आज काल की बहू।
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एक बहु आपणे पीहर चली गयी
अर अपणे पांच साल के छोरे नै वो सास्सू
धोरै छोड़ गी!
बहु नै गई नै 15 दिन हुए थे के उसकी सास्सू की चिट्ठी आ-गी !
सास्सू नै लिख राख्या था, “बहु
तावली आ-ज्या, छोरे
का जी कोन्या लाग रह्या” ।
बहु नै उल्टी चिट्ठी लिक्खी, “माँ, तन्नै
नू कोन्या लिख्या अक मेरे छोरे
का जी कोन्या लाग रहया अक तेरे
का ?”
इंटरव्यू लेने वाले ने पूछा : तुम्हारा नाम क्या है?
हरियाणवी : विजय दीनानाथ चौहान।
इंटरव्यू लेने वाला : लेकिन फॉर्म में तो
तुमने अपना नाम रामफल लिखा है?
हरियाणवी: फेर क्यों सुआद ले है?
दो आदमियों की बीवीयाँ मेले में खो गईं जिसमे से एक हरियाणा से था और एक दिल्ली से l
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अपनी अपनी बीवी ढूंढते हुए वो आपस में मिले..!
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तुम्हारी वाली की पहचान? – हरियाणा वाले ने दिल्ली वाले से पूछा.
दिल्ली वाला बोला – 5’7″, गोरी, भूरी आँखें और पतली है, स्लीवलेस पिंक टीशर्ट और लाल मिनी स्कर्ट पहने है।😪
तुम्हारी की क्या पहचान है ?😌
हरियाणा वाला- मेरे आली कै मार गोली, चाल तेरी ढूंढेंगे
वा सिगरट का पहला कश लगवावैगा … अर फेर आदत होए पाच्छै बीड़ी के फायदे बतावैगा …
वा बीयर शराब ना होती बोल कै थारे होठां कै लावैगा … अर फेर कच्ची दारू की एक हजार खूबियां गिणवावैगा …
वा पहले अपणे ताऊ की गल्तियां बतावैगा … फेर थारे बाब्बू नैं थारा सबतै बड़ा दुश्मन सिद्ध करकै दिखावैगा …
या उम्र ऐसिए हो सै , इन बातां मैं थारा वर्तमान तो विश्वाश कर लेगा … पर बालको भविष्य बिगड़ जावैगा …
तो भाई थम आज की पीढ़ी हो कौशिश करो अपने चाचा ताऊ बाब्बू तै अपणा बैस्ट फ्रैंड बणाओ … उनकी बात मानों अर अपने फ्रैंड को बैस्ट तब बणाओ जब वो उन जैसी सलाह दे अर बात करै … 👍👍👍
और अगर या पोस्ट पढ़ कै तन्नैं बुरा लाग्या तो तूं बी बैस्ट फ्रैंड के जाल मैं फंस रया है माई फ्रैंड …
ब्याह आले घर मैं घणखरे रिस्तेदार रात नै छत पै सोवैं थे … एक दारु पीया छौरा अपने दोस्त गैल्यां एक खाट पै सोवै था … उसके तलब उठ्ठी वा बीडी़ लेण निच्चै गया … पाच्छे तै उसका दोस्त उठया अर मूतन चल्या गया …।
इतनै छौरे की बुआ आई अर खाट खाली देख कै उसपै सौगी … छौरा मांग तांग कै बीड़ी पी कै आया अर अन्धेरे मैं दोस्त समझ कै उसपै जम्प मार दी … बुआ नै उठ कै छौरे का झलूस काढ दिआ …।।
अगली रात फेर वा छौरा न्यूए बीडी़ पी कै आया अर रुक्का दे कै बोल्या …. अपणी अपणी खाट पै हो ल्यो भई सारे … नातै फेर बूआ बरगा मूँ बणाओगे
एक महिला पंजाबी मे बोलते हुऐ एक हरियाणवी की किराना दुकान पर चाय पत्ती खरीदने गई .
महिला – लिपटण दी चाह है?
हरियाणवी दुकानदार – मन्ने तो ना है….तन्ने है तो लिपट जा .
