूल्य नहीं अगर विचारों में उदारता न हो .
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