कितना समेटे खुद को बार बार, टूट के बिखरने की भी सीमा होती है ||
मोहब्बत थी, तो चाँद अच्छा था..! उतर गई, तो दाग भी दिखने लगे..
-Aap Khud Hi Apnii AdaaO Pe Zara Gaur Kijiye, Hum Araz Krengey Toh Shikayat Hogi .. ‘
शायद हम ने जिंदगी की कीमत को जाना ही नहीं, वरना किसी के लिए खुद को बर्बाद नहीं करते..
चलो मान लेता हुँ कि मुझे महोब्बत करनी नही आती . पर यह तो बता तुझे दिल तोडना किसने सिखाया
मोहब्बत का इजहार करके मेरे दर्द को बेघर ना कर… ताउम्र काटी है इसने मेरे सीने में रह कर…..।।।।”
“मुझसे जब_भी मिलो तो नजरे उठा_के मिला_करो, मुझे_पसंद है अपने_आप को आपकी_आँखो मे देखना”
मेरी आँखों में मत ढूंढा करो खुद को पता है ना.. दिल में रहते हो खुदा की तरह
Muhabbat kesi bhi h0 Sahib…! Sajda kerna sikha deti hai…!
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