मैं अपने हौसले को यक़ीनन बचाऊँगा..
घर से निकल पड़ा हूँ तो फिर दूर जाऊँगा…बादल को दे के दावतें इस फ़िक्र में हूँ मैं
कागज़ के घर में उसको कहाँ पर बिठाऊँगा.
Related Posts
बढ़ने लगे वो हमारी तरफ , तो लगा मुझे, मेरी मंजिल को मकाम मिल गया । होश आया तो मंजिल Continue Reading..
मैंने कहा आज झूठ का दिन है……. . . . वो मुस्करा कर बोले, फिर तुम मेरे हो.
-Siirf Ek Baar Aao Mere Dil Ki Aahat Sun’Ne, Phir Laot Ne Ka Irada Hum Tum Par Chod Dengey .. Continue Reading..
वो बचपन कितना सुहाना था सर ए आम रोया करते थे. अब एक आँसू भी गिरे तो लोग हजारों सवाल Continue Reading..
मुझे ना ढूंढना कहीं जमींन और आसपास में…!! अगर मैं तेरे दिल में नहीं तो फिर कहीं भी नहीं…!!
~ Gham-e-Khaas Par Kabhi Chup Rahe .. Toh’ Kabhi Ro Diye Gham-e-Aaam Par .. ^
कोई मेरी नींद से कहे की मेरे साथ समझौता कर ले…. क्यों की वो “लवप्रीत ” से बहुत दूर जा Continue Reading..
जरा सोचिए – विज्ञान हमे कहाँ ले आया ? #पहले :-वो कुँए का मैला कुचला पानी पीकर भी 100 वर्ष Continue Reading..