😂😂😂
नब्बे दिन छुटके नब्बे दिन नवम्बर दिसम्बर जनवरी … नहाना मतलब मौत को दावत देना …
फरवरी … एक महीना ऐसे ही इंतजार करो क्योंकि अचानक पानी उपर डालोगे तो गरम सरद हो सकता है ….
सिर्फ होली से बचो तो मार्च भी निकल जाएगा … सुसरे गीले पानी से बच के …
अप्रेल में थोड़ा सैंट छिड़क लो … लोगों का ऐसे ही ऐप्रेल फूल बना रहेगा … बइ बंदा खुश्बुएं फेंक रहा तो नहाया होगा … मई थोड़ा उपर नीचे करके निकाल दो …
जून जुलाई अगस्त … पसीना ही इतना आता है कि बंदा वैसे ही नहाया रहता है … सितम्बर मौसम बदलता है डाक्टर भी बोलते हैं नहाना मत …
बचा एक अक्तुबर तो यार एक महिना अपने दम से निकालो … यां सब मैं ही सिखाऊं …
नब्बे दिन छुटके बस्स्स् नब्बे दिन ….
आग्गै मरजी है तेरी आखिर गात है तेरा …
या चुटकला तो ना है सच्ची घटना है मेरे साथ घटी थी …
एअरइंडिया मैं युनियन बाजी के चलदे एअर होस्टैस बी पचपन छप्पन की हो कै रिटायर होवैं सैं समझै वे खुद नै सोलां साल की सैं … अर इकोनमी क्लास आले कस्टमर गैल्यां बिहेव न्यू करैं जणूं वा उनकी छात्ती पै बैठ कै जा रया हो … ढाई घंटे की फ्लाइट थी दिल्ली तै आबूधाबी की मेरी एकबै … वा नास्ता ब्रेड बटर , चटनी बर्गर सा दे कै गई …
अर पैग तो दो प्हल्यां ए ला लिए थे …
तीस लागगी … धौरै तै जावै थी मखा मैडम थोड़ा पानी ला दिजीए प्लीज …
ना सुणी …
अगली बार नजदीक तै लिक्ड़न लाग्गी मखा मैडम पानी ला दो …
ना जी …
तीसरी बार बी कोए असर ना …
फेर तो मेरे अंदर का हरयाणवी जाग ग्या घणी दूर थी मैं रुक्का दे कै बोल्या … ओ आंटी जी पाणी प्यादे गला सूख रया है …
दस सैकेंड मैं ले कै आई आंख्यां तै अंगारे बरस रे थे अर बोतल मेरे स्यामी एडजस्टेबल टेबल पै पटक कै गई … ड्युटी थी ना तो मेरे सिर पै मारती ..
एक जाट की छोरी के ब्याह मैं फेरे
होण लाग रे
थे |
पण्डितआँख मींच क मंतर पढ़ क
बोल्या “ॐ गन गणपते नमह |
51 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
नु कह क जाट त बोल्या धर 51 रुपे
गणेश जी प
| जाट ने 51 रुपे धर दिए |
फेर आँख मीच क और मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन
गणपते
नमह |
101 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 101 रुपे गणेश
जी प |
जाट ने 101 रुपे धर दिए | फेर आँख
मीच क और
मन्त्र पढ़न लगगया |
थोड़ी हान पाछे फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
151 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ”
धरो 151 रुपे
गणेश
जी प | जाट ने 151 रुपे फेर धर दिए |
पण्डित आँख मीच क और मन्त्र पढ़न
लगगया | जाट नै सोची भी पंडित
त
कत्ती लूट क छोड़े गा |
इब के ने जाट ने गणेश जी की मूर्ति ठा क जेब में
रख
ली |
पंडित फेर बोल्या “ॐ गन गणपते
नमह |
201 रुपे दक्षिणा समर्पियामी ” धरो 201 रुपे
गणेश जी प अर
आँख
खोल क
देख्या; त गणेश जी गायब थे | पंडित
बोल्या –
चोधरी साहब ये गणेश जी कित गए
| जाट बोल्या – पंडित जी देश मे और
भी त ब्याह
सं
एकला मेरी बेटी काये थोडा स |
हो सके स किसे और के फेरां प चले
गए हों.