करनी सेना कवै … जे कोए म्हारी लड़की कान्नी लखा ग्या तो खड़या लट्ठ बाजैगा …

सुप्रीम कोर्ट :- देखिए अब मूवी का नाम लड़के वाला रख दिया है … अब देख सकते हैं …

सूप्रीम कोरट साब आपनै तो बोल दिया देख सकते हैं वा जो हात्थां मैं लट्ठ ठाए घूमरे उनके मुंह तै कवाओ जी … क्यों जन्ता की चुतड़ी तुड़वाण आले काम कर रे हो

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नब्बे दिन छुटके नब्बे दिन नवम्बर दिसम्बर जनवरी … नहाना मतलब मौत को दावत देना …
फरवरी … एक महीना ऐसे ही इंतजार करो क्योंकि अचानक पानी उपर डालोगे तो गरम सरद हो सकता है ….

सिर्फ होली से बचो तो मार्च भी निकल जाएगा … सुसरे गीले पानी से बच के …
अप्रेल में थोड़ा सैंट छिड़क लो … लोगों का ऐसे ही ऐप्रेल फूल बना रहेगा … बइ बंदा खुश्बुएं फेंक रहा तो नहाया होगा … मई थोड़ा उपर नीचे करके निकाल दो …
जून जुलाई अगस्त … पसीना ही इतना आता है कि बंदा वैसे ही नहाया रहता है … सितम्बर मौसम बदलता है डाक्टर भी बोलते हैं नहाना मत …
बचा एक अक्तुबर तो यार एक महिना अपने दम से निकालो … यां सब मैं ही सिखाऊं …
नब्बे दिन छुटके बस्स्स् नब्बे दिन ….
आग्गै मरजी है तेरी आखिर गात है तेरा …

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पत्नियों के बल्ड परैशर का सर्तिया इलाज …

हाई हो रया तो फोन लगा कै उसकी माँ तै बात करा द्यो ,

लो हो रया हो तो अपणी माँ तै … 😎

आजमा कै देखो , थै़क्यू बोलोगे …

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मैडम_तू_धोखा_इसा_देगी

कई_बार_तो_अपणे_आप_पै_भी

शक_होजे_है

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पत्थर उठा के मारते हैं मेरे ही मुझको …

दीवाना हो गया हूं मैं … देख के तुझको ,

तूं खुद भी खुद के जलवे से अंजान है शायद …

तिरछी नजर से आइने में देख तो खुद को

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या चुटकला तो ना है सच्ची घटना है मेरे साथ घटी थी …
एअरइंडिया मैं युनियन बाजी के चलदे एअर होस्टैस बी पचपन छप्पन की हो कै रिटायर होवैं सैं समझै वे खुद नै सोलां साल की सैं … अर इकोनमी क्लास आले कस्टमर गैल्यां बिहेव न्यू करैं जणूं वा उनकी छात्ती पै बैठ कै जा रया हो … ढाई घंटे की फ्लाइट थी दिल्ली तै आबूधाबी की मेरी एकबै … वा नास्ता ब्रेड बटर , चटनी बर्गर सा दे कै गई …
अर पैग तो दो प्हल्यां ए ला लिए थे …
तीस लागगी … धौरै तै जावै थी मखा मैडम थोड़ा पानी ला दिजीए प्लीज …
ना सुणी …
अगली बार नजदीक तै लिक्ड़न लाग्गी मखा मैडम पानी ला दो …
ना जी …
तीसरी बार बी कोए असर ना …
फेर तो मेरे अंदर का हरयाणवी जाग ग्या घणी दूर थी मैं रुक्का दे कै बोल्या … ओ आंटी जी पाणी प्यादे गला सूख रया है …
दस सैकेंड मैं ले कै आई आंख्यां तै अंगारे बरस रे थे अर बोतल मेरे स्यामी एडजस्टेबल टेबल पै पटक कै गई … ड्युटी थी ना तो मेरे सिर पै मारती ..

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मणिशंकर अय्यर बोल्या … मोदी जी की राजनीती नीचता आली है …
मोदी जी नै स्टेज पै रुक्का तार दिया … कांग्रेस आले मन्नै नीच कवैं हैं …
कांग्रेस नै मणिशंकर अय्यर सस्पैंड कर दिया …
ये क्या हो रहा है भाई ये क्या हो रहा है …
सब जनता तै सुतिया बणारे हैं वोट खात्तर …
अर हम इनके खिलाफ कुछ लिख दयां तो थमनै लाग्गै बेरा ना के जुल्म हो गया …

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न्यू सोचूं था अक आज एक महान रचना लिखूंगा पेज के दोस्तां तंई …

की बोर्ड पै बैठ्या ए था , माँ की अवाज आई … रै जाइए मड़ा दानें पिसवा ल्या …

एरी माँ तेरे मड़े दानेयां के चक्कर मैं आज फेर दुनिया एक महान रचना पढ़ण तै चूकगी … 😏😏😏

हर महान रचनाकार की राह में रोड़े उसके परिवार वाले ही बिछाते हैं … सइ बात है … हुंह … एकबै फेर हुंह …

