Wahan Tak Sath Chalte Hain,
Jahan Tak Sath Mumkin Hai..
Jahan Halaat Bedle Ge,
Wahan Tum Bhi Badal Jana…

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~Suna Hoga Kisi Se, Dard Ki Ek Hadd Bhi Hoti Hai,
Milo Hum Se, K Hum Us Hadd K Aksar Paar Jate Hain ..’

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जिसे चाहा काश वो हमारा होता,
मेरी खुवाहिशों का भी कोई किनारा होता,

ये सोच कर मैंने उस को रोका नहीं,
दूर ही क्यों जाता अगर वो हमारा होता..!!

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तजुर्बे ने एक बात सिखाई है…

एक नया दर्द ही…

पुराने दर्द की दवाई है…!!

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रोज़ तेरा इंतज़ार होता है,
रोज़ ये दिल बेक़रार होता है,
काश तुम ये समझ सकते की,
चुप रहने वालों को भी किसी से प्यार होता है..

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KitnA MushkiL HaI YeH ZindagI Ka SafaR KhudA Ne MARNA Haram KiyA HaI, LogoN Ne JEENA.

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Hamdardi Na Kro Mujh Se Ae Mere Ham Dard……!!
.
Wo Bhi Bary Hamdard Thay Jo Dard Hazaron De
Gaye…

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~Nahii Rehta Koi Shakhs Adhoora Kisi Chez K Piichey,
Waqt Guzar Hi Jata Hai Kuch Paa Kar Bhi Kuch Kho Kar Bhii .. ‘

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तजुर्बे ने एक बात सिखाई है…

एक नया दर्द ही…

पुराने दर्द की दवाई है…!!

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Thak Gaye Hun Teri Naukri Se Ae Zindagi
Munasib Hoga Tu Mera Hisab Kar De..

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दर्द कितने हैं बता नहीं सकता ……
ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकता ……
आँखों से समझ सको तो समझ लो …..
आंसू गिरें हैं कितने , गिना नहीं सकता …

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“”””Jab se pta chla hai,
maut mein Zindagi milti hai…..
Tab se sir par kafan bandh,
Kaatil ko dhoondte hain””””

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कितना मुशकिल है दुनिया में ये हुनर अपनाना…..

तुम्ही से प्यार करना…

और

तुम्ही से फासला रखना…..!!!!!!

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~Merii Khuwaish Bhii Ajeeb Sii Haii Woh Mujhse Nafrat Kare To Kare Lekiin Kisi Aur Se Pyaar Na Kare .. ‘

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एक सवाल था दिल में, जवाब चाहती हूँ!
उलझी हूँ थोड़ी, एक आस चाहती हूँ!
की क्या हो हर बार, बार-बार जो तुम मुझे निराश करते रहो,
हर आस को मेरी तारतार करते रहो!
मैं फिर तुम्हारे एक इशारे पे दौड़ी चली आऊँ,
तुम कहो तो रोयुं, तुम कहो तो मुस्काऊँ!
की क्या हो जो तुम हर बार मुझे गिनाते रहो गलतिया मेरी,
सुनाते रहो बातें जो तीर सी हो तीखी,
मैं फिर भी हर बार वो तीखा स्वाद भूल जाऊं,
तुम दो एक आवाज़, मैं दौड़ी चली आऊँ!
क्या हो, जो हर बार तुम वजह दो मुझे दूर जाने की,
कोई कोशिश न छोड़ो मुझे रुलाने की,
मैं फिर भी हर बार तुम्हारी तरफ खींची आऊँ,
रब दे ज़िन्दगी जितनी भी,
उसकी हर सांस तेरे नाम लिख जाऊँ,
और फिर एक रोज,
आखिर मान लो हार तुम भी,
भूला के पिछली बातों को तुम मेरे पास लौट आओ!
और, मैं लेलू बदला तुमसे उस वक़्त!
हमेशा के लिए तुम्हे छोड़ कहीं दूर चली जाऊँ,
जहाँ से न खबर मिले मेरे आने की,
का अक्स मिले कोई,
वो दुनिया जहाँ से कोई वापस नहीं आता!
क्या हो?!
तुम मुझे पल-पल मारने की कोशिश करो,
और हर कोशिश का बदले मैं तुम्हें जीते जी मार जाऊँ!
बस एक सवाल था मेरे दिल में,
इसका जवाब चाहती थी!
क्या हो?!
जो एक रोज, बिन बताये ऐसा कर जाऊं!!
क्या हो?!

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Bahot Rulaya Hai khud Gharz Logo ney mujh..
,,Ay Mout,,
Agr tum sath Do To sub ko Rulany ka Irada Hai Mera..

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