जब जरुरत के समय काम आने वाला पैसा बदल सकता है …. तो तू क्या चीज है…
में बहुत ज़ालिम हूँ ऐ मेरे दिल….. तुझे हमेशा उसके हवाले किया है, जिसे तेरी कदर ही नहीं…!!
यहाँ मेरा कोई अपना नहीं है….. . …..चलो अच्छा है कुछ ख़तरा नहीं है !!
उनकी गलियो से गुजरना तो बहुत आम था… बहाना भी एक कि कोई बेहद जरुरी काम था…
सौदा कुछ ऐसा किया है तेरे ख़्वाबों ने मेरी नींदों से.. या तो दोनों आते हैं, या कोई नहीं आता..
तेरी यादो को पसन्द आ गई है मेरी आँखों की नमी, हँसना भी चाहूँ तो रूला देती है तेरी कमी
बंध जाता है जब किसी से जब रूह का बंधन, तो इज़हार-ऐ-मोहब्बत को “अल्फ़ाज़ों” की ज़रूरत नहीं होती.
किसी को प्यार करो तो इतना करों की उसे जब भी प्यार मिलें… तो तुम याद आओ….
साजन कोई वकील मुझे ऐसा करा दे,, जो हारा हुआ प्यार मुझे फिर से जिता दे।।
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