अब आ गए हो आप तो
आता नहीं कुछ याद,
वरना कुछ हमको आप से
कहना ज़रूर था।

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ये दुनियाँ के तमाम चेहरे तुम्हें गुमराह कर देंगें,

तुम बस मेरे दिल ❤ में रहो, यहाँ कोई आता जाता नहीं

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मैं दुनिया से लड़ सकता हूँ पर
अपनो के सामने लड़ नहीं सकता,
क्योंकि अपनो के साथ मुझे ‘जीतना’ नहीं
बल्कि ‘जीना’ है!

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रोशनी के उजाले मेँ तो हर कोई चमकता है.,
पर ऐ-जान तू तो वो है,
जो अँधेरे मेँ भी चाँद की रोशनी को फीका कर दे.

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ईश्क की गहराईयो में खूब सूरत क्या है,
मैं हूं , तुम हो, और कुछ की जरूरत क्या है!

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तेरे करीब आकर बड़ी उलझन में हूँ
मै गैरो में हूँ या तेरे अपने में हूँ

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तुम्हे पहली बार मैंने तब नोटिस किया था,
जब किसी शाम तुम एक सब्ज़ी वाले से झगड़ा कर रही थी।
उसे डांटते वक़्त तुम्हारी आवाज़ इतनी तेज़ थी
कि मुझे मेरे कमरे तक सब सुनाई दे रहा था।
जब मैं बालकनी में आया तो तुम्हारा गुस्से से लाल चेहरा
देख हाथ बाँध कर आनंद लेने लगा।
दाँत पीस कर जिस
तरह तुम उस सब्जी वाले से उलझी थी,
मैं तो वही देख कर बिछ गया था।
तुम्हारे घर से अक्सर पुराने गीत की मधुर ध्वनियाँ मेरे
कमरे तक सुनाई देती है।
“माँग के साथ तुम्हारा मैंने..,
ढल गया दिन..,
मेरे साजन..”
मतलब गज़ब प्लेलिस्ट है तुम्हारी,
हू-ब-हू मेरी प्लेलिस्ट की तरह। बस मैं किशोर को थोड़ा ज़्यादा prefer करता हूँ।
थोड़ा स्पष्ट सुनने के लिए अब मैं बालकनी में आ गया
था।
तुम चाय का कप लिए नीचे खेल रहे बच्चों को देख रही थी।
शायद तुम इस बात से बेफिकर थी कि मैं
बगल खड़ा तुम्हें देख रहा था।
या यूँ कहूँ कि घूर रहा था।
तुम एकदम से मेरी ओर मुड़ी
और मैंने भी कितनी
स्फूर्ति से अपनी आँखों को तुमसे हटाकर दूसरी तरफ
देखने का नाटक किया।
शायद ये सही मौका नहीं था बात करने का।
या शायद इससे अच्छा मौका न मिलता।
एक आदर्श मोहल्लावासी होने के नाते मैंने अपनी
मौजूदगी दर्ज करानी चाही ही थी कि तुम्हारी माता जी ने तुम्हे आवाज़ लगा दी।
और तुम अंदर चली गयी।
इसके बाद कभी कोई ठीक ठाक मौका
ही नहीं मिला तुमसे मुखातिब होने का।
फिर एक दिन मैं छत पर लैपटॉप लिए बैठे जाने क्या
कर रहा था,
कि तुम भी एक हाथ में बाल्टी, दुसरे में चिमटियां थामे छत पर आ गयी।
और एक-एक करके
कपड़े फैलाने लगीं तारों पर।
जितनी बार तुम कपड़े
तारों पर डालने से पहले उन्हें झटकती,
उतनी बार तुम्हारी चूड़ियाँ झनझना उठती थी।
उसका शोर पूरी छत पर गूँजता रहा था।
एकदम हाय-हुक-हाय-
हाय वाले गाने की फीलिंग आ रही थी।
तभी मेरी फोन की घंटी बजी
और तुमने देखा की मैं भी वहाँ
चोरों की तरह बैठकर,काम करने की एक्टिंग कर रहा हूँ।
तुम सकपका गयीं।
लेकिन मैंने माहौल पे पकड़
बनाये रखने के लिए तुरंत बोल दिया..
“आज धूप बहुत तेज़ है न!”
“हाँ, सो तो है।
लेकिन क्या किया जाए,
कपड़े तो धुलने ही पड़ेंगे।”
“ये बात तो है,
कोई मदद करूँ आपकी?”
“कपड़े धोने में? ”
“अरे मतलब कपड़े सुखाने में ”
“अरे नहीं मैं कर लूँगी”
“वैसे आपको किसी भी तरह की ज़रूरत हो तो बता
सकती हैं आप, बेझिझक।”
“जी बिलकुल ”
हालाँकि ये एक बहुत औपचारिक वार्ता थी,
लेकिन इस वार्ता के बाद ये स्पष्ट था कि अभी संभावनाएं हैं।
किस चीज़ की, ये पता नहीं,
लेकिन इतना ज़रूर है
कि तुम्हारे आने से अब छत का माहौल बदला सा है,
बाल्कनी अब सूनी नहीं लगती।
मोहल्ला मानो मुकम्मल हो गया हो तुम्हारे आने से,
और मैं भी!!!

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कौन कहता है डूबने वाले मर ही जाते हैं…।

हम तो जितने भी डूबे हैं तुझ में,
उतने ही जिए हैं।

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तुम जो कहो तो जिन्दगी की अगली साँस भी लेना भुल जाऊँ
बस एक तुम्हेँ भुल जाना मेरे बस मेँ नही….!!

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मा का दिल ही ऐसा होता है कि वो
हल्क को भी बोल दे
” बेटा तू कितना कमजोर हो गया है “

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वो लाख तुझे पूजती होगी। मगर तू खुश न हो ए खुदा,
वो पगली मन्दिर भी जाती है तो बस मेरी गली से गुजरने के लिए.

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~Nazar Nazar Ka Farq Hota Hay Hussan Ka Nahii,
Mehboob Jis Ka Bhii Ho Jaiisey Bhi Ho Be’Msaal Hota Hay .. ‘

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Kal tujhse bichrdne ka faisla kar liya tha!!
Aj apne hi dil ko rishwat de rahi hu!! 🙁

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काश मेरा घर तेरे घर के करीब होता, 

बात करना ना सही, देखना तो नसीब होता

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Mujhme Khushboo Basi Usi Ki Hai Jaise Yeh Zindagi Usi Ki Hai,
Wo Kahin Aas Paas Hai Maujood Hoo-Bahoo Yeh Hansi Usi Ki Hai..

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~Tumko De Di Hai Isharoo’N Mein
Ijaazat Maine,
Maang’Ne Se Na Miloo’N Agar Toh Chura Lo Mujhko ..’

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