मैं अपने हौसले को यक़ीनन बचाऊँगा..
घर से निकल पड़ा हूँ तो फिर दूर जाऊँगा…बादल को दे के दावतें इस फ़िक्र में हूँ मैं
कागज़ के घर में उसको कहाँ पर बिठाऊँगा.
Related Posts
Ham bi utaarna chahte hai kagaz ke tukde par apne jazbat, Lekin dar hai, kambakht zamane ko bimar dil ka Continue Reading..
कोई लौटादे वो प्यारे-प्यारे दिन.. कटती नहीं रातें उसके बिन..
फिर एक दिन ऐसा भी आया जिन्दगी में की, मैंने तेरा नाम सुनकर मुस्कुराना छोड़ दिया ।।
एक बात कहूँ ये जो बोलते है ना हमे कोई फरक नही पड़ता वो अंदर से बहुत टूटे हुए होते Continue Reading..
आजकल लाखों मिन्नतें करने के बाद भी इच्छा पूरी नहीं होती और बचपन में पलक का टूटा बाल फूंक से Continue Reading..
Sochti thi us bewakuf ko bhul jaayeinge, Dekh ker bhi andekha ker jaayeinge, Par Jaise hi wo saamne aaye wo Continue Reading..
एक सवेरा था जब हंस कर उठते थे हम और आज कई बार बिना मुस्कराये ही शाम हो जाती है
कसूर उनका नहीं हमारा ही है…. हमारी चाहत ही इतनी थी कि उनको गुरूर आ गया।