नया ले आते हैं पुराना सामान कचरे में फैंक के ,
घर में पुरानी चीजें अब अच्छी नंही लगती ,
घर के किसी कोने में उसका भी बिस्तर है ,
नई बैठक में बूढ़ी माँ … अब अच्छी नंही लगती ,
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नया ले आते हैं पुराना सामान कचरे में फैंक के ,
घर में पुरानी चीजें अब अच्छी नंही लगती ,
घर के किसी कोने में उसका भी बिस्तर है ,
नई बैठक में बूढ़ी माँ … अब अच्छी नंही लगती ,
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आजकल पेड पर लदे बेर
खुद ही मजबूरी में
नीचे गिरने लगे हैं ..
क्योंकि
बेर को भी पता है
पत्थर मारने वाला बचपन
अब मोबाईल में व्यस्त है
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आपके सारे गम खुशियों में तोल दूं
अपने सारे राज यू ही खोल दूं
कोई मुझसे पहले करे न आपको विश
सोचा आज ही हैप्पी न्यू ईयर बोल दूं
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दो शेरों की दोस्ती बिगड़ जाती है,
दोनों ही एक दुसरे के दुश्मन हो जाते हैं, फिर दोनों एक दूसरे से 10 साल तक बात तक नही करते……
एक बार पहले शेर और उसकी
बीवी-बच्चों को 25-30 कुत्ते नोचने लगते हैं…….
तभी दूसरा शेर आता है, और उन कुत्तों को केले के छिलके की तरह फाड़ के भाग देता है…… और फिर से दूर जा के बैठ जाता है…..
पहले शेर का बेटा उससे पूछता है कि पापा दूसरे शेर से तो आप बात तक नही करते, फिर भी उसने हमको क्यों बचाया ??
पहले शेर ने कहा
बेटा, भले ही नाराज़गी हो, पर दोस्ती इतनी भी कमजोर नही होना चाहिए कि कुत्ते फायदा उठा लें ।
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अदॅर से तो कब के मर चुके है…
ऎ मोत तू भी आजा…
ये लौग सबूत मागॅते है ।
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समस्या – *”बेटा, मेरी बहुएं मेरा कहना नहीं सुनती। सलवार सूट और जीन्स पहन के घूमती हैं। सर पर पल्ला/चुनरी नहीं रखती और मार्किट चली जाती हैं। मार्गदर्शन करो कि कैसे इन्हें वश में करूँ…”*
*समाधान* – आंटी जी चरण स्पर्श, पहले एक कहानी सुनते हैं, फिर समस्या का समाधान सुनाते हैं।
“एक अंधे दम्पत्ति को बड़ी परेशानी होती, जब अंधी खाना बनाती तो कुत्ता आकर खा जाता। रोटियां कम पड़ जाती। तब अंधे को एक समझदार व्यक्ति ने आइडिया दिया कि तुम डंडा लेकर दरवाजे पर थोड़ी थोड़ी देर में फटकते रहना, जब तक अंधी रोटी बनाये। अब कुत्ता *तुम्हारे हाथ मे डंडा देखेगा और डंडे की खटखट सुनेगा तो स्वतः डर के भाग जाएगा रोटियां सुरक्षित रहेंगी*। युक्ति काम कर गयी, अंधे दम्पत्ति खुश हो गए।
कुछ वर्षों बाद दोनों के घर मे सुंदर पुत्र हुआ, जिसके आंखे थी और स्वस्थ था। उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा किया। उसकी शादी हुई और बहू आयी। बहु जैसे ही रोटियां बनाने लगी तो लड़के ने डंडा लेकर दरवाजे पर खटखट करने लगा। बहु ने पूँछा ये क्या कर रहे हो और क्यों? तो लड़के ने बताया ये हमारे घर की परम्परा है, मेरी माता जब भी रोटी बनाती तो पापा ऐसे ही करते थे। कुछ दिन बाद उनके घर मे एक गुणीजन आये, तो माज़रा देख समझ गए। बोले बेटा तुम्हारे माता-पिता अंधे थे, अक्षम थे तो उन्होंने ने डंडे की खटखट के सहारे रोटियां बचाई। लेकिन तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों की आंखे है, तुम्हे इस खटखट की जरूरत नहीं। *बेटे परम्पराओं के पालन में विवेक को महत्तव दो*।
आंटीजी, *इसी तरह हिंदू स्त्रियों में पर्दा प्रथा मुगल आततायियों के कारण आयी थी*, क्योंकि वो सुंदर स्त्रियों को उठा ले जाते थे। इसलिए स्त्रियों को मुंह ढककर रखने की आवश्यकता पड़ती थी। सर पर हमेशा पल्लू होता था यदि घोड़े के पदचाप की आवाज़ आये तो मुंह पर पल्ला तुरन्त खींच सकें।”
अब हम स्वतन्त्र देश के स्वतन्त्र नागरिक है, राजा का शासन और सामंतवाद खत्म हो गया है। अब स्त्रियों को सर पर अनावश्यक पल्ला और पर्दा प्रथा पालन की आवश्यकता नहीं है।
घर के बड़ो का सम्मान आंखों में होना चाहिए, बोलने में अदब होना चाहिए और व्यवहार में विनम्रता छोटो के अंदर होनी चाहिए।
सर पर पल्ला रखे और वृद्धावस्था में सास-ससुर को कष्ट दे तो क्या ऐसी बहु ठीक रहेगी?
