मेरी दास्ताँ-ए-वफ़ा बस इतनी सी है, उसकी खातिर उसी को छोड़ दिया…
Tumhe ulfat nahin mujhse mujhe nafrat nahin tumse, Ajab shikwa sa rehta hai tumhe mujhse mujhe tumse..
चुनौतियो को स्वीकार करो क्योकि इससे या तो सफलता मिलेगी या सीख
जनाजा भारी था उस गरीब का क्यूंकी, वो अपने सारे अरमान साथ लिए जा रहा था
Uffff Tera Aksar Bhool Jana MujhKo ” Agar Dil Na Diya Hota To Teri Jan Le Lete.
उनकी गलियो से गुजरना तो बहुत आम था… बहाना भी एक कि कोई बेहद जरुरी काम था…
Gham-e-Hayaat Pareshaan Na Kar Sakega Mujhe; Ki Aa Geya Hai Hunar Mujh Ko Muskurane Ka!
हमको इतना बुरा भी ना समझो तुम…! दर्द लिखने की आदत है देने की नहीं…..!
कैसे सोऊ सुकून की नींद में साहब… सुकून से सुलाने वालों के तो शव आ रहें हैं..
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