कितना समेटे खुद को बार बार, टूट के बिखरने की भी सीमा होती है ||
कोई खुद में खो गया हमें भूलकर हम खुद को भूला बैठे उनकी यादों में खोकर
लोग तो वही रहते है बस वक्त के साथ उनका बर्ताव बदल जाता है
दीवार का कैलेंडर तो बदलता है हर साल, ए-ख़ुदा अब के बरस हालात भी तो बदल दे !!
कहते हे कि पत्थर दिल रोया नही करते तो.. फिर पहाङो से ही झरने क्यो बहा करते है ..”
इक झलक जो मुझे आज तेरी मिल गयी मुझे☺😍 फिर से आज जीने की वजह मिल गयी❤
कोई तो होगा टूटा हुआ मेरी तरह ही… जो जुड़ने की ख्वाहिश लिए जी रहा होगा अकेला कही..*
~सुना है कि तुम रातों को देर तक जागते हो यादों के मारे हो या मोहब्बत में हारे हो l
अगर आँसूं बहा लेने से यादे बह जाती तो तेरी कसम एक ही दिन में हम तेरी याद मिटा देते
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