चाँद बहुत दूर है , तड़पाता है , जमाना कहता है ,
मुझे देखो मेरा दिल कितने सितम सहता है …।
डूबा रहता हूँ उसकी रोशनी में हर लम्हा ,
हुस्न का इक दरिया रोज मेरी आँखों के आगे बहता है …।
बनाने वाले को भी नाज़ होगा “शर्मा” अपनी कारीगरी पे ,
अरे … मेरे सामने वाली खिड़की में इक चाँद का टुकड़ा रहता है