शादी के बाद पत्नी कैसे बदलती है , जरा गौर कीजिए :
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पहले साल : मैंने कहा जी खाना खा लीजिए , आपने काफी देर से कुछ खाया नहीं ।
😛
दूसरे साल : जी खाना तैयार है , लगा दूं ?
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तीसरे साल : खाना बन चुका है , जब खाना हो तब बता देना ।
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चौथे साल : खाना बनाकर रख दिया है , मैं बाजार जा रही हूं , खुद ही निकाल कर खा लेना ।
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पांचवे साल : मैं कहती हूं आज मुझ से खाना नहीं बनेगा , होटल से ले आओ ।
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छठे साल : जब देखो खाना , खाना और खाना , अभी सुबह ही तो खाया था ।
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शादी के बाद पति कैसे बदलते है , जरा गौर कीजिए
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पहले साल : dear संभलकर उधर गड्ढा हैं
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दूसरे साल : अरे यार देख के उधर गड्ढा हैं
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तीसरे साल : दिखता नहीं उधर गड्ढा हैं
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चोथे साल : अंधी हैं क्या गड्ढा नहीं दिखता
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पांचवे साल : अरे उधर -किधर मरने जा रही हैं गड्ढा तो इधर हैं ..
मुस्कुराते रहिये…😛😀😛
हंसना ही जिन्दगी है।
वरना शांत तो मुर्दे रहते हैं।
Chand Ki Had Raat Tak Hoti Hai,
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Suraaj Ki Had Sirf Din Tak Hoti Hai,
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Hum Dosti Me Din – Raat Nahi Dekhte,
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Qki Humari Dosti Ki Had Aakhri Saans Tak Hoti Hai
संता का गला बैठ गया, बहुत कोशिश की पर आराम नहीं मिला।
रात के दो बजे तंग आकर अपनी बीवी से बोला, “कुछ समझ में नहीं आ रहा है क्या करूँ?”
बीवी बोली, “इसमें शर्माने की क्या बात है सामने ही तो डॉक्टर का घर है, चले जाओ।”
संता बोला, “रात के दो बजे किसी के घर जाते हुए अच्छा नहीं लगता।”
बीवी: डॉक्टर का फ़र्ज़ होता है कि मरीज को देखना और ठीक करना, रात हो या दिन हो कोई मतलब नहीं होता इसमें, आप जाओ।
संता ने इस बात को सोचा और परेशानी की हालत में सामने वाले फ़्लैट में पहुँच के दरवाज़ा खटखटाया।
अंदर से डॉक्टर की बीवी ने पूछा, “कौन है?”
संता गले की बैठी हुई आवाज़ में बोला, “मैं हूँ आपका पड़ोसी, डॉक्टर साहब हैं?”
अंदर से डॉक्टर की बीवी की सेक्सी आवाज़ आई, “नहीं हैं, आ जाओ।”
एक भाई ने स्टेटस चेंज कर तिरंगा लगा लिया
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मगर ना 26 जनवरी थी ना 15 अगस्त का दिन …
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मैंने कारण पूछा तो बोला ……
4 दिन की आजादी मिली है
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तुम्हारी भाभी मायके गई है !!
बेटा -: पापा आप इंजिनियर कैसे बने ??
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पापा-: बेटा, उसके लिये बहूत दिमाग की ज़रूरत पड़ती हैं
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बेटा-: हा, इसलिय ही तो पुछ रहा हूँ
आप इंजिनियर कैसे बने
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पापा-
..दें थप्पड़
..दें थप्पड़
ज्यादातर पत्नियाँ अपने पति की बहनों को
प्यार से नहीं देखती,
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जबकि सारे पति अपनी पत्नी की बहनों को
प्यार से ही देखते हैं…
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पुरूष वाकई महान होते हैं…. बस कभी
अपनी महानता का ढिंढोरा नहीं पीटते…!