जो बोल रहे थे “दुनिया दवाई बनाने में लगी है और हम दीया जलाने में”

उन्हें बता दूं कि , अमेरिका और ब्राजील भारत से दवाई मांग रहा है

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इश्क ओर दोस्ती मेरे दो जहान है,
इश्क मेरी रुह, तो दोस्ती मेरा ईमान है,
इश्क पर तो फिदा करदु अपनी पुरी जिंदगी,
पर दोस्ती पर, मेरा इश्क भी कुर्बान है

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जो अपने कदमों की काबिलियत
पर विश्वास रखते हैं,

वो ही अक्सर मंजिल
पर पहूँचते है…🙌

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दुनिया का बेहद मुश्किल काम
“अपनों ” में से
“अपनों ” को खोजना

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बिंदास मुस्कुराओ क्या ग़म है,
…..ज़िन्दगी में टेंशन किसको कम है,
……..अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है,
…………जिन्दगी का नाम ही कभी ख़ुशी कभी गम हैं ।

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मेहनत इतनी खामोशी से करो कि
.
“सफलता शोर मचा दे”

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जब लालच के बाजार
आबाद हो जायें तो रिश्तों
के शहर विरान हो जाते हैं
चाहे रिश्ते खून के हों जा
फिर दोस्ती के हों

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जिन रिस्तों में हर बात का मतलब समझना पड़े
और सफाई देनी पड़े
वो रिश्ते रिश्ते नही बोझ है….

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कुछ बेतुके झगड़े यूं ही खत्म कर
दिया करो,,

जहाँ गलती ना भी हो वहाँ भी हाथ
जोड़ लिया करो 😊😄

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अच्छे इंसान सिर्फ और सिर्फ अपने कर्म से पहचाने जाते है
क्योकि
अच्छी बाते तो
बुरे लोग भी कर लेते है

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अच्छा, बुरा और बुरा, अच्छा लगने लगता है। पहले देखेगा कौन?
बदल तो सही अपना द्रष्टिकोण।
सोचेगा कौन? जो रहेगा मौन।

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*एक बार एक गाँव में पंचायत लगी थी | वहीं थोड़ी दुरी पर एक संत ने अपना बसेरा किया हुआ था|जब पंचायत किसी निर्णय पर नहीं पहुच सकी तो किसी ने कहा कि क्यों न हम महात्मा जी के पास अपनी समस्या को लेकर चलें अतः सभी संत के पास पहुंचे | जब संत ने गांव के लोगों को देखा तो पुछा कि कैसे आना हुआ? तो लोगों ने कहा ‘महात्मा जी गाँव भर में एक ही कुआँ हैं और कुँए का पानी हम नहीं पी सकते, बदबू आ रही है । मन भी नहीं होता पानी पीने को।*

*संत ने पुछा–हुआ क्या?पानी क्यों नहीं पी सक रहे हो?*

*लोग बोले–तीन कुत्ते लड़ते लड़ते उसमें गिर गये थे । बाहर नहीं निकले, मर गये उसी में । अब जिसमें कुत्ते मर गए हों, उसका पानी कौन पिये महात्मा जी ?*
*संत ने कहा — ‘एक काम करो ,उसमें गंगाजल डलवाओ,*
*तो कुएं में गंगाजल भी आठ दस बाल्टी छोड़ दिया गया ।*
*फिर भी समस्या जस की तस !*
*लोग फिर से संत के पास पहुंचे,अब संत ने कहा”*
*भगवान की कथा कराओ”।*

*लोगों ने कहा ••••ठीक है ।*

*कथा हुई , फिर भी समस्या जस की तस*
*लोग फिर संत के पास पहुंचे !*
*अब संत ने कहा*
*उसमें सुगंधित द्रव्य डलवाओ।*

*लोगों ने फिर कहा ••••• हाँ, अवश्य ।*
*सुगंधित द्रव्य डाला गया|*
*नतीजा फिर वही…ढाक के तीन पात*
*लोग फिर संत के पास*
*अब संत खुद चलकर आये ।*
*लोगों ने कहा– महाराज ! वही हालत है, हमने सब करके देख लिया । गंगाजल भी डलवाया, कथा भी करवायी, प्रसाद भी बाँटा और उसमें सुगन्धित पुष्प और बहुत चीजें डालीं; लेकिन महाराज ! हालत वहीं की वहीं ।अब संत आश्चर्यचकित हुए कि अभी भी इनका मन कैसे नहीं बदला।*
*तो संत ने पुछा– कि तुमने और सब तो किया, वे तीन कुत्ते मरे पड़े थे, उन्हें निकाला कि नहीं?*
*लोग बोले — उनके लिए न आपने कहा था न हमने निकाला, बाकी सब किया । वे तो वहीं के वहीं पड़े हैं ।*
*संत बोले — जब तक उन्हें नहीं निकालोगे, इन उपायों का कोई प्रभाव नहीं होगा।*

*👉सही बात यह है कि हमारे आपके जीवन की यह कहानी है । इस शरीर नामक गाँव के अंतःकरण के कुएँ में ये काम-क्रोध ,लोभ-मोह और अहंकार के तीन कुत्ते लड़ते झगड़ते गिर गये हैं । इन्हीं की सारी बदबू है ।
हम उपाय पूछते हैं तो लोग बताते हैं–तीर्थयात्रा कर लो, थोड़ा यह कर लो, थोड़ा पूजा करो, थोड़ा पाठ। सब करते हैं, पर बदबू उन्हीं दुर्गुणों की आती रहती है ।
तो पहले इन्हें निकाल कर बाहर करें तभी जीवन उपयोगी होगा ..

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हर रिशते से नूर बरसेगा,
बस शर्त इतनी सी है कि
रिशतो मे शरारते करो
साजिशे नही

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नया ले आते हैं पुराना सामान कचरे में फैंक के ,
घर में पुरानी चीजें अब अच्छी नंही लगती ,

घर के किसी कोने में उसका भी बिस्तर है ,
नई बैठक में बूढ़ी माँ … अब अच्छी नंही लगती ,

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अंधे को मंदिर में देख कर लोग हँसकर बोले~

मंदिर में आये हो पर क्या भगवान को देख पाओगे?

अँधा~क्या फर्क पडता है मेरा भगवान तो मुझे देख लेगा।

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ज़िन्दगी हसीन है,ज़िन्दगी से प्यार करो …
हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो …
वो पल भी आएगा, जिस पल का इंतज़ार हैं आपको…
बस रब पर भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो..!!

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