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!Shukar MaaN Ke Maine tere se kabi ‘Mulaakat’ Nhi Ki,
WarNaa Tere DiL Ko to TerE KhilaaF Krr DeTa….

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खुद से मिलने की भी फुरसत नहीं है अब मुझे,
और वो औरो से मिलने का इलज़ाम लगा रहे है…

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रेलवे स्टेशन की पूछताछ वाली खिड़की पर . . .
क्लर्क :- कोहरे के कारण सभी ट्रेनें लेट हैं
किसी को और कुछ पूछना है .
महिला :- क्या इस ड्रेस में , मैं मोटी लग रही हूँ . ?

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एक गाँव में बिजली आनी थी…!
.
लोग खुश होकर नाच रहे थे! एक कुत्ता भी नाचने लगा…!
.
किसी ने पूछा: तू क्यूँ नाच रहा है…?
.
कुत्ता बोला: खंबे भी तो लगेंगे…

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तूफानी बारिश आधी रात
एक आदमी Pizza Hut से पिज़्ज़ा लेने गया
पिज़्ज़ावाला:- आप शादीशुदा हो ??
आदमी:- साले, ऐसे तूफान में कौनसी माँ
अपने बेटे को पिज़्ज़ा लाने भेजेगी..

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Sitaro k aage bhi koi jahaa hoga
Jo na dekha Kabhi wo samaa hoga
Us jahaa k hasin najaro ki kasam
Aap se hasin dost dusra na hoga

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शर्त लगी थी “दुनिया” की तमाम ख़ुशीयों को_
_एक लब्ज़ मे लिखने की…._

_वो किताबे ढुँढते रह गये_
_मैंने *”दारू”* लिख दिया.!_

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TV Reporter ने एक जख्मी से पूछा :
जब बॉम्ब गिरा तो क्या वो जोर से
गिरा ?

जख्मी :
नहीं साले, वो रेंगता हुआ मेरे पास आया
और शर्मा के बोला ….. dhummm

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Dost: Biwi se Jhagra Solve hua kya?
Papu : Ghutno pe Chal k Aayi thi Mere paas.
Dost: Kya Boli?
.
.

.

Papu : Boli Bed k Neche se Nikal Aa,
Ab Nahi Marungi 😛 hahahaha

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CBI ने CBI हेडक्वार्टर पर छापा मारकर CBI को गिरफ्तार किया
CBI कोर्ट मे पेश ,CBI जज ने CBI आरोपी को 7 दिन की CBI रिमांड पर भेजा।

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What’s app का सबसे बड़ा
फायदा क्या है ??
बहुत सारी औरतें आपस में
बात करती हैं
फिर भी
आवाज़ ही नहीं होती 😛

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मास्टरजी:- बच्चों, ” मन में लड्डु फूटा ” ये कहावत को समझाओ

पिंटू:- नहीं आता.😥

. लेकिन सर, कल मुझे आपका सपना आया था😅😅

मास्टरजी:- क्या सपना आया था?

पिंटू:- कि आपका स्वयंवर हो रहा था !!

मास्टरजी:- अच्छा…

पिंटू:- स्वयंवर में दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा, अनुष्का शेट्टी(देवसेना), तमन्ना भाटिय़ा, अनुष्का शर्मा, , श्रद्धा कपूर, दिशा पटानी, श्रुति हसन इत्यादि हिरोइने मौजूद थी l

मास्टरजी:- सच में… ?!!

पिंटू:- हा.. और आपसे शादी के लिये बहुत उत्सुक थी

मास्टरजी:- अरे वाह.. फ़िर ?

पिंटू:- और आपको एक साथ तीन-तीन हिरोइनो के साथ शादी करने की छूट थी
😎😎😎😎😎😎
मास्टरजी:- ओ हो हो.. फ़िर ?

