राख से भी आएगी खुशबू मोहब्बत की, मेरे खत तुम सरेआम जलाया ना करो..!!
*तलब ये है कि…. मैं सर रखूँ तेरे सीने पे* *और तमन्ना ये कि….मेरा नाम पुकारती हों धड़कनें तेरी*
आप कब सही थे। इसे कोई याद नही रखता। लेकिन आप कब गलत थे इसे सब याद रखते है।…
तेरी मुहब्बत की तलब थी तो हाथ फैला दिए वरना, हम तो अपनी ज़िन्दगी के लिए भी दुआ नहीं करते…
ना तुझको खबर हुई ना ज़माना समझ सका, हम तुझ पर, चुपके-चुपके से कई बार मर गये..
~Hum To Agaaz’E-Mohabbat Mein Hi Lutt Gy, Log Toh Kehte The Ke Anjaam Bura Hota Haii .. ‘
पाना है मुक्काम ओ मुक्काम अभी बाकी है अभी तो जमीन पै आये है असमान की उडान बाकी है !
तू मुझसे मिलने कभी नक़ाबों मे ही आ ! ख़ुद न मुमकिन तो ख़्वाबों मे ही आ !!
Aur Woh Shakhs Jo Qatra Qatra Kar Kay Andar Utar Geya Ho, Woh Bhala Aisey Hi Kaisey Bhulaya Jaa Sakta Continue Reading..
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