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एक आदमी अपने दोस्त के घर गया, उसने बेल बजाई… उस समय दोस्त घर पर नहीं था..😍😍
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दरवाजा 5 साल के बच्चे ने! खोला,
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माँ ने किचन से ही बच्चे से पूछा – कौन है बेटा ?
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बेटा – अंकल आये है, मम्मी…
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मम्मी – कौन अंकल ?
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अंकल भी जरा उत्सुक हुए, देखने कि, बच्चा उनका परिचय कैसे देता है ।
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बेटे ने कहा – मम्मी वही अंकल आये है, जिनके जाने के बाद आप हमेशा पापा से कहती हैं, कि
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“तुम्हारा ये भिखारी दोस्त हमेशा खाने के टाईम पर ही आ टपकता है.. भुक्कड़ कही का…🙀😳😜
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मना करता जाता है और ठूँसते जाता है ।
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और खाते समय सूअर जैसी चप-चप आवाज निकालता है ।”
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अंकल तो वहीं बेहोश होकर गिरे…अभी तक होश में नही आऐ हैं…
😂😂😂😂😂😂😂
ज्ञान – बच्चों को झूठ बोलना भी सिखायें…

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एक लडकी का स्टेटस था
‘Available ‘
मैंने पूछ लिया “कितनें में….?”
बुरा मान गई . . . . . Blocked

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Tumhare bina kuch socha nahi jata.
Ek pal bhi bin tumhare humse jiya nahi jata,
itna bhi yaad aya na karo,
phr tumse dur humse raha nahi jata…..

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चपरासी- साहब,आपके लंगोटिया दोस्त का फोन आया था।”
साहब- ”तुमने कैसे जाना कि वह मेरा लंगोटिया दोस्त ही है?”
चपरासी- ”साहब उसने कहा था कि जरा देखो तो ऑफिस में वह बेवकूफ आया है या नहीं?”

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क्यूँ सताते हो..
हमे बेगानो की तरह..
कभी तो चाहो..
चाहने वालों की तरह..

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~ Zindgi Chain Se Guzar Jaye
Tu Agr Jehn Se Nikl Jaye .. ^

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लाशें बिछा देंगे लाशें…
….ऐसा बोलने वालों को भी मैंने
शादी के बाद
बीबी का बिस्तर बिछाते देखा है

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‘बड़ी बारीकी से तोडा है, उसने दिल का हर कोना,

मुझे तो सच कहुँ, उस के हुनर पे नाज़ होता है…!

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तेरी दुनिया में कोई गम ना हो,
तेरी खुशियाँ कभी कम न हो,😜😜
भगवान तुझे ऐसी आइटम दे,😜😜�
जो अग्निपथ की चिकनी चमेली से कम ना हो !!

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वो ‪‎ना‬ ही मिलते तो ‪‎अच्छा‬ था…
बेकार में ‪‎मोह्हबत‬ से ‪‎नफ़रत‬ हो गयी

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मुजे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान है बहुत लोग,
पर किसी ने मेरे पैरो के छाले नहीं देखे…..!!!!

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Ek baat bolu..
Akele jeena aa hi jata hai,
Jab maloom hota hai k ab koi
Saath chalne wala nahi.

