प्राइमरी क्लास में मास्टर साहब गणित सिखा रहे थे.
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मास्टर साहब – “बेटा, मान लो मैंने तुम्हें 10 लड्डू दिए !”
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पप्पू – “क्यों मान लूँ … आपने तो मुझे एक भी नहीं दिया ?”
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मास्टर साहब – “अरे मान ले न ! मानने में तेरे बाप का क्या जाता है ?”
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पप्पू – “ठीक है …”
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मास्टर साहब – “हाँ, तो उसमें से 5 तुमने मुझे वापस दे दिए … तो बताओ तुम्हारे पास कितने लड्डू बचे ?”
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पप्पू – “20 !!!”
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मास्टर साहब – “कैसे ?”
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पप्पू – “मान लीजिए ना ! मानने में आपके बाप का क्या जाता है
जब मैं दुकान पहुंचा मेरी बीवी का फोन आया, बोली आज क्या तारीख है? मैं घबराते हुए बोला ..27 जुलाई। उसने फोन काट दिया। अब मैं काफी डर रहा था और सोचने लगा. उसका जन्मदिन….नही, मेरा जन्मदिन…..नही, हमारी सालगिरह… नही बच्चो के जन्मदिन. .नही, सास ससुर का जन्मदिन/सालगिरह..नही। सिलेंडर बुकिंग…करवा चुका। डिस,मोबाइल,बिजलीबिल,पेपर बिल, दूध बिल सभी का भुगतान..हो गया।
तो.. तारीख क्यो पूछी उसने ?
मेरा लंच और शाम की चाय भी इसी सोच और भय में गुजरी। खैर मैं शाम को घर पहुंचा। छोटे वाला लड़का पार्क में खेल रहा था। मैंने उससे पूछा.. घर का मौसम कैसा है..? बवंडर या सुनामी ?
बेटे ने कहा..सब ठीक है पर आप क्यो पूछ रहे हो पापा ??
मैंने कहा..सुबह तुम्हारी मम्मी ने आज की तारीख पूछी थी
लड़का मुस्कुराया और बोला.. आज सुबह मैंने कैलेंडर में से कुछ पन्ने फाड़ लिए थे..शायद इसलिए वो कन्फ्यूज्ड हो गई होगी। 😊😊😊
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यकीन मानिये।
एक शादीशुदा आदमी का जीवन दहशत से भरा है।
मास्टर जी को दिल का दौरा उस वक्त पड गया
जब प्रैक्टिकल कॉपी साइन करवाने वालों की भीड़ में घुसकर
एक खुन्नस खाए स्टुडेंट ने उनकी प्रौपर्टी अपने नाम करवा ली…
एक बार एक आदमी ने अपने एक दोस्त को घर पर
खाने पे बुलाया, वो भी 7 बजे शाम को ऑफिस छुटने
के बाद, वो भी बीवी को बिना बताए… 🙂
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दोस्त को देखते ही बीवी ने दोस्त के सामने ही उस पर
चिल्लाना शुरूकर दिया: –
बीवी: – मेरे बाल देखो…, मैंने मेकअप नहीं किया हुआ, घर की
हालत देखो, मैं अभी तक गाऊन में हूँ, और मैं आज इतनी थकी हूँ
कि रात का खाना नहीं बना सकती…. 🙂
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क्या सोच के तुमने इसको घर बुला लिया…,,
मुझसे बिना पूछे बोलो…..? ;;
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पति: — जानू ये बेवकूफ शादी करने की सोच
रहा था…, मैंने कहा पगले पहले एक डेमो तो देख ले…
एक लड़का टेटू बनवा रहा था
और रो भी रहा था. 😭
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मैं बोला भाई जब दर्द नहीं सहा जाता
तो क्यूँ टेटू बनवा रहा हैं ?
लड़का —दर्द से नहीं रो रहा हूँ भाई..
” करीना “लिखना था साले ने
” कमीना “लिख दिया हैं
बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। एक शिष्य ने पूछा- “कर्म क्या है?”
