कभी झुकने की तमन्ना कभी कड़वा लहजा अपनी उलझी हुयी आदतों पे रोना आया
जिनके मिलते ही… ज़िन्दगी में ख़ुशी मिल जाती है … वो लोग जाने क्यों… ज़िन्दगी में कम मिला करते है…!!
मुझे मालूम था के लौट के अकेले ही आना है, फिर भी तेरे साथ चार कदम चलना अच्छा लगा..
गुज़र गया दिन अपनी तमाम रौनके लेकर. ज़िन्दगी ने वफ़ा कि तो कल फिर सिलसिले होंगे.
कमाल की मोहब्बत थी उसको हमसे, अचानक ही शुरू हुई और बिन बतायें ही ख़त्म.
नाज़ुक लगते थे जो हसीन लोग, वास्ता पड़ा तो पत्थर के निकले.
आपका सबसे अच्छा दोस्त किसी और जाति से होगा और आपका सबसे बड़ा दुश्मन आपका कोई अपना ही होगा
में खुश हूँ कि उसकी नफरत का अकेला वारिस हूँ वरना मोहब्बत तो उसे कई लोगो से है…..
अपनी मोहब्बत पर इस कदर यकींन है मुझे की, जो मेरा हो गया वो फ़िर किसी ‘और’ का हो नही Continue Reading..
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