आंटीजी पहले हम सब लकड़ियों से चूल्हे में खाना बनाते थे, लेकिन अब गैस में बनाते है। पहले बैलगाड़ी थी और अब लेटेस्ट डीज़ल/पेट्रोल गाड़िया है। टीवी/मोबाइल/लैपटॉप/AC इत्यादि नई टेक्नोलॉजी उपयोग जब बिना झिझक के कर रहे हैं, तो फिर बहुओं को पुराने जमाने के हिसाब से क्यों रखना चाहती है? नए परिधान यदि सभ्य है, सलवार कुर्ती, जीन्स कुर्ती तो उसमें किसी को समस्या नहीं होनी चाहिए। जब बेटियाँ उन्ही वस्त्रों में स्वीकार्य है तो फिर बहु के लिए समस्या क्यों?
आंटी जी, “परिवर्तन संसार का नियम है”। यदि आप अच्छे संस्कार घर में बनाये रखना चाहते हो तो उस सँस्कार के पीछे का लॉजिक प्यार से बहु- बेटी को समझाओ। उन्हें थोड़ी प्राइवेसी दो और खुले दिल से उनका पॉइंट ऑफ व्यू भी समझो।
बहु भी किसी की बेटी है, आपकी बेटी भी किसी की बहू है। अतः घर में सुख-शांति और आनन्दमय वातावरण के लिए *जिस तरह आपने मोबाइल जैसी टेक्नोलॉजी को स्वीकार किया है वैसे ही बहु के नए परिधान को स्वीकार लीजिये। बहु को एक मां की नज़र से बेटी रूप में देखिए, और उससे मित्रवत रहिये।*
*”सबसे बड़ा रोग- क्या कहेंगे लोग”*, इससे बचिए, क्योंकि जब आपको सेवा की जरूरत होगी तो लोग कभी उपलब्ध न होंगे। आपको *’बेटे-बहु’* ही चाहिए होंगे।
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ज़िन्दगी की हकीकत को बस इतना ही जाना है !.
दर्द में अकेले हैं और खुशियों में सारा जमाना है…!
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जो दूसरों को इज़्ज़त देता है,
वो खुद इज़्ज़तदार होता है
क्योकि इंसान दूसरो को वही दे पाता है
जो उसके पास होता है
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दो बाते आपको अपनो से दुर कर सकती है
एक तो आपका अहम और
दुसरा आपका वहम
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काँटों पर चलकर फूल खिलते हैं,
विश्वास पर चलकर .
भगवान .. मिलते हैं,
एक बात सदा याद रखना दोस्त!!
सुख में सब मिलते है, लेकिन
दुख में सिर्फ .. भगवान .. मिलते है. .
👣👣
Good morning
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jo lagaye the maine phool,
kuch murjha gye, kuch khil gye,
jo dost kabhi mere saath the,
kuch kho gye kuch mil gye
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किसी को बुरा मत कहो
किसी की चुगली मत करो
किसी आचछे ईंसान के बारे
मे गलत मत बोलो
जो लोग आचछे होते
है वो किसी की भी बुराई नही करते है
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अपनी कमजोरियो का जिकर
कभी ना करना
दुनिया के सामने
.
सुना है लोग कटी पंतग
को जमकर
लूटा करते है
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“एक बार नही सौ बार कहेगें”
पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत पाकिस्तान का परमाणु बम नही
बल्कि भारत में रहने वाले गद्दार है…
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सत्य जो लॉकडाऊन के दौरान सभी के सामने आए..
1. अमेरिका अब दुनिया का सबसे बेहतर देश नहीं रहा
2. चीन कभी विश्व कल्याण की नही सोच सकता
3. यूरोपीय देश उतने शिक्षित और सुधरे हुए नहीं जितना हम सोचते हैं
4. भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता विश्व में सबसे ज्यादा है।
5. कोई पादरी, पुजारी या मौलवी एक भी रोगी को ठीक नहीं कर सकता, मारना और बचाना – सब प्रकृति के हाथ में है
6. स्वास्थ्य कर्मी, पुलिस और प्रशासन कर्मी ही असली हीरो हैं ना कि क्रिकेटर और फिल्मी सितारे
7. बिना उपयोग के विश्व में सोना चाँदी और तेल का कोई महत्व नहीं।
8. पहली बार पशु एवम् पक्षियों को लगा कि यह संसार उनका भी है
9. तारे वास्तव में टिमटिमाते हैं यह विश्वास महानगरों के बच्चों को पहली बार हुआ
10. हम और हमारे बच्चे बिना ‘जंक फूड’ के भी जिन्दा रह सकते है।
11. साफ सुथरा और सादा जीवन जीना कोई कठिन कार्य नहीं है।
11. मीडिया केवल झूठ और बकवास की पोटली है
12. पैसे की कोई वैल्यू नही है
13. भारतीय अमीरों मे मानवता कूट-२ कर भरी हुई है
14. खराब समय को भारतीय सबसे बेहतरीन तरीक़े से संभाल सकते हैं ।
घर पर रहिए…….
सुरक्षित रहिये……
अपनी संस्कृति का पालन कीजिए.
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अपनी गलतियो से
तकदीर को बदनाम ना करो
क्योकि तकदीर तो खुद
हिम्मत की मोहताज होती है
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