तकदीर इतनी भी बुरी नहीं थी, पर कुछ रिश्तों ने नरक बना दी जिंदगी को
Kaam aisa karo ki naam ho jaye, ya phir, Naam aisa karo ki sunte he kaam ho jaye…!
तुम साथ हो तो मुकद्दर पे हकुमत हैं अपनी। बिन तेरे ज़िन्दगी की औकात ही क्या हैं।।
~Umar Bhar Rahugi Gulam Haii Koi Jo Us Sa Mila De .. ‘
वफ़ा का तो वजूद ही नहीँ रहा यारो किस्से भी उन्ही के हैं जो बेवफा हैं।
भूले हैं रफ्ता-रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम, किश्तों में खुदकुशी का मज़ा हम से पूछिए.
भुलने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता,.. मैंने नहीं मेरे दिल ने चुना है तुम्हे
फिर से तेरी यादें मेरे दिल के दरवाजे पे खड़ी हैं वही मौसम, वही सर्दी, वही दिलकश ‘जनवरी’ है !!
ख़ुबसूरत था इस क़दर के महसूस ना हुआ,,,,,,,, कैसे कहाँ और कब मेरा बचपन चला गया
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