हर ख़ता माफ़ कर दुंगा सिर्फ इतना बता दे, . क़ि तुमने मुहब्बत के लिये मुझे ही क्यों चुना
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सादगी अगर हो लफ्जो मे, यकीन मानो, प्यार बेपनाह,और दोस्त बेमिसाल मिल ही जाते हैं !!
हमको इतना बुरा भी ना समझो तुम…! दर्द लिखने की आदत है देने की नहीं…..!
तुझे पाने की चाह में इतना कुछ खोया है, की अब तू मिल भी जाए तो भी अफ़सोस होगा।
दिन छोटे और रातें लंबी हो चली है ,मौसम ने यादों का वक़्त बढ़ा दिया।..
~Hum To Agaaz’E-Mohabbat Mein Hi Lutt Gy, Log Toh Kehte The Ke Anjaam Bura Hota Haii .. ‘
दूर उन्हें जाना था ये …. एहसास तो था लेकिन……!!* *बिछड़ना इस कदर होगा …..ये ख्याल ना आया …..
यूँ तो कोई शिकायत नहीं मुझे तेरे आज से, मगर कभी – कभी बिता हुआ कल याद आता है..
कोई चेहरे का दीवाना, किसी को तन की तलब!! अदाएं पीछा करवाती हैं, मोहब्बत कौन करता है
