मोहब्बत में दूरियों से फर्क नहीं पड़ता
मोहब्बत निभाने वाला सच्चा हो
सुख मेरा, काँच सा था.. ना जाने कितनों को चुभ गया..!!
~Phiir Jab Meiin Uske Biina Jeeney Lagii , Usee Merii Kamii Mehsoos Hone Lagi .. ‘
मुकाम वो चाहिए मुझे, की जिस दिन भी हारु , . उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेंरे चर्चे हो
कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से कहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलतें हैं
~Jiski Sazza Sirf Tum Ho Aiisa Koii Gunaah Karna Hai Mujhe .. ‘
Ek tera noor hi kaafi h.. Sare jhaa ki roshni k liye
!! वो अब भी आती है ख्वाबों में मेरे.. ये देखने की मैं उसे भूला तो नहीं…..!!
वो बड़े घर की थी साहब, . छोटे से दिल में कैसे रहती.
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