दाग़ तो रूह पर भी आ जाता है, जब दिलों में दिमाग़ आ जाता है
लोगो के तो दिन आते है पर . हमारा तो जमाना आएगा
~Aaj Ki Shaam Bhii Qayamat Kii Tarha Guzrii, Na’Jane Kya Baat Thii Har Baat Pe Tum Yaad Ay .. ‘
~Tum Jo Kehte The Acha Haii Zamana Hum Se, Ye Batao K Mila Koi Hamarey Jaisa .. ?
एम्बुलेंस सा हो गया है ये जिस्म, सारा दिन घायल दिल को लिये फिरता है।
क्यों याद करेगा कोई बेवजह मुझे ऐ खुदा , लोग तो बेवजह तुम्हे भी याद नहीं करते !!”
एक छोटी पेंसिल एक विशाल याद्दाश्त से कहीं बेहतर है
पुराने आशिक वफा तलाश करते थै, आज के आशिक जगह तलाश करते है..
मैं बुरा हूँ तो बुरा ही सही… …. कम से कम “शराफत” का दिखावा तो नहीं करता
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