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एक बणिये का आखरी बखत आ-ग्या ।
उसनै आवाज लगाई – बेटी लक्ष्मी !
वा बोल्ली – “हां बाबू !”
फिर उसनै आपणे छोरे को आवाज लगाई – बेटा कुबेर!
छोरा बोल्या – “हां बाबू!”
बणिया ने फिर आपणी घर-आळी खातिर रूका मारा- भागवान !
उसकी घर-आळी बोल्ली -“हां जी !”
बणियां बोल्या – अड़ मखा लुटवाओगे – तुम सारे हाड़ै बैठे सो,

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जज: तू तीसरी बार अदालत आया है, तने शर्म कोनी आती?
आदमी: तू तो रोज़ आवे है, तने तो डूब के मर जाना चाहिए ।

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मेरी फेसबुक आली फोटू पै आज एक छोरी का कमैंट आया …

Nice pic , looking sooo handsome 😘

मैं भाज कै गया अर सिस्से मैं अपणा मुंह देख्या …

फेर मुंह धो कै मुंह देख्या …

फेर साबण गैल्यां मुंह धो कै मुंह देख्या …

फेर सिस्सा धो कै मुंह देख्या …

फेर जाकै जकीन आया अक या कमैंट आला यां तो पापा की परी है यां फेक आई डी आला कोए कंजर दोस्त …

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दिल्ली में प्रदूषण का कारण हरियाणा के जाट सं
जो हुक्के का धुमा दिल्ली कण मुंह करके छोड़े सं

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शादी के पहले दिन छोरा confuse हो रहा था कि
पत्नी से कैसे बात शुरू की जाये।
.
कमरे में पहुंचा, तो 5 मिनट के लिए तो दुल्हन के पास चुपचाप
बैठा रहा, उसके बाद धीरे से बोला:
.
..
.
“के नाम है तेरा ?” 😎😎
.
दुल्हन शरमाते हुए बोली:😅
.
“क्यों, कार्ड मे थारी बुआ का नाम लिखवाया था के ?

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जोणसी न्यू कहया करती :-
“तू नी मिल्या जे मर जाऊगी”
उसे कै आज दूसरा छोरा होया है!!

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छोरी :- या लिपस्टिक कितने की है …?
दुकानदार :- सतरां रुपए की ,
छोरी :- ओ माई गॉड सैवन्टी … फिफ्टी रुपए लेदां हो तो बोल …?
दुकानदार :- सैवन्टी नि मैडम सैवनटीन सतरां रुपए ,
छोरी :- ओह सैवनटीन …. बारां रुपए लेले

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पूनम : कोई आवाज दे है बाहर गेट पै , देखियो ।
अनिल : कौण है ?
पूनम : मैं ना पिछाणती
अनिल : अच्छा , रुकण की कह , मैं आऊं हुँ बाहर नै ।
एक तै इस घर मैं कुछ मिलता नी बख्त पै , मेरी घड़ी कित गई इब ?
किसे काम की नहीं या लुगाई , कोय चीज ठिकाणे पै नी पाती , बेरा ना के करती रह है सारे दिन बैठ्ठी बैठ्ठी ।
किस्मत फूट गी मेरी जो या पल्लै पड़ी ।
पूनम : तू पहल्या कोस ले अपणी किस्मत नै जी भर कै, तन्नै तो ज्युकर जीवन सफल कर दिया मेरा , तन्नै पा कै तो सारी इच्छा पूरी होगी मेरी ।
मौका मिलते ए जहर काढण लाग ज्या अपणा , कदे मिठास भी आया है इस जबान पै मेरे नाम का ??
इतणे मैं दुबारा किवाड़ खुड़कै है …..
अनिल : आऊं हूँ , आऊं हूँ , शांति राख ।
“नारंगी पीला सूट पहरे एक सुथरा सा चेहरा, जमीन मैं नजर ग़ाड्डे खड़ा था ।
ज्युकर कुछ छिन ग्या हो उसका”
अनिल : जी बोलो ,
पिछाणे नी आप !!
“उसकी आंख ईब भी जमीन पै थी, ज्युकर कुछ
उकेरणा चाहती हो, उस संगमरमर के धोले फर्श पै ।”
ब्होत हिम्मत जुटा कै वा उप्पर लखाई ।
अनिल : सुमन तू !!
“इस बोल के पाछै जो सन्नाटा ब्यखरा , उसकी चीख मैं , वे सारे ‘घा’ जो भर कै , नई खाल मैं ढल गे थे, एक बार फेर हरे हो गे ।”
” वो घर का गेट एक सीमा रेखा मैं बदलग्या ।”
“एक पासै रिवाजां की रस्सी तै गांठ मार कै गला घोंटी होई गृहस्थी थी और दूसरे पासै बख्त अर झूठे अहंकार की मार खाया होया प्यार।”
“बसी होई गृहस्थी मैं अलगाव का विलाप था अर उजड़े होए , दीमक के खाए होए प्यार मैं सुकून।”
“करुणा तै एक जीसी थी दोनूं पासै , बस बख्त सही ना था।”
“दिल के स्वार्थ नै गृहस्थी के किवाड़ लात मार कै बंद कर दिए थे ।”
अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल का यो शेर ब्होत सही लागै है आडै :
” रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ …
तू फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ “

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