मृत्यु क्या है … ???
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जब चार आदमी कुछ और माणसां गैल्या़ रल कै कंध्यां पै ठा कै राम नाम सत्य है बोल्दे होए लकड़ियां गेर कै एक आदमी नैं फूंक दें …
उसे कहते हैं मृत्यू … आई समझ
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मृत्यु क्या है … ???
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जब चार आदमी कुछ और माणसां गैल्या़ रल कै कंध्यां पै ठा कै राम नाम सत्य है बोल्दे होए लकड़ियां गेर कै एक आदमी नैं फूंक दें …
उसे कहते हैं मृत्यू … आई समझ
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पत्नी :- मैं तो मेरे भाई के बहरे पण नैं डोब दी ना तूं मेरे पल्ले ना पड़दा … 😗
पति ( मजे लेंदा होया ) :- उसी मेरे साले नैं तो म्हारा रिस्ता कराया था … अर तूं तो कह्या करै अक वा तन्नैं घणा प्यार करै था तेरी सारी फरमैश पूरी करया करदा … 😎
पत्नी :- हां ठीक कहूं थी … पर एकबै मैं गाणा गांऊ थी …
भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना
अर उस बहरे नैं सुण लिआ …
भइया मेरे राखी पे बंदर को ले आणा …
फेर वा तन्नैं पसंद कर ल्याया मेरी खात्तर ..
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दिमाग का किम्मे नहीं बेरा
काल सारा दिन इस बात प छोह उठ्या रहया
अक अंग्रेज़ इतणे साल आपणे देश प राज कर क्यूकर गए
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एक बुढे कै चार-पाँच छोरे,
बुढा मरणासन हो रया, आर वे पाँचु मेरे बटे
सकिम भिडाण लाग रे,
एक बोल्या ‘ रै बाबु मरेगा’
दुसरा बोल्या ‘हाँ भाई मरणन तै होए
रहया स’
तीसरा बोल्या ‘भाई गाँम कि च्याणी त
दुर पडेँगी इतणी दुर नही चालेगा, न्यु
कर ल्यागे ट्रेक्टर म ले चालागे।’
पहलडा बोल्या ‘आछ्या 100 रपये
लेगा ट्रेकटर आला’
दुसरा बोल्या ‘रे बुगी म ले चालागे’
एक बोल्या ‘तेरा झकोई 70
लेगा बुगी आला भी’
चौथा बोल्या ‘रे न्यु कर लियो साईकल क
गेल न सिढी बांध क उसप लुटा लियो’
इब बुढा खाट म पडया पडया सुणन
लाग रया था, उसन देख लिया तेरी खराब
माटी करैगे, कोए कोए साँस आवै था, उसने
जोड के साँस आर मार कै हँगा, होकै
बैठया बोल्या ‘रे मैरी जुती दे दयो, मैँ पैदल
ए डिगर ज्यांगा’
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एक नशेड़ी नशे मैं औल फौल बकै था … एक जैंटलमैन सा पैहलवान उसतै आकै बोल्या :- रै तूं घरां जाकै चुप चाल्ला सोजा .. नातै ऐसा रैप्टा मारुंगा गाल का दर्द ना उटै तेरे पै …
नशेड़ी बोल्या … ओ पिलवान जी तूं जाकै सोजा … जे मारे तै मेरे दर्द होंदा तो मैं उस्से दन सुधर जांदा जब मेरे बाब्बू नै मैं नशे मैं देखकै पैहली बार छेतया था …
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क्या आप जानते हैं …
चमगाद्दड़ ( सचमुच आली मेरी गर्लफ्रैंड ना 😂 ) लगभग अंधी होए करै … पर उड़दे होए उसका कदे ऐक्सिडैंट ना होंदा …
क्यों … ???
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एक घणी सुथरी छोरी किराने की दुकान पै जाकै बोल्ली :: लाला जी लिपटन की चा है के … 😗😗
लाला जी बोल्या :: ना बेब्बे चा पत्ती तो खतम होगी ,
थम के सोच्चो थे लाला के कवैगा … लुच्चे कट्ठे होरे बइमान … 😂😅😜
जो.इसका मतलब समज रे हैं वे तो मजे लेरे जिसनै ना समज आई वे किसे तै टैग कर कै पूछ ल्यो … लुच्चे तो घणे हैं .
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बुलेट ट्रेन तो उन देशों के लिए बनी है जहां समय की कमी हो।
हमारे देश मे तो अगर कहीं JCB लगी हो तो आधा गांव उसे देखने चला जाता है।
ड्राइवर बैक कर रहा हो तो 15 आदमी ‘आण दे आण दे’ में लगे रहते हैं।
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मन्नै आशकी मैं बारां लाइन की शायरी पेली थी ,
तन्नै hmmm जवाब देकै जणो गोब्बर कर दिया .
