कितना समेटे खुद को बार बार, टूट के बिखरने की भी सीमा होती है ||
मंजूर थे हमें वक्त के सारे सितम मगर…. तुमसे बिछड़ कर जी लेना ~ सज़ा ज़रा ज्यादा हो गई !
अगर मेरी माँ और उसकी होने वाली बहू मेरे साथ है, तो इस कमबख्त दुनिया की मेरे सामने क्या औकात Continue Reading..
-Aap Khud Hi Apnii AdaaO Pe Zara Gaur Kijiye, Hum Araz Krengey Toh Shikayat Hogi .. ‘
मोहब्बत😍 सब्र के अलावा कुछ भी तो नहीं है शायद,,,,,😓😓 मैंने हर इश्क़ज़ादे 🙇को सिर्फ इंतज़ार करते देखा है
राहों का ख़याल है मुझे.. मंज़िल का हिसाब नहीं रखती। अल्फ़ाज़ दिल से निकलते है.. मैं कोई किताब नहीं रखती।।
पता नहीं कैसी नजर लगी जमाने की साली अब कोई वजह नहीं बनती मुस्कुराने की!!!
माना की मरने वालों को भुला देतें है सभी. . . मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी
: एक वक़्त था जब हम सोचते थे कि हमारा भी वक़्त आएगा , …. और एक ये वक़्त है Continue Reading..
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