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बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। एक शिष्य ने पूछा- “कर्म क्या है?”
बुद्ध ने कहा- “मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ।”
एक राजा हाथी पर बैठकर अपने राज्य का भ्रमण कर रहा था।अचानक वह एक दुकान के सामने रुका और अपने मंत्री से कहा- “मुझे नहीं पता क्यों, पर मैं इस दुकान के स्वामी को फाँसी देना चाहता हूँ।”
यह सुनकर मंत्री को बहुत दु:ख हुआ। लेकिन जब तक वह राजा से कोई कारण पूछता, तब तक राजा आगे बढ़ गया।
अगले दिन, मंत्री उस दुकानदार से मिलने के लिए एक साधारण नागरिक के वेष में उसकी दुकान पर पहुँचा। उसने दुकानदार से ऐसे ही पूछ लिया कि उसका व्यापार कैसा चल रहा है? दुकानदार चंदन की लकड़ी बेचता था। उसने बहुत दुखी होकर बताया कि मुश्किल से ही उसे कोई ग्राहक मिलता है। लोग उसकी दुकान पर आते हैं, चंदन को सूँघते हैं और चले जाते हैं। वे चंदन कि गुणवत्ता की प्रशंसा भी करते हैं, पर ख़रीदते कुछ नहीं। अब उसकी आशा केवल इस बात पर टिकी है कि राजा जल्दी ही मर जाएगा। उसकी अन्त्येष्टि के लिए बड़ी मात्रा में चंदन की लकड़ी खरीदी जाएगी। वह आसपास अकेला चंदन की लकड़ी का दुकानदार था, इसलिए उसे पक्का विश्वास था कि राजा के मरने पर उसके दिन बदलेंगे।
अब मंत्री की समझ में आ गया कि राजा उसकी दुकान के सामने क्यों रुका था और क्यों दुकानदार को मार डालने की इच्छा व्यक्त की थी। शायद दुकानदार के नकारात्मक विचारों की तरंगों ने राजा पर वैसा प्रभाव डाला था, जिसने उसके बदले में दुकानदार के प्रति अपने अन्दर उसी तरह के नकारात्मक विचारों का अनुभव किया था।
बुद्धिमान मंत्री ने इस विषय पर कुछ क्षण तक विचार किया। फिर उसने अपनी पहचान और पिछले दिन की घटना बताये बिना कुछ चन्दन की लकड़ी ख़रीदने की इच्छा व्यक्त की। दुकानदार बहुत खुश हुआ। उसने चंदन को अच्छी तरह कागज में लपेटकर मंत्री को दे दिया।
जब मंत्री महल में लौटा तो वह सीधा दरबार में गया जहाँ राजा बैठा हुआ था और सूचना दी कि चंदन की लकड़ी के दुकानदार ने उसे एक भेंट भेजी है। राजा को आश्चर्य हुआ। जब उसने बंडल को खोला तो उसमें सुनहरे रंग के श्रेष्ठ चंदन की लकड़ी और उसकी सुगंध को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। प्रसन्न होकर उसने चंदन के व्यापारी के लिए कुछ सोने के सिक्के भिजवा दिये। राजा को यह सोचकर अपने हृदय में बहुत खेद हुआ कि उसे दुकानदार को मारने का अवांछित विचार आया था।
जब दुकानदार को राजा से सोने के सिक्के प्राप्त हुए, तो वह भी आश्चर्यचकित हो गया। वह राजा के गुण गाने लगा जिसने सोने के सिक्के भेजकर उसे ग़रीबी के अभिशाप से बचा लिया था। कुछ समय बाद उसे अपने उन कलुषित विचारों की याद आयी जो वह राजा के प्रति सोचा करता था। उसे अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए ऐसे नकारात्मक विचार करने पर बहुत पश्चात्ताप हुआ।
यदि हम दूसरे व्यक्तियों के प्रति अच्छे और दयालु विचार रखेंगे, तो वे सकारात्मक विचार हमारे पास अनुकूल रूप में ही लौटेंगे। लेकिन यदि हम बुरे विचारों को पालेंगे, तो वे विचार हमारे पास उसी रूप में लौटेंगे।
यह कहानी सुनाकर बुद्ध ने पूछा- “कर्म क्या है?” अनेक शिष्यों ने उत्तर दिया- “हमारे शब्द, हमारे कार्य, हमारी भावनायें, हमारी गतिविधियाँ…”
बुद्ध ने सिर हिलाया और कहा- *”तुम्हारे विचार ही तुम्हारे कर्म हैं।”*

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मोह्हब्ब्त किसी से तब ही करना जब निभाना सिखलो ..
मजबूरियों का सहारा लेकर छोड़ देना वफादारी नही होती.

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Banta-Yaar santa TU apen colege ka naam subse alag Rkhana.
santa NE College ka naam rakha.
SANTA SINGH GIRL COLLEGE 4 BOY’S.

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छात्र (भगवान से) – हज़ारो की किस्मत तेरे हाथ है,
अगर पास करदे तो क्या बात है!
परीक्षा के बाद
भगवान – गर्लफ्रेंड थोड़ी कम पटाता तो क्या बात थी
किताबे तो सारी तेरे पास थी…

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