बुद्ध ने कहा- “मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ।”
एक राजा हाथी पर बैठकर अपने राज्य का भ्रमण कर रहा था।अचानक वह एक दुकान के सामने रुका और अपने मंत्री से कहा- “मुझे नहीं पता क्यों, पर मैं इस दुकान के स्वामी को फाँसी देना चाहता हूँ।”
यह सुनकर मंत्री को बहुत दु:ख हुआ। लेकिन जब तक वह राजा से कोई कारण पूछता, तब तक राजा आगे बढ़ गया।
अगले दिन, मंत्री उस दुकानदार से मिलने के लिए एक साधारण नागरिक के वेष में उसकी दुकान पर पहुँचा। उसने दुकानदार से ऐसे ही पूछ लिया कि उसका व्यापार कैसा चल रहा है? दुकानदार चंदन की लकड़ी बेचता था। उसने बहुत दुखी होकर बताया कि मुश्किल से ही उसे कोई ग्राहक मिलता है। लोग उसकी दुकान पर आते हैं, चंदन को सूँघते हैं और चले जाते हैं। वे चंदन कि गुणवत्ता की प्रशंसा भी करते हैं, पर ख़रीदते कुछ नहीं। अब उसकी आशा केवल इस बात पर टिकी है कि राजा जल्दी ही मर जाएगा। उसकी अन्त्येष्टि के लिए बड़ी मात्रा में चंदन की लकड़ी खरीदी जाएगी। वह आसपास अकेला चंदन की लकड़ी का दुकानदार था, इसलिए उसे पक्का विश्वास था कि राजा के मरने पर उसके दिन बदलेंगे।
अब मंत्री की समझ में आ गया कि राजा उसकी दुकान के सामने क्यों रुका था और क्यों दुकानदार को मार डालने की इच्छा व्यक्त की थी। शायद दुकानदार के नकारात्मक विचारों की तरंगों ने राजा पर वैसा प्रभाव डाला था, जिसने उसके बदले में दुकानदार के प्रति अपने अन्दर उसी तरह के नकारात्मक विचारों का अनुभव किया था।
बुद्धिमान मंत्री ने इस विषय पर कुछ क्षण तक विचार किया। फिर उसने अपनी पहचान और पिछले दिन की घटना बताये बिना कुछ चन्दन की लकड़ी ख़रीदने की इच्छा व्यक्त की। दुकानदार बहुत खुश हुआ। उसने चंदन को अच्छी तरह कागज में लपेटकर मंत्री को दे दिया।
जब मंत्री महल में लौटा तो वह सीधा दरबार में गया जहाँ राजा बैठा हुआ था और सूचना दी कि चंदन की लकड़ी के दुकानदार ने उसे एक भेंट भेजी है। राजा को आश्चर्य हुआ। जब उसने बंडल को खोला तो उसमें सुनहरे रंग के श्रेष्ठ चंदन की लकड़ी और उसकी सुगंध को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। प्रसन्न होकर उसने चंदन के व्यापारी के लिए कुछ सोने के सिक्के भिजवा दिये। राजा को यह सोचकर अपने हृदय में बहुत खेद हुआ कि उसे दुकानदार को मारने का अवांछित विचार आया था।
जब दुकानदार को राजा से सोने के सिक्के प्राप्त हुए, तो वह भी आश्चर्यचकित हो गया। वह राजा के गुण गाने लगा जिसने सोने के सिक्के भेजकर उसे ग़रीबी के अभिशाप से बचा लिया था। कुछ समय बाद उसे अपने उन कलुषित विचारों की याद आयी जो वह राजा के प्रति सोचा करता था। उसे अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए ऐसे नकारात्मक विचार करने पर बहुत पश्चात्ताप हुआ।
यदि हम दूसरे व्यक्तियों के प्रति अच्छे और दयालु विचार रखेंगे, तो वे सकारात्मक विचार हमारे पास अनुकूल रूप में ही लौटेंगे। लेकिन यदि हम बुरे विचारों को पालेंगे, तो वे विचार हमारे पास उसी रूप में लौटेंगे।
यह कहानी सुनाकर बुद्ध ने पूछा- “कर्म क्या है?” अनेक शिष्यों ने उत्तर दिया- “हमारे शब्द, हमारे कार्य, हमारी भावनायें, हमारी गतिविधियाँ…”
बुद्ध ने सिर हिलाया और कहा- *”तुम्हारे विचार ही तुम्हारे कर्म हैं।”*
Captain of Military: Naujawanon aage bado
Santa aage nahin bada
Captain: Tum aage kyun nahin bade?
Santa: Apne kaha 9 jawanon aage bado, mein 10ve number pe tha
एक दूरदराज के गाँव में एक राजनेता का भाषण था।
करीब 25 मील के सड़क प्रवास के पश्चात जब वो सभा स्थल पर पहुँचे तो देखा कि
वहाँ सिर्फ एक किसान उन्हें सुनने के लिए बैठा हुआ था।
उस अकेले को देख नेताजी निराश भाव से बोले—
” भाई, तुम तो एक ही हो।
समझ नहीं आता,
अब मैं भाषण दूँ या नहीं ? ”
किसान बोला—
” साहब, मेरे घर पर 20 बैल हैं।
मैं उन्हें चारा डालने जाऊँ और वहाँ एक ही बैल हो तो
बाकी 19 बैल नहीं होने के कारण क्या उस एक बैल को उपवास करा दिया जाए ? ”
किसान का बढ़िया जवाब सुन नेताजी खुश हो गए
और फिर मंच पर जाकर उस एक किसान को 2 घंटे तक भाषण दिया।
भाषण ख़त्म होने पर नेताजी बोले—
” भाई, तुम्हारी बैलों की उपमा
(उदहारण) मुझे बहुत पसंद आई।
तुम्हें मेरा भाषण कैसा लगा ? ”
किसान ने जवाब दिया—
“साहब, 19 बैलों की गैरहाजिरी में 20 बैलों का चारा एक ही बैल को नहीं डालना चाहिए,
इतनी अक्ल मुझमे है।
लेकिन आप में नहीं है।