अजीब दस्तूर है मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है टूट कोई जाता है..
हर बार किस्मत को दोष देना अच्छी बात नही कभी-कभी हम भी हद से ज्यादा माँग लेते है
एक तरफ आँखें है जिनमें नीदें भरी है… दूजी पलकें है जो इंतजार की जिद पे अडी है
गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुजारें हैं कितने भला कैसे कह दूं कि “माँ” अनपढ़ है मेरी।।
मेरे साथ बिताए लम्हो की याद जरा सम्भाल कर रखना . क्योकि हम याद तो आएगे मगर लौटकर नही
~ Aa Dekh Mujh Se Roothne Wale K Tere Bagair Din Bhi Guzar Gaya Meri Shab Bhi Guzar Gayi .. Continue Reading..
मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे, अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती ।
Muhabbat kesi bhi h0 Sahib…! Sajda kerna sikha deti hai…!
हजार टुकड़े कर दिए उसने मेरे दिल के।।। फिर वो खुद रो पड़ी,,हर टुकड़े पर अपना नाम देख कर।।
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