अंत में लिखी है दोनों की बर्बादी, आशिक़ हो या हो आतंकवादी
मिट जाते है औरों को मिटाने वाले . लाश कहा रोती है, रोते है जलाने वाले
कट रही है ज़िंदगी रोते हुए, और वो भी तुम्हारे होते हुए…
~Hasrat’E-Deedar Bhii Kya Cheez Hyy, Wo Samne Aye To Musalsal Dekha Bhi Nahi Jata .. ‘
अंत में लिखी है दोनों की बर्बादी, आशिक़ हो या हो आतंकवादी.
~Kabhii Aaye Ga Use Bhi Mera Khayal, Shayad Yeh Bhi Mera Khayal Hy .. ‘
मेरे साथ बैठ कर वक़्त भी रोया एक दिन बोला बन्दा तू ठीक है मैं ही ख़राब चल रहा हूँ
फ़िक्र तो तेरी आज भी है.. बस .. जिक्र का हक नही रहा।
शाख से फूल तोड़कर मैंने सीखा.. अच्छा होना गुनाह है, इस जहाँ में..!!
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