वो मोहब्बत भी जहर बन जाती है….. अगर किसी को हद से ज्यादा चाहो……
Saraha hai hmne tujhe apni sarakho pe; Manga hai hmne tujhe apni hr dUa o mein*………
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ “इश्क” मुकम्मल, इंसानों को तो हमने सिर्फ बर्बाद होते देखा है….!!
नफ़रत करना तो कभी सिखा ही नहीं,,, हमने दर्द को भी चाहा है अपना समझ कर… :))
Aa kuch likhdu tere bare meIN, Tu bhi dhundhti hogi khud ko mere Lafzon meIN
दश्त था, सेहरा था, तन्हाई थी, वीरानी थी, अपने ही अपने नही थे…बस यही हैरानी थी.
Thak gaya hun main dard chhupate chhupate, Aur log kehte hain main muskurata bahut hun
सारी उम्र जिस घर को सजाने में गुजार दी , उस घर में मेरे नाम की तख्ती तलक नहीं !
तरस गए हैं तेरे लब से कुछ सुनने को हम…. प्यार की बात न सही कोई शिकायत ही कर दे..
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