सारा बदन अजीब से खुशबु से भर गया शायद तेरा ख्याल हदों से गुजर गया..
उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा, दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है।
मेरी दास्ताँ-ए-वफ़ा बस इतनी सी है, उसकी खातिर उसी को छोड़ दिया…
तूने फैसले ही सारे दूर जाने वाले किये, नहीं तो बता मेरे से करीब तेरे और कौन था।
~Kismat Ki Lakeeron Par Aitbaar Karna Chor Dia Jab Insaan Badal Sakte Hain To Ye Lakeeren Kyun Nahi .. ^
कमज़ोर पड़ गया है मुझसे तुम्हारा ताल्लुक … या कहीं और सिलसिले मजबूत हो गए हैं..
सुनो एक फ़िक्र, किसी का #ज़िक्र साथ ले जाऊँगा थोड़ा #हँसा, तो कुछ पल रुला के चला #जाऊँगा
खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की … आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है…
Yani tarteeb e sitam ka b salika tha usy… Us ne pathar b uthaya mujhe pagal kar k…
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