पिंटू:- फ़िर क्या..? खुद ही देख लो..
फूट गया लड्डु.. मन में !!!
😂😂😂😂😂😂
,,,,,,,मास्टरजी बेहोश

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अब तो अफरीदी को IPL में खिला लो कोई…

बेचारे ने इतना तक बोल दिया कि

पाकिस्तान खुद अपने लोग संभाल नहीं पा रहा कश्मीर लेकर क्या करेगा😜

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तुम्हे पहली बार मैंने तब नोटिस किया था,
जब किसी शाम तुम एक सब्ज़ी वाले से झगड़ा कर रही थी।
उसे डांटते वक़्त तुम्हारी आवाज़ इतनी तेज़ थी
कि मुझे मेरे कमरे तक सब सुनाई दे रहा था।
जब मैं बालकनी में आया तो तुम्हारा गुस्से से लाल चेहरा
देख हाथ बाँध कर आनंद लेने लगा।
दाँत पीस कर जिस
तरह तुम उस सब्जी वाले से उलझी थी,
मैं तो वही देख कर बिछ गया था।
तुम्हारे घर से अक्सर पुराने गीत की मधुर ध्वनियाँ मेरे
कमरे तक सुनाई देती है।
“माँग के साथ तुम्हारा मैंने..,
ढल गया दिन..,
मेरे साजन..”
मतलब गज़ब प्लेलिस्ट है तुम्हारी,
हू-ब-हू मेरी प्लेलिस्ट की तरह। बस मैं किशोर को थोड़ा ज़्यादा prefer करता हूँ।
थोड़ा स्पष्ट सुनने के लिए अब मैं बालकनी में आ गया
था।
तुम चाय का कप लिए नीचे खेल रहे बच्चों को देख रही थी।
शायद तुम इस बात से बेफिकर थी कि मैं
बगल खड़ा तुम्हें देख रहा था।
या यूँ कहूँ कि घूर रहा था।
तुम एकदम से मेरी ओर मुड़ी
और मैंने भी कितनी
स्फूर्ति से अपनी आँखों को तुमसे हटाकर दूसरी तरफ
देखने का नाटक किया।
शायद ये सही मौका नहीं था बात करने का।
या शायद इससे अच्छा मौका न मिलता।
एक आदर्श मोहल्लावासी होने के नाते मैंने अपनी
मौजूदगी दर्ज करानी चाही ही थी कि तुम्हारी माता जी ने तुम्हे आवाज़ लगा दी।
और तुम अंदर चली गयी।
इसके बाद कभी कोई ठीक ठाक मौका
ही नहीं मिला तुमसे मुखातिब होने का।
फिर एक दिन मैं छत पर लैपटॉप लिए बैठे जाने क्या
कर रहा था,
कि तुम भी एक हाथ में बाल्टी, दुसरे में चिमटियां थामे छत पर आ गयी।
और एक-एक करके
कपड़े फैलाने लगीं तारों पर।
जितनी बार तुम कपड़े
तारों पर डालने से पहले उन्हें झटकती,
उतनी बार तुम्हारी चूड़ियाँ झनझना उठती थी।
उसका शोर पूरी छत पर गूँजता रहा था।
एकदम हाय-हुक-हाय-
हाय वाले गाने की फीलिंग आ रही थी।
तभी मेरी फोन की घंटी बजी
और तुमने देखा की मैं भी वहाँ
चोरों की तरह बैठकर,काम करने की एक्टिंग कर रहा हूँ।
तुम सकपका गयीं।
लेकिन मैंने माहौल पे पकड़
बनाये रखने के लिए तुरंत बोल दिया..
“आज धूप बहुत तेज़ है न!”
“हाँ, सो तो है।
लेकिन क्या किया जाए,
कपड़े तो धुलने ही पड़ेंगे।”
“ये बात तो है,
कोई मदद करूँ आपकी?”
“कपड़े धोने में? ”
“अरे मतलब कपड़े सुखाने में ”
“अरे नहीं मैं कर लूँगी”
“वैसे आपको किसी भी तरह की ज़रूरत हो तो बता
सकती हैं आप, बेझिझक।”
“जी बिलकुल ”
हालाँकि ये एक बहुत औपचारिक वार्ता थी,
लेकिन इस वार्ता के बाद ये स्पष्ट था कि अभी संभावनाएं हैं।
किस चीज़ की, ये पता नहीं,
लेकिन इतना ज़रूर है
कि तुम्हारे आने से अब छत का माहौल बदला सा है,
बाल्कनी अब सूनी नहीं लगती।
मोहल्ला मानो मुकम्मल हो गया हो तुम्हारे आने से,
और मैं भी!!!

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संता: आप मुझे संस्कृत सिखा दो।
पंडित: क्यों?
संता: स्वर्ग में जरुरत पड़ेगी।
पंडित: अगर नर्क गए तो?
संता: punjabi ta aaundi hi aa fer

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Aap kahte the ke rone se na badleinge naseeb,
Umer bhar aapki is baat ne rone na diya…

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