है एक शख़्स ऐसा भी, जो किश्तों में मार रहा है मुझे !!
कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से कहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलतें हैं
बस आख़री साँस बाकी है ,, तुम आती हो या मैं ले लूँ…
छोटा सा सपना है मेरा, जो रोटी में खाऊ वो तू बनाये..
मेहनत इतनी खामोशी से करो कि . “सफलता शोर मचा दे”
हमसफ़र खूबसूरत नहीं.. सच्चा होना चाहिए
~Apni Narazgii Ki Koii Wajah Toh Batayii Hotii, Hum Duniiya Chor Detey Tujhe Manany Ke Liiye .. ‘
तुमसे ऐसा भी क्या रिश्ता हे? दर्द कोई भी हो.. याद तेरी ही आती हे।
~Gar Tum Jo Saath Aa Gey Hote, Ziindagi Har Tarah Se Mumkin Thi .. ‘
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