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आदमी ए आदमी का काटै इब रस्ता …
बिल्ली मेरे शहर की सब ठाली बैठी सैं ,
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एक बणिये का आखरी बखत आ-ग्या ।
उसनै आवाज लगाई – बेटी लक्ष्मी !
वा बोल्ली – “हां बाबू !”
फिर उसनै आपणे छोरे को आवाज लगाई – बेटा कुबेर!
छोरा बोल्या – “हां बाबू!”
बणिया ने फिर आपणी घर-आळी खातिर रूका मारा- भागवान !
उसकी घर-आळी बोल्ली -“हां जी !”
बणियां बोल्या – अड़ मखा लुटवाओगे – तुम सारे हाड़ै बैठे सो,
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( मेरी ये पोस्ट फिर एक बार )
थोडा़ हटके …कोई समझे तो …।
गोहत्या पाप है यां नही … गोमांस खाना चाहिए या नहीं …?
है तो जानवर ही … जब दूसरे जानवरों को खा सकते हैं तो गाय क्यों नहीं …??
गाय जानवर है कोई शक नहीं … लेकिन गाय का पाचन तंत्र कैसा है ये समझें , सब प्राणी भोजन के जहरीले तत्वों का विसर्जन मल मुत्र से करते हैं और पौष्टिक तत्वों से उनका शरीर – मांस हड्डीयां खून आदि बनते हैं …।
गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपने भोजन के पोष्टिक तत्वों को मल मूत्र में विसर्जीत करती है … और जहरीले पदार्थों से उसका शरीर बनता है … गाय खाना मना इसीलिए किया जाता है क्योंकी जहरिले पदार्थों से बना इसका मांस भी जहरीला होता है , और इसे यदि कोई इन्सान खाता है तो ये उसके शरीर और बुद्धी के लिए हानिकारक होता है …जबकि गाय का मुत्र और गोबर भी शुद्ध होता … इसे पीपल के वृक्ष के साथ भी जोड़ कर देख सकते हैं , जो दूसरे वृक्षों के विपरीत चौबिसों धन्टे हवा से कार्बनडाइआक्साईड सोख के आक्सिजन छोड़ता है इसलिए पीपल की लकड़ी जलाना वातावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है …।।
पुराने समय में शिक्षा की कमी के कारण सब चीजों को पाप और पुण्य से जोड़ दिया जाता था जो लोगों को जल्दी समझ आता था … लेकिन हिन्दू पुराणों में लिखी हर वो बात जिसे अन्धविश्वाश कहा जाता है सब का वैग्यानिक आधार है … इसलिए गोमांस पे लड़ने मरने की बजाए यदि तथ्यों से समझाया जाए तो मुझे नहीं लगता कोई गोमांस खाएगा … और ये हमारे तथाकथित धर्मरक्षक इस तरह से कभी नहीं समझाएंगे , क्योंकि इस मांस में उनकी रोटियां छिपी हैं …
तो … लड़ते रहो …।।।
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सुबह से लेके शाम तक …
शाम से लेके रात तक …
रात से फिर सुबह तक …
सुबह से फिर रात तक
फोन पै मंडया रवै … भाई यां तो तूं कुंवारा है यां तेरी लुगाई गैल्यां ना बणदी .
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मुस्कला एक शायरी याद करी थी छोरी फ़सान ताई। अक “एक पल में जान, जिस्म से कैसे जुदा होती है” या बात मन्ने कही तो अपणि सोड म थी। पर मेरे बाब्बू न बेरा ना क्यूकर सुणगी
फेर बाब्बू न बताई कोहणि मार मार के अक एक पल म जान जिस्म से कैसे जुदा होती है। इतने भूंडे भी कोई मारया करे। …!!
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आज मौसी का छोरा आ रया था … माँ नै जांदी हाण उस्तै सौ रपइए दिए प्यार के …
मन्नै बाहर लिक्ड़दे ई हेर लिआ … ओ कुत्ते गाजरपाक खुआ कै जा ,
हे प्रभू मेरे इस गुनाह को माफ करना वो भी मेरी गैल ऐसे इ करता है जी
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एक मांगण आले नै घर के दरवाजे पै रुक्का दिआ … अरै भुक्खा हूं भाई कुछ खाण नै दे द्यो …
मैं दरवाजे पै जाकै बोल्या … भाई घर कोए ना है एकला हूं कुछ बणा ना राख्या ,
सुसरा आगे तै बोल्या फेर तो बोतल खोल रया होगा एक पैग ए